रेलवे का नया नियम: भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक अहम और सख्त फैसला लिया है। बढ़ते फर्जी टिकट मामलों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल को देखते हुए रेलवे ने अनारक्षित टिकट यात्रा को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। अब यूटीएस (UTS), एटीवीएम (ATVM) या रेलवे काउंटर से खरीदे गए अनारक्षित टिकट को सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर दिखाना मान्य नहीं होगा। यात्रियों को इन टिकटों की भौतिक प्रति यानी हार्ड कॉपी अपने पास रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा, राजस्व संरक्षण और टिकट प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

AI के दुरुपयोग से बढ़ी रेलवे की चिंता
तकनीक जहां एक ओर यात्रियों की सुविधा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर उसका गलत इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल के महीनों में रेलवे को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें AI टूल्स और फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी ट्रेन टिकट तैयार किए गए। ये टिकट दिखने में बिल्कुल असली जैसे थे, जिससे पहली नजर में उन्हें पहचान पाना मुश्किल हो गया।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फर्जी टिकटों की यह नई तकनीक पुरानी धोखाधड़ी से कहीं ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें QR कोड, ट्रेन नंबर, तारीख और किराया जैसी सभी जानकारियां हूबहू असली टिकट जैसी दिखाई जाती हैं।
एक चौंकाने वाली घटना: एक टिकट पर सात यात्रियों की कोशिश
रेलवे की आंखें खोलने वाली घटना जयपुर रूट पर सामने आई। नियमित जांच के दौरान कुछ छात्र ट्रेन में मोबाइल फोन पर टिकट दिखाकर यात्रा कर रहे थे। टिकट देखने में पूरी तरह असली लग रहा था और उसमें सभी जरूरी जानकारियां मौजूद थीं।
लेकिन जब टीटीई और ट्रेन सुपरवाइजर को शक हुआ और टिकट की गहराई से जांच की गई, तो सच्चाई सामने आई। जांच में पता चला कि एक ही अनारक्षित टिकट को AI और एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से इस तरह बदला गया था कि उसमें सात यात्रियों के नाम और विवरण दिखाए जा रहे थे। यानी एक टिकट खरीदकर सात लोग यात्रा करने की कोशिश कर रहे थे।
इस घटना को रेलवे प्रशासन ने गंभीर चेतावनी के रूप में लिया और तुरंत पूरे सिस्टम को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया।
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सभी मंडलों को अलर्ट, टीटीई ऐप से होगी सख्त जांच
इस मामले के बाद रेलवे ने झांसी-ग्वालियर मंडल समेत देश के सभी रेलवे मंडलों को सतर्क कर दिया है। अब टिकट जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए टीटीई और टीसी के मोबाइल फोन में विशेष टीटीई ऐप अनिवार्य कर दिया गया है।
यह ऐप सीधे रेलवे के केंद्रीय सर्वर से जुड़ा रहता है, जिससे किसी भी टिकट का रियल-टाइम सत्यापन किया जा सकता है। अगर कोई टिकट फर्जी होगा, तो वह तुरंत सिस्टम में पकड़ में आ जाएगा।
नया नियम क्या कहता है? आसान भाषा में समझें
रेलवे द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब टिकट जांच इस तरह होगी:
अनारक्षित टिकट की हार्ड कॉपी जरूरी
UTS ऐप, ATVM या रेलवे काउंटर से खरीदे गए सभी अनारक्षित टिकटों की प्रिंटेड कॉपी यात्रियों के पास होना अनिवार्य है। केवल मोबाइल स्क्रीन पर टिकट दिखाने की अनुमति अब नहीं दी जाएगी। यह नियम खासतौर पर लोकल और शॉर्ट डिस्टेंस यात्राओं पर लागू होगा।
QR कोड और कलर कोड से होगी जांच
अगर किसी टिकट पर शक हुआ तो टीटीई अपने ऐप से QR कोड स्कैन करेगा और UTS नंबर व कलर कोड की जांच करेगा। हर असली टिकट का एक यूनिक कोड होता है, जिससे फर्जी टिकट तुरंत पकड़ में आ जाएगा।
ई-टिकट और एम-टिकट पर यह नियम लागू नहीं
IRCTC वेबसाइट या ऐप से बुक किए गए ई-टिकट और एम-टिकट इस नियम से बाहर रखे गए हैं। इन मामलों में मोबाइल पर PNR और वैध आईडी दिखाना ही पर्याप्त रहेगा।
दलालों और साइबर फ्रॉड पर भी रहेगी नजर
रेलवे को आशंका है कि भविष्य में टिकट दलाल भी AI का इस्तेमाल कर और ज्यादा उन्नत तरीके से फर्जी टिकट बना सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने साइबर सेल, सतर्कता टीम और रैड यूनिट को भी अलर्ट कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन ग्रुप्स पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि फर्जी टिकट बनाने या बेचने वाले नेटवर्क को समय रहते पकड़ा जा सके।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
नए नियम के बाद यात्रियों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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अनारक्षित टिकट की प्रिंटेड कॉपी जरूर रखें
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यात्रा से पहले टिकट सही तरीके से प्रिंट कर लें
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ई-टिकट या एम-टिकट को फोन में सेव या स्क्रीनशॉट में रखें
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बहुत सस्ते टिकट देने वाले ऑनलाइन ऑफर्स से बचें
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केवल IRCTC, UTS ऐप या अधिकृत एजेंट से ही टिकट खरीदें
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टिकट जांच के दौरान टीटीई का सहयोग करें









