आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक क्रांति बन चुका है। हर दिन नए AI टूल्स लॉन्च हो रहे हैं, हर क्षेत्र में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इस बदलाव का सीधा असर हमारी नौकरियों और करियर के भविष्य पर पड़ रहा है। क्या AI वाकई हमारी नौकरियाँ छीन लेगा? या फिर यह हमारे काम को आसान बनाकर नए अवसर पैदा करेगा? यह सवाल आज हर युवा, हर प्रोफेशनल और हर स्टूडेंट के मन में है।

हाल ही में नेशनल फाउंडेशन फॉर एजुकेशनल रिसर्च (NFER) की एक रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI और ऑटोमेशन की वजह से अगले 10 सालों (2035 तक) में यूके की अर्थव्यवस्था में लगभग 30 लाख (3 मिलियन) कम-स्किल वाली नौकरियाँ खत्म हो सकती हैं। हालाँकि, इसी दौरान लगभग 23 लाख (2.3 मिलियन) नई नौकरियाँ भी पैदा हो सकती हैं, लेकिन यह बदलाव बिना चुनौतियों के नहीं होगा। नई नौकरियाँ ज्यादातर हाई-स्किल सेक्टर में होंगी, जबकि कम-स्किल वर्कर्स को नौकरी गंवाने और रीस्किल करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि AI किन नौकरियों के लिए खतरा है, किन नौकरियों की माँग बढ़ेगी और सबसे महत्वपूर्ण – वे कौन-सी नौकरियाँ हैं जो AI के युग में भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। साथ ही, हम उन स्किल्स पर भी चर्चा करेंगे जिन पर फोकस करके आप अपने करियर को भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं।
AI क्यों ले रहा है नौकरियाँ? समझिए पूरा मैकेनिज्म
AI नौकरियाँ क्यों और कैसे प्रभावित कर रहा है, इसे समझने के लिए हमें दो मुख्य बातें जाननी होंगी:
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ऑटोमेशन और एफिशिएंसी: AI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बार-बार होने वाले (रिपीटेबल), नियम-आधारित (रूल-बेस्ड) और पूर्वानुमानित (प्रिडिक्टेबल) कामों को बिना थके, बिना गलती के और बहुत तेजी से कर सकता है। जैसे डेटा एंट्री, इनवॉइस प्रोसेसिंग, बेसिक कस्टमर क्वेरी का जवाब देना, क्वालिटी चेक करना आदि। कंपनियाँ इन कामों के लिए Artificial intelligence और रोबोटिक्स का इस्तेमाल करके लागत कम करती हैं और दक्षता बढ़ाती हैं।
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अगली पीढ़ी का डेटा एनालिसिस: AI सिर्फ साधारण काम ही नहीं, बल्कि जटिल डेटा पैटर्न को पहचानने, रिपोर्ट तैयार करने, यहाँ तक कि बेसिक कोड लिखने और कानूनी दस्तावेजों का ड्राफ्ट तैयार करने जैसे काम भी करने लगा है। इससे जूनियर लेवल के कई प्रोफेशनल रोल भी प्रभावित हो रहे हैं।
रेड जोन: वे नौकरियाँ जहाँ AI का सबसे ज्यादा खतरा है (Jobs at High Risk Due to AI)
NFER रिपोर्ट और दुनिया भर के अन्य अध्ययन बताते हैं कि निम्नलिखित क्षेत्रों और भूमिकाओं में AI और ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने की आशंका है। इनमें वे नौकरियाँ शामिल हैं जो ज्यादातर दोहराए जाने वाले कार्यों पर आधारित हैं:

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एडमिनिस्ट्रेटिव और क्लर्कल रोल्स: डेटा एंट्री ऑपरेटर, ऑफिस असिस्टेंट, बैक-ऑफिस सपोर्ट स्टाफ। AI-पावर्ड सॉफ्टवेयर अब ईमेल ऑर्गनाइज करना, मीटिंग शेड्यूल करना, डॉक्यूमेंट मैनेज करना जैसे काम आसानी से संभाल सकते हैं।
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मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली लाइन जॉब्स: फैक्ट्री वर्कर्स, मशीन ऑपरेटर्स, प्रोडक्ट असेंबलर्स। रोबोटिक्स और ऑटोमेटेड मशीनें इन जगहों पर तेजी से मानव श्रम की जगह ले रही हैं।
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रिटेल और सर्विस सेक्टर की कुछ नौकरियाँ: कैशियर, टिकट कलेक्टर। सेल्फ-चेकआउट काउंटर और डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने इन भूमिकाओं की जरूरत कम कर दी है।
