भारत के लोकतंत्र की सबसे अहम कड़ियों में से एक है उपराष्ट्रपति चुनाव। इस बार का चुनाव खास रहा क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने अपने-अपने दावेदार उतारे थे। 9 सितंबर 2025 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के नतीजों में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने भारी मतों से जीत हासिल की और भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने।

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का परिणाम
मतदान संसद भवन में सुबह 8:10 बजे से शाम 5:00 बजे तक हुआ। 781 सांसदों में से 767 ने वोट डाला, जो कि लगभग 98.2% मतदान रहा। गिनती के दौरान यह साफ हो गया कि राधाकृष्णन की राह आसान होने वाली है।
कुल वैध वोट: 752
अवैध वोट: 15
जीत के लिए आवश्यक वोट: 377
सीपी राधाकृष्णन को मिले: 452 वोट
विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को मिले: 300 वोट
इस तरह राधाकृष्णन ने 152 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर ली। यह नतीजा न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि एनडीए में अभी भी एकजुटता मजबूत है।
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विपक्ष पर बढ़त क्यों रही आसान?
विपक्ष ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, एनडीए के अलावा जेडीयू, एआईएडीएमके, एनसीपी, वाईएसआरसीपी और टीडीपी जैसी पार्टियों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया। यही कारण रहा कि विपक्ष को उतनी मजबूती नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

इतिहास गवाह है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की संख्या पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उम्मीदवार की छवि और अनुभव भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राधाकृष्णन के लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव ने उनके पक्ष में माहौल बनाया।
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सीपी राधाकृष्णन: राजनीतिक सफर
चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तिरुप्पुर, तमिलनाडु में हुआ।
युवावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनसंघ से जुड़े।
1980 में भाजपा की स्थापना के साथ ही वे पार्टी का हिस्सा बने।
1998 और 1999 में उन्होंने कोयंबटूर से लोकसभा चुनाव जीता और लगातार सांसद बने।
भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ मजबूत की।
वे अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे।

गवर्नर से उपराष्ट्रपति तक
राधाकृष्णन सिर्फ सांसद और संगठनात्मक नेता ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कई संवैधानिक जिम्मेदारियां भी निभाईं।
18 फरवरी 2023 को झारखंड के राज्यपाल नियुक्त हुए।
मार्च 2024 में उन्हें तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार मिला।
जुलाई 2024 से सितंबर 2025 तक वे महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे।
राज्यपाल के रूप में उनके प्रशासनिक अनुभव ने ही उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाया।

निजी जीवन और रुचियाँ
1985 में उन्होंने आर. सुमति से विवाह किया और उनके दो बच्चे हैं। राजनीति के साथ-साथ वे खेलों के शौकीन हैं। टेबल टेनिस, क्रिकेट और वॉलीबॉल खेलना उन्हें पसंद है। युवावस्था में वे टेबल टेनिस कॉलेज चैंपियन भी रह चुके हैं।
सामाजिक कार्यों में भी उनकी सक्रियता रही है और वे लायंस क्लब इंटरनेशनल से जुड़े हैं।
सीपी राधाकृष्णन की नेट वर्थ
राजनीति से परे राधाकृष्णन की आर्थिक स्थिति भी चर्चा का विषय रही है।
2019 लोकसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹67.11 करोड़ थी।
चल संपत्ति: ₹7.31 करोड़ (नकद, बैंक जमा, शेयर, बीमा, आभूषण आदि)
अचल संपत्ति: ₹59.6 करोड़ (कृषि और गैर-कृषि भूमि, भवन)
देनदारियाँ: लगभग ₹2.37 करोड़
2025 तक उनकी अनुमानित नेट वर्थ ₹55–65 करोड़ आंकी गई है।
हैरानी की बात यह है कि उनके पास कोई निजी कार नहीं है, जो उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली को दर्शाता है।
उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट निवेश, टेक्सटाइल निर्यात व्यवसाय और व्यावसायिक भवनों से आता है।
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निष्कर्ष
सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में भारी मतों से विजयी हुए और देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने। उनकी यह जीत भाजपा और एनडीए के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता है। उनका राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और सादगीपूर्ण जीवनशैली उन्हें इस पद के लिए योग्य बनाती है।
नेट वर्थ के लिहाज़ से वे करोड़पति हैं, लेकिन उनकी छवि सादगी और ईमानदारी की है। आने वाले वर्षों में उनसे उम्मीद रहेगी कि वे संसद के उच्च सदन राज्यसभा की गरिमा को और ऊँचाई देंगे।
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