NPCI का बड़ा प्लान: अब सिर्फ देशों से नहीं, बल्कि ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ेगा UPI, जानिए कैसे बदलेगी तस्वीर

Project Nexus India: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी UPI आज हमारी जिंदगी का ऐसा अहम हिस्सा बन चुका है कि छोटी से छोटी खरीदारी के लिए भी हम बिना सोचे स्कैन कर देते हैं। चाहे सुबह की चाय की दुकान हो या फिर किसी बड़े मॉल में शॉपिंग, UPI ने पैसे के लेन-देन को बेहद आसान और झंझट-मुक्त बना दिया है। गूगल पे, फोनपे, पेटीएम जैसे ऐप्स के जरिए UPI ने हमारी जेब को डिजिटल बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब यह सुविधा सिर्फ भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहने वाली है? नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने अब UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की जो रणनीति तैयार की है, वह वाकई में बेहद महत्वाकांक्षी और दिलचस्प है।

क्यों खास है NPCI की नई रणनीति?

दरअसल, NPCI अब UPI का विस्तार सिर्फ एक-एक देश के साथ अलग-अलग करार करके नहीं करना चाहता, बल्कि वह बड़े ग्लोबल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के साथ सीधा तालमेल बिठाने की पूरी तैयारी में है। इस नई रणनीति का सीधा मतलब यह हुआ कि आने वाले समय में आप दुनिया के किसी भी कोने में हों, बस अपना UPI ऐप खोलिए और तुरंत भुगतान कीजिए, बिल्कुल उसी आसानी से जैसे आप अपने शहर की किराना दुकान या ठेले वाले को पैसे देते हैं। यह सिर्फ एक सपना नहीं है, बल्कि हकीकत की जमीन पर उतरता हुआ एक बड़ा बदलाव है।
ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ेगा UPI
ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ेगा UPI

समिट में हुआ बड़ा खुलासा

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान NPCI की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-ग्रोथ सोहिनी राजोला ने इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में अहम जानकारी दी। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि NPCI इंटरनेशनल यानी NIPL इन दिनों दुनिया के कई देशों के रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम और दूसरे वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उनके बयान का सार यह था कि NPCI सिर्फ एक ही तरह के मॉडल पर काम नहीं कर रहा, बल्कि वह द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सभी संभावित रास्तों को तलाश रहा है, ताकि UPI को हर उस जगह पहुंचाया जा सके जहां भारतीय पर्यटक, छात्र या प्रवासी मौजूद हैं।
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अलीपे+ से जुड़ने की चर्चा ने मचाई हलचल

यह बयान ऐसे समय में आया है जब चारों तरफ खबरें हैं कि भारत सरकार UPI को चीन की अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली अलीपे+ से जोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अलीपे+ कोई छोटा-मोटा प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक दिग्गज है। पहले यह चीन के अलीबाबा ग्रुप का हिस्सा था, लेकिन अब यह सिंगापुर की कंपनी एंट इंटरनेशनल के तौर पर स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म की पहुंच का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनियाभर के लगभग डेढ़ अरब से ज्यादा व्यापारी इससे जुड़े हुए हैं और इसके करीब सवा अरब से ज्यादा यूजर अकाउंट हैं।

अलीपे+ (Alipay+) से जुड़ने के फायदे समझिए

अगर भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देते हैं, तो फिर तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। UPI का सीधा कनेक्शन अलीपे+ से हो जाएगा और फिर जितने भी देश अलीपे+ के विशाल नेटवर्क में शामिल हैं, वहां के हर छोटे-बड़े व्यापारी भारतीय UPI ऐप से पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे। यानी आपको किसी खास देश के साथ अलग से करार होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बस अपना फोन निकालिए, QR कोड स्कैन कीजिए और पेमेंन्ट पूरा कीजिए। यह उन लाखों भारतीय पर्यटकों के लिए वरदान साबित होगा जो हर साल विदेश यात्रा पर जाते हैं।
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अभी क्या है UPI की अंतरराष्ट्रीय स्थिति?

