New Labour Codes: जी हाँ, अब हुआ बड़ा बदलाव! देश में आज से लागू हो चुके हैं 4 नए लेबर कोड, आपने अक्सर खबरों में सुना होगा “नए लेबर कोड आने वाले हैं”, “श्रम सुधार होगा”। अब वह दिन आ गया है। केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए देश में चार नए New Labour Codes लागू कर दिए हैं। यह फैसला ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। इन New Labour Codes का मकसद दशकों पुराने, जटिल और बिखरे हुए श्रम कानूनों को खत्म करके एक नई, स्पष्ट और कर्मचारी-हितैषी व्यवस्था लाना है।

अब तक, देश में 29 केंद्रीय श्रम कानून थे, जिन्हें समझना और लागू करना कंपनियों और कर्मचारियों, दोनों के लिए मुश्किल था। सरकार ने इन सभी 29 कानूनों को खत्म करके उन्हें सिर्फ 4 सरल कोड में बदल दिया है। ये चार कोड हैं:
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Code on Wages (2019) – वेतन संहिता
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Industrial Relations Code (2020) – औद्योगिक संबंध संहिता
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Code on Social Security (2020) – सामाजिक सुरक्षा संहिता
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Occupational Safety, Health & Working Conditions (OSHWC) Code (2020) – व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाएं संहिता
New Labour Codes: क्यों हैं जरूरी?
इन New Labour Codes को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य एक मजबूत मजदूर-ढांचा तैयार करना है जो न सिर्फ श्रमिकों की सुरक्षा और हकों को बढ़ाए, बल्कि उद्योगों के लिए भी एक प्रतिस्पर्धात्मक और आसान माहौल बनाए। यह सुधार 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला रखता है।
New Labour Codes में आपके लिए क्या है खास? आइए डिटेल में समझते हैं:
1. अब हर नौकरी के लिए मिलेगा ‘नियुक्ति पत्र’ (Appointment Letter)
पहले बहुत से छोटे उद्योगों या अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वालों को कोई लिखित नियुक्ति पत्र नहीं मिलता था। इससे विवाद होने पर उनके पास सबूत का अभाव रहता था।
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नया नियम: अब इन New Labour Codes के तहत सभी श्रमिकों को, चाहे वे किसी भी सेक्टर में हों, नौकरी शुरू करते समय एक लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा।
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फायदा: इससे रोजगार की शर्तें, वेतन, काम के घंटे, छुट्टियाँ आदि सब कुछ स्पष्ट और पारदर्शी हो जाएंगी। कर्मचारी और नियोक्ता के बीच गलतफहमी की गुंजाइश कम होगी।
2. पूरे देश में लागू होगा ‘न्यूनतम वेतन’ (National Floor for Minimum Wage)
अलग-अलग राज्यों में न्यूनतम वेतन अलग-अलग था, जिससे कहीं कर्मचारियों को बहुत कम वेतन मिल पाता था।
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नया नियम: इन New Labour Codes के जरिए पूरे देश में एक ‘नेशनल फ्लोर’ यानी राष्ट्रीय आधार न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा।
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फायदा: इसका सीधा मतलब है कि अब कोई भी कर्मचारी इतनी कम सैलरी नहीं पाएगा जिससे उसका जीवन यापन मुश्किल हो। यह गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले करोड़ों मजदूरों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।

3. समय पर मिलेगी सैलरी (Timely Salary Payment)
वेतन का समय पर न मिलना, खासकर प्राइवेट सेक्टर में, एक आम समस्या रही है।
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नया नियम: अब नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को उनकी सैलरी का भुगतान समय पर करना कानूनी रूप से जरूरी होगा।
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फायदा: कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी और उनकी नकदी प्रवाह (Cash Flow) की समस्या दूर होगी।
4. स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा (Health Check-up and Safety)
कर्मचारियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
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नया नियम: नए New Labour Codes के तहत 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक हेल्थ चेक-अप अनिवार्य किया गया है। साथ ही, एक राष्ट्रीय OSH (Occupational Safety and Health) बोर्ड बनाया जाएगा जो सभी उद्योगों में सुरक्षा मानकों को एक जैसा बनाएगा।
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फायदा: बीमारियों का पता पहले चरण में लगने से इलाज आसान और सस्ता होगा, जिससे कर्मचारी लंबे समय तक स्वस्थ रह सकेंगे।
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5. महिलाओं के लिए नई संभावनाएं (Women Empowerment)
पहले कई उद्योगों में महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति नहीं थी, जिससे उनकी नौकरी के अवसर सीमित थे।
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नया नियम: अब महिलाएं रात की शिफ्टों में भी काम कर सकेंगी।
