ड्रोन, जिन्हें मानव रहित हवाई वाहन (UAV) भी कहा जाता है, आज दुनिया भर में रक्षा, निगरानी और वाणिज्यिक क्षेत्रों में एक क्रांति ला रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य आधुनिक संघर्षों में इनके बढ़ते उपयोग ने साबित कर दिया है कि अब ड्रोन तकनीक ही भविष्य की लड़ाई का केंद्र बिंदु है। इस लेख में हम जानेंगे कि दुनिया के किस देश के पास हैं सबसे ज्यादा ड्रोन और भारत का ड्रोन शक्ति में स्थान क्या है।

दुनिया में सबसे ज्यादा ड्रोन वाले देश
जब सबसे ज्यादा ड्रोन वाला देश की बात आती है, तो कुछ देश तकनीक और संख्या, दोनों ही मामलों में अग्रणी हैं।
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संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): ड्रोन तकनीक में सबसे आगे वाली है। आपको बता दें कि अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा ड्रोन हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य ड्रोन बेड़ा बनाता है। इनमें सरल RQ-11 रेवेन से लेकर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाले घातक ड्रोन जैसे MQ-9 रीपर, MQ-1C ग्रे ईगल और RQ-4 ग्लोबल हॉक शामिल हैं। संख्या और तकनीक, दोनों ही मामले में अमेरिका का वर्तमान में कोई सीधा मुकाबला नहीं है।
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तुर्की: हाल के वर्षों में, तुर्की ने अपनी तेजी से हुई तरक्की से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। बायराकतर TB2 ड्रोन ने कई युद्धक्षेत्रों में अपनी कारगर साबित की है और अब इसे कई देशों को निर्यात किया जा रहा है। एक मजबूत और निर्यात-केंद्रित ड्रोन बेड़े के साथ, तुर्की खुद को ग्लोबल ड्रोन पावर के रूप में स्थापित कर रहा है।
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चीन: चीन एक ऐसी शक्ति है जो तेजी से उभर रही है। ड्रोन के उत्पादन और निर्यात के मामले में वह एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है। चीन और रूस के पास कितने ड्रोन हैं, यह एक बड़ा सवाल है, लेकिन इतना तय है कि चीन के पास संख्या के लिहाज से एक विशाल बेड़ा है और वह लगातार इसे आधुनिक बना रहा है।
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यूरोपीय देश (पोलैंड, जर्मनी, फ्रांस): यूरोप के देश भी इस होड़ में पीछे नहीं हैं।
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पोलैंड के पास 1000 से ज्यादा ड्रोन हैं, जिनमें वारमेट जैसे खतरनाक ‘सुसाइड ड्रोन’ और ऑर्लिक व ऑर्बिटर जैसे ड्रोन शामिल हैं।
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जर्मनी के पास लगभग 670 ड्रोन हैं, जो निगरानी और युद्ध दोनों कार्यों में सक्षम हैं।
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फ्रांस भी 591 ड्रोन के साथ इस सूची में शामिल है, जिनमें थेल्स स्पाई रेंजर, ज़फ्रान पेट्रोलर और अमेरिका का बना MQ-9 रीपर शामिल है।
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अन्य महत्वपूर्ण देश:
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ऑस्ट्रेलिया के पास 557 ड्रोन हैं, जिनमें PD-100 ब्लैक हॉर्नेट और MQ-9 रीपर जैसे उन्नत मॉडल शामिल हैं।
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फिनलैंड के पास 412 ड्रोन हैं और उसके बेड़े में ऑर्बिटर 2B और रेंजर ड्रोन प्रमुख हैं।
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रूस के बेड़े में ओरलान-10 जैसे जासूसी ड्रोन और इजराइल से खरीदे गए सर्चर MK II जैसे ड्रोन शामिल हैं, जो उसकी बढ़ती ड्रोन क्षमता को दर्शाते हैं।
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भारत का स्थान और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
अब सवाल उठता है कि भारत का ड्रोन शक्ति में स्थान क्या है? ड्रोन क्षमता में भारत का स्थान 2024 में तेजी से मजबूत हो रहा है।
भारत के पास कितने ड्रोन हैं? इस समय भारत के पास लगभग 625 ड्रोन हैं। वैश्विक रैंकिंग में ड्रोन शक्ति के मामले में भारत छठे नंबर पर आता है, जो एक सम्मानजनक स्थिति है। भारत के पास कौन से सैन्य ड्रोन हैं इस सवाल का जवाब है – इजराइल के बने हेरोन 1 और स्पाई लाइट जैसे उन्नत ड्रोन, जो जासूसी और निगरानी के काम आते हैं।
आत्मनिर्भरता की राह:
हालाँकि, भारत आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी ड्रोन तकनीक पर जोर दे रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का महत्व समझते हुए स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) लगातार भारत का सबसे शक्तिशाली ड्रोन बनाने पर काम कर रहा है, जैसे कि टैपस BH-201 (Rustom श्रृंखला)। साथ ही, भारत ने अमेरिका से MQ-9B रीपर जैसे उन्नत ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो उसकी निगरानी और स्ट्राइक क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे।

निष्कर्ष
ड्रोन तकनीक का भविष्य बहुत ही व्यापक है और इसका वैश्विक रक्षा परिदृश्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। युद्ध में ड्रोन का उपयोग अब एक सामान्य बात हो गई है। ऐसे में, भारत की ड्रोन क्षमता में वृद्धि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगे की चुनौतियाँ जैसे तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत ड्रोन बनाना और उन्हें बड़ी संख्या में तैनात करना, अभी बाकी हैं। लेकिन, स्वदेशी विकास और रणनीतिक खरीद के सही मेल से भारत निकट भविष्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी में दुनिया के देश की अग्रिम पंक्ति में शामिल हो सकता है।