फिलहाल UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार एक सीमित दायरे में ही है। अभी जो मॉडल चल रहा है, उसमें NPCI हर देश के साथ अलग-अलग करार करता है। यह एक लंबी और धीमी प्रक्रिया है। इस द्विपक्षीय मॉडल के तहत अब तक भारतीय पर्यटक फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, मॉरीशस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और सिंगापुर जैसे देशों में UPI से भुगतान कर सकते हैं। मसलन, अगर आप फ्रांस में घूमने गए हैं और एफिल टॉवर देखने का टिकट लेना चाहते हैं, तो वहां भी आप भारत की तरह ही आसानी से QR कोड स्कैन करके रुपये में भुगतान कर सकते हैं। लेकिन यह तरीका समय लेने वाला है क्योंकि हर नए देश के साथ अलग से तकनीकी ढांचा तैयार करना होता है और नई कानूनी मंजूरियां लेनी होती हैं।

द्विपक्षीय से बहुपक्षीय मॉडल की ओर कदम

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए NPCI ने अब सोचा है कि क्यों न सीधे उन बड़े वैश्विक प्लेटफॉर्म्स से हाथ मिलाया जाए जो पहले से ही कई देशों में मजबूती से मौजूद हैं। इसी नई सोच के तहत अलीपे+ से जुड़ने की चर्चा जोरों पर है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है और सुरक्षा मंजूरी के साथ-साथ भू-राजनीतिक पहलुओं को देखते हुए इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। चीन के साथ भारत के मौजूदा रिश्तों को देखते हुए यह एक संवेदनशील मसला है, इसलिए सरकार हर पहलू को बारीकी से परख रही है।

प्रोजेक्ट नेक्सस: भविष्य की नींव

लेकिन NPCI की नजर सिर्फ अलीपे+ पर ही नहीं टिकी है। एक और बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जिसका नाम है प्रोजेक्ट नेक्सस। यह बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स यानी BIS की अगुवाई में चल रहा है और इसमें भारत के अलावा सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस के केंद्रीय बैंक भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य अलग-अलग देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में इस तरह जोड़ना है, जैसे वे सभी एक ही परिवार के सदस्य हों।

कैसे काम करेगा प्रोजेक्ट नेक्सस?

जैसे भारत का UPI है, सिंगापुर का PayNow है, मलेशिया का DuitNow है, इन सबको एक साझा मंच पर लाकर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जहां से पैसे एक देश से दूसरे देश में तुरंत पहुंच सकें। इस प्रोजेक्ट के तहत अप्रैल 2025 में सिंगापुर में “नेक्सस ग्लोबल पेमेंट्स” नाम की एक कंपनी भी बन चुकी है, जो इस पूरे सिस्टम को ऑपरेट करेगी। इसके जरिए सीमा पार भुगतान को एक मिनट के अंदर पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय पेमेंट में जितना समय लगता है, उसे देखते हुए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।

यूरोप में भी दस्तक: UPI-TIPS लिंकेज

भारत सिर्फ एशिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह यूरोप में भी अपनी मजबूत पैठ बना रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने यूरोपियन सेंट्रल बैंक के साथ UPI को TIPS नाम के सिस्टम से जोड़ने पर गंभीर बातचीत की है। TIPS यानी टारगेट इंस्टेंट पेमेंट सेटलमेंट, जो यूरोजोन के देशों का फास्ट पेमेंट सिस्टम है। अगर यह लिंकेज सफल हो जाता है, तो यूरोप में रहने वाले करोड़ों भारतीय और वहां कारोबार करने वाले भारतीय व्यापारी बेहद सस्ती दरों पर और तुरंत पैसे भेज और प्राप्त कर सकेंगे।

यूरोप कनेक्ट से किसे होगा फायदा?