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फायदा: इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हालाँकि, नियोक्ता को उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम (जैसे सुरक्षित परिवहन) करने होंगे और महिला की सहमति भी लेनी होगी। इस कदम से जॉब मार्केट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
6. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिली पहचान (Security for Gig & Platform Workers)
यह इन New Labour Codes का सबसे प्रगतिशील और चर्चित पहलू है। फूड डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर, ऐप-बेस्ड काम करने वाले लाखों लोग अब तक किसी कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं आते थे।
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नया नियम: पहली बार, ‘गिग वर्कर’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर’ को कानूनी पहचान मिली है।
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फायदा: अब इन श्रमिकों को भविष्य निधि (PF), बीमा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। इन New Labour Codes के तहत प्लेटफॉर्म कंपनियों (जैसे जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर) को इन श्रमिकों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा फंड में योगदान देना होगा।
7. व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business)
पुराने कानूनों में कंपनियों को अलग-अलग जगहों पर रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता था और कई तरह की रिपोर्ट्स देनी पड़ती थीं, जिससे कानूनी अनुपालन (Compliance) का बोझ बहुत ज्यादा था।
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नया नियम: नए New Labour Codes में सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न (एक ही फॉर्म) की व्यवस्था लागू की गई है।
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फायदा: इससे कंपनियों का काम्प्लायंस बोझ काफी कम हो जाएगा, जिससे वे अपना ध्यान बिजनेस बढ़ाने पर लगा सकेंगी। इससे देश में ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ और सुधरेगा।
8. इंस्पेक्टर से फैसिलिटेटर की भूमिका (Inspector to Facilitator)
पहले श्रमिक इंस्पेक्टरों की भूमिका ज्यादातर जांच और जुर्माना लगाने की होती थी।
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नया नियम: अब इनकी भूमिका एक ‘फैसिलिटेटर’ (सहूलियत देने वाले) की होगी। वे कंपनियों को कानूनों का पालन करने में मार्गदर्शन देंगे।
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फायदा: उद्योगों और सरकार के बीच का रिश्ता और सहयोगात्मक बनेगा।
नए लेबर कोड्स: एक दोधारी तलवार? जानिए कर्मचारियों और कंपनियों के लिए क्या हैं फायदे और नुकसान
भारत में 21 नवंबर से लागू हुए चार नए New Labour Codes को लेकर पूरे देश में चर्चा का दौर जारी है। भारत में नए New Labour Codes को लागू करने और इनके प्रबंधन की जिम्मेदारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) की है। यह मंत्रालय केंद्र सरकार का प्रमुख विभाग है जो सभी श्रम संबंधी नीतियों, कानूनों और उनके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
सरकार इसे एक ऐतिहासिक श्रम सुधार बता रही है जो कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा और व्यवसायों को आसानी प्रदान करेगा। लेकिन क्या हर सिक्के के दो पहलू होते हैं? क्या ये नए कोड वाक में सबके लिए फायदेमंद हैं?
इस लेख में हम नए New Labour Codes के सकारात्मक (Positive) और नकारात्मक (Negative) दोनों पक्षों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि आपको एक संतुलित और स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
सकारात्मक पक्ष (The Positive Side): नए लेबर कोड्स के बड़े फायदे
नए New Labour Codes को लागू करने के पीछे जो मुख्य उद्देश्य हैं, वे निश्चित रूप से एक बेहतर भविष्य की ओर इशारा करते हैं। आइए देखें इनके क्या फायदे माने जा रहे हैं:
1. कर्मचारियों के लिए बढ़ी हुई सुरक्षा और पारदर्शिता:
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नियुक्ति पत्र का अनिवार्य होना: अब हर कर्मचारी को लिखित में नियुक्ति पत्र मिलेगा। इससे ओरल एग्रीमेंट के चलने वाले विवाद खत्म होंगे और कर्मचारियों के पास उनके रोजगार की शर्तों का सबूत होगा।
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राष्ट्रव्यापी न्यूनतम वेतन: एक समान न्यूनतम वेतन का फ्लोर लागू होने से सबसे कमजोर वर्ग के श्रमिकों का जीवनस्तर सुधरेगा। उन्हें जीवनयापन के लिए पर्याप्त मजदूरी मिल सकेगी।
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गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा: यह सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव है। स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर जैसी कंपनियों के लिए लाखों कर्मचारी अब PF, ग्रैच्युटी और बीमा जैसी सुविधाओं के दायरे में आ जाएंगे।
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महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति मिलने से उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और कार्यस्थल पर समानता को बल मिलेगा।