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डेटा प्रोसेसिंग और बेसिक एनालिसिस: जूनियर डेटा एनालिस्ट, एकाउंट्स एंट्री क्लर्क। AI टूल अब बड़ी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करके बेसिक ट्रेंड्स बता सकते हैं।
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कुछ ट्रेड्स के रूटीन काम: प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल या रूफिंग के ऐसे काम जिनमें बार-बार एक जैसी प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है, उन्हें भी ऑटोमेटेड टूल्स से खतरा हो सकता है, हालाँकि इन फील्ड्स में एक्सपर्टिस वाले काम सुरक्षित रहेंगे।
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ग्रीन जोन: वे नौकरियाँ जहाँ Artificial intelligence की वजह से माँग बढ़ेगी (Jobs in Demand Because of AI)
जहाँ एक तरफ AI कुछ नौकरियाँ कम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह नई नौकरियाँ पैदा भी कर रहा है और कई पारंपरिक प्रोफेशन को और महत्वपूर्ण बना रहा है। ये वे भूमिकाएँ हैं जिनमें मानवीय बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और जटिल निर्णय लेने की क्षमता की जरूरत होती है।
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AI/मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट: यह स्पष्ट है कि AI के युग में इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की माँग आसमान छूएगी। इसमें AI इंजीनियर, ML रिसर्चर, डेटा साइंटिस्ट, AI एथिसिस्ट शामिल हैं।
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साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट: डिजिटल दुनिया जितनी जटिल होगी, उसे सुरक्षित रखने वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत उतनी ही बढ़ेगी।
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ह्यूमन-सेंटर्ड प्रोफेशन: हेल्थकेयर (डॉक्टर, सर्जन, नर्स, साइकोलॉजिस्ट), शिक्षा (टीचर, ट्रेनर, काउंसलर), और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशे। Artificial intelligence इनकी मदद कर सकता है, लेकिन मरीज या स्टूडेंट के साथ भरोसा, सहानुभूति और गहरा संबंध बनाने का काम इंसान ही कर सकता है।
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क्रिएटिव और आर्टिस्टिक प्रोफेशन: राइटर, कंटेंट क्रिएटर, ग्राफिक डिजाइनर, फिल्ममेकर, मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट। AI टूल इन्हें सहायता प्रदान कर सकते हैं, लेकिन मूल विचार, कहानी कहने की कला और ब्रांड की भावना को समझने का काम इंसानी दिमाग ही कर सकता है।
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स्किल्ड ट्रेड्स और टेक्निशियन: जटिल मरम्मत करने वाले इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, HVAC टेक्निशियन। भौतिक दुनिया में अनिश्चित परिस्थितियों में समस्या का समाधान ढूँढना AI के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
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मैनेजमेंट और लीडरशिप रोल्स: टीम को प्रेरित करना, कॉर्पोरेट रणनीति बनाना, जटिल इंसानी डायनामिक्स को संभालना – ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ AI की भूमिका सहायक से ज्यादा नहीं है।
सेफ हेवन: वे नौकरियाँ जहाँ AI का असर नहीं के बराबर होगा (AI-Proof Careers with Zero Risk)
कुछ पेशे ऐसे हैं जहाँ इंसानी स्पर्श, नैतिक निर्णय, गहन विशेषज्ञता और अप्रत्याशित परिस्थितियों में प्रतिक्रिया इतनी महत्वपूर्ण है कि AI का वहाँ पहुँचना लगभग असंभव है। IDP की ‘AI-सेफ डिग्रीज़’ रिपोर्ट के अनुसार, ये करियर न सिर्फ सुरक्षित हैं बल्कि भविष्य में इनकी माँग और बढ़ेगी। ये हैं वो प्रोफेशन:
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फिजिशियन असिस्टेंट (चिकित्सक सहायक): मरीजों की शारीरिक जाँच करना, उनकी मेडिकल हिस्ट्री समझना, उनके साथ भरोसा बनाना – ये सब वे काम हैं जिनमें इंसानी संवेदनशीलता अहम है।
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नर्स प्रैक्टिशनर: मरीजों की देखभाल करना, दवाइयाँ देना, उनके और परिवार के सदस्यों के साथ भावनात्मक संबंध बनाना Artificial intelligence के बस की बात नहीं है।
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फिजिसिस्ट (भौतिक विज्ञानी): ब्रह्मांड के मूलभूत सिद्धांतों पर शोध करने, नए प्रयोग डिजाइन करने और सैद्धांतिक चुनौतियों से जूझने के लिए गहरी रचनात्मक और विश्लेषणात्मक सोच चाहिए।
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जनरल डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक): मरीज के मुँह में जटिल प्रक्रियाएँ करना, दर्द को महसूस करते हुए कोमलता से काम करना, और मरीज को डर पर काबू पाने में मदद करना – ये सभी उच्च-स्तरीय मानवीय कौशल हैं।
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नर्स मिडवाइफ (दाई): जन्म देने जैसी नाजुक और भावनात्मक प्रक्रिया में माँ का मार्गदर्शन और समर्थन करना पूरी तरह से मानवीय संबंधों पर निर्भर करता है।
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यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ): जटिल सर्जरी करना और मरीजों की व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञता और संवेदनशीलता दोनों जरूरी है।
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नर्स एनेस्थेटिस्ट: एनेस्थेसिया की सही मात्रा तय करने के लिए मरीज की विशिष्ट शारीरिक स्थिति, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री का आकलन करना एक जिम्मेदारी भरा और गहन ज्ञान वाला काम है।
इन सभी पेशों में समस्या-समाधान, नैतिकता, करुणा, आत्मविश्वास और अंतर्ज्ञान जैसे गुण केंद्र में हैं। ये ऐसे गुण हैं जिन्हें कोई एल्गोरिदम या मशीन नकल नहीं कर सकती।
कैसे तैयार करें अपने करियर को AI के युग के लिए? (Future-Proof Your Career)
नौकरियाँ बदलेंगी, इससे इनकार नहीं। लेकिन अगर हम सही स्किल्स पर ध्यान दें तो इस बदलाव से न केवल बच सकते हैं बल्कि आगे भी निकल सकते हैं। यहाँ कुछ जरूरी सलाह हैं:
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टेक्नोलॉजी के साथ दोस्ती करें: Artificial intelligence को सिर्फ खतरा न समझें। इसे एक टूल की तरह देखें और सीखें कि आप अपने काम में इसे कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। बेसिक डेटा लिटरेसी, AI टूल्स का बेसिक ज्ञान आज हर फील्ड के लिए जरूरी है।
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सॉफ्ट स्किल्स पर दें जोर: क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन, इमोशनल इंटेलिजेंस, लीडरशिप और एडेप्टेबिलिटी – ये वो स्किल्स हैं जो आपको मशीनों से अलग और बेहतर बनाती हैं। इन्हें निरंतर विकसित करते रहें।
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लाइफलॉन्ग लर्निंग को अपनाएँ: एक डिग्री लेकर आराम से बैठ जाने का जमाना लद गया है। ऑनलाइन कोर्सेस, वर्कशॉप्स, सेमिनार्स के जरिए लगातार नया सीखते रहना जरूरी है।
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स्पेशलाइजेशन है जरूरी: जिस फील्ड में भी हैं, उसमें गहराई से ज्ञान हासिल करें। एक विशेषज्ञ (स्पेशलिस्ट) बनें, जनरलिस्ट नहीं।
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मानवीय संबंधों को प्राथमिकता दें: नेटवर्किंग, मेंटरशिप, टीमवर्क और क्लाइंट रिलेशनशिप पर काम करें। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ AI की कोई भूमिका नहीं है।