इससे सबसे ज्यादा फायदा उन भारतीय छात्रों को मिलेगा जो यूरोप के विभिन्न देशों में पढ़ाई कर रहे हैं और अपने रहने-खाने के खर्च के लिए घर से पैसे मंगवाते हैं। फिलहाल विदेश से पैसे भेजने में काफी ज्यादा चार्ज कटता है और समय भी लगता है। लेकिन UPI के सीधे कनेक्शन से यह पूरी प्रक्रिया बेहद सस्ती और झटपट हो जाएगी। इसके अलावा यूरोप निर्यात करने वाले भारतीय व्यापारियों को भी इससे काफी सुविधा होगी।

क्यों जरूरी है UPI का वैश्विक विस्तार?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर NPCI इतनी जल्दी-जल्दी UPI को दुनियाभर में फैलाना क्यों चाहता है? इसके पीछे कई ठोस और अहम वजहें हैं।

पहली वजह: भारतीय पर्यटक और प्रवासी

हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक विदेश यात्रा पर जाते हैं और करोड़ों भारतीय विदेशों में नौकरी या कारोबार के सिलसिले में रहते हैं। अगर वे UPI से आसानी से भुगतान कर सकें तो उन्हें न तो विदेशी मुद्रा निकालने की झंझट झेलनी पड़ेगी और न ही उन्हें महंगे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन शुल्क देने होंगे।

दूसरी वजह: सस्ता और तेज रेमिटेंस

भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है। हर साल अरबों डॉलर विदेश में बसे भारतीय अपने परिवारों को भेजते हैं। अगर यह पैसा UPI के रास्ते आएगा तो यह मौजूदा तरीकों के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और तेज होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

तीसरी वजह: भारत की डिजिटल पहचान मजबूत होगी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं पहले ही UPI की तारीफ कर चुकी हैं और इसे एक आदर्श वैश्विक मॉडल बता चुकी हैं। ऐसे में UPI का और अधिक विस्तार भारत की डिजिटल ताकत और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने और मजबूती से पेश करेगा।

चुनौतियां

बेशक यह राह फूलों से भरी नहीं है। जब भी कई देशों की पेमेंट सिस्टम आपस में जुड़ती हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है डेटा सुरक्षा और निजता का सवाल। हर देश के अपने डेटा संरक्षण कानून हैं और उन सबमें तालमेल बिठाना एक बड़ा तकनीकी और कानूनी काम है।

डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

अलीपे+ के मामले में यह चुनौती और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि इसकी जड़ें चीन से जुड़ी हुई हैं। साल 2020 के बाद भारत सरकार ने चीनी कंपनियों के निवेश और तकनीकी साझेदारी के नियम काफी सख्त कर दिए हैं। ऐसे में किसी भी अंतिम समझौते से पहले सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भारतीय यूजर्स का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश न रहे।

भू-राजनीतिक पहलू भी अहम

इस पूरे समीकरण में भू-राजनीति भी एक अहम भूमिका निभाती है। दो देशों के बीच के राजनयिक रिश्तों का असर ऐसे तकनीकी समझौतों पर पड़ता है। इसलिए सरकार हर पहलू को तौलेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लेगी।

भविष्य की तस्वीर कैसी होगी?

फिर भी, इन चुनौतियों के बावजूद यह साफ है कि NPCI ने UPI को वैश्विक स्तर पर ले जाने का जो बीड़ा उठाया है, वह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब UPI सिर्फ एक भुगतान प्रणाली नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई तकनीकी क्षमता और डिजिटल आत्मनिर्भरता का एक जीता-जागता प्रतीक बन चुका है।

दुनिया में छाएगा UPI का जलवा

चाहे वह प्रोजेक्ट नेक्सस के जरिए एशिया में हो, TIPS के जरिए यूरोप के बाजारों में हो या फिर अलीपे+ जैसे दिग्गज प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया के बाकी हिस्सों में, आने वाले कुछ ही सालों में आप अपने UPI ऐप को उतनी ही आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे, जितनी आसानी से आप आज अपने शहर की चाय की दुकान या सब्जी वाले को पैसे देते हैं।

एक छलांग और कई मायने

यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव या अपग्रेडेशन नहीं है, बल्कि यह भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया का नेता बनाने की दिशा में एक बड़ी और निर्णायक छलांग है। यह हमारे देश की उस सोच को दर्शाता है, जहां तकनीक का इस्तेमाल आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाने के लिए किया जाता है। UPI का यह वैश्विक विस्तार न सिर्फ भारतीयों को गर्व महसूस कराएगा, बल्कि दुनिया को यह भी बताएगा कि भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि एक बड़ी तकनीकी ताकत भी है।

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