2. उद्योगों के लिए सरलीकरण और आसानी:
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ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस: 29 अलग-अलग कानूनों को केवल 4 कोड में बदलने और सिंगल रिटर्न-सिंगल लाइसेंस की व्यवस्था से कंपनियों पर कानूनी अनुपालन (Compliance) का बोझ काफी कम होगा।
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इंस्पेक्टर राज का अंत: अब श्रम अधिकारी ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका में होंगे। उनका मकसद जुर्माना लगाने की बजाय उद्योगों को कानून का पालन करने में मदद करना होगा, जिससे एक सहयोगात्मक माहौल बनेगा।
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फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट: कंपनियों के लिए मौसमी या प्रोजेक्ट-आधारित नौकरियों के लिए फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को रखना आसान होगा, जिससे उनकी operational flexibility बढ़ेगी।
नकारात्मक पक्ष (The Negative Side): चिंताएं और संभावित नुकसान
हालांकि नए New Labour Codes में कई सराहनीय बदलाव हैं, लेकिन विशेषज्ञ और ट्रेड यूनियन कुछ मामलों में गहरी चिंता जता रहे हैं:
1. श्रमिक अधिकारों पर संभावित चोट:
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ट्रेड यूनियनों पर अंकुश: नए Industrial Relations Code के तहत, किसी भी प्रतिष्ठान में ट्रेड यूनियन बनाने या हड़ताल करने के लिए अब कर्मचारियों की एक न्यूनतम संख्या (जैसे 100 या 300) की सहमति जरूरी होगी। छोटे संगठनों में यह हड़ताल के अधिकार को सीमित कर सकता है।
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छंटनी की प्रक्रिया आसान: पहले 100 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी को छंटनी के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। नए कोड में यह सीमा बढ़ाकर 300 कर दी गई है। आलोचकों का मानना है कि इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर छंटनी करना आसान हो जाएगा, जिससे नौकरियों का संकट पैदा हो सकता है।
2. सामाजिक सुरक्षा का धुंधला दायरा:
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गिग वर्कर्स के लिए स्पष्टता का अभाव: हालाँकि गिग वर्कर्स को कोड में शामिल किया गया है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्लेटफॉर्म कंपनियाँ उनके लिए कितना योगदान देंगी और यह योगदान किस फंड में जाएगा। इस पर अभी भी नियम बनाने बाकी हैं, जिससे यह सुधार अधूरा सा लगता है।
3. केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल की चुनौती:
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लागू करने में देरी: श्रम एक समवर्ती विषय है, यानी केंद्र और राज्य दोनों इन पर कानून बना सकते हैं। केंद्र के कोड लागू करने के बाद भी सभी राज्यों को अपने राज्य नियम बनाने होंगे। इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिससे पूरे देश में एक समान कानून लागू होने में वक्त लगेगा।
4. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल:
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रात्रि शिफ्ट में सुरक्षा: महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की इजाजत देना एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को पर्याप्त सुरक्षा उपाय करने होंगे। छोटे उद्योगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है और अगर सुरक्षा उपाय ठीक से न हुए, तो महिला कर्मचारियों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
निस्संदेह, ये New Labour Codes भारत के श्रम बाजार को आधुनिक बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम हैं। इनमें कर्मचारियों को पारदर्शिता, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार जैसे स्पष्ट फायदे हैं, साथ ही उद्योगों के लिए व्यव negativedoing business आसान हुआ है।
हालाँकि, इन कोडों का असर पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें जमीन पर कैसे लागू किया जाता है और आने वाले नियम कितने मजबूत होते हैं। ट्रेड यूनियन अधिकारों पर लगाम और छंटनी को आसान बनाने जैसे प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अंततः, New Labour Codes एक दोधारी तलवार की तरह हैं। एक तरफ जहाँ ये आधुनिक युग की जरूरतों को पूरा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होगी कि श्रमिकों के हकों का हनन न हो और उद्योगों को मिलने वाली लचीलातापन का गलत इस्तेमाल न हो पाए। यह सफर अभी शुरू हुआ है और इसके वास्तविक परिणाम आने वाले समय में ही देखने को मिलेंगे।
निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत
इन New Labour Codes को लागू करना भारत के श्रम जगत के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम है। ये कोड आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं, जहाँ गिग इकॉनमी और प्लेटफॉर्म-आधारित काम को मान्यता दी गई है। इन New Labour Codes का लक्ष्य MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) श्रमिकों, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों, और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स सहित हर तरह के कामगार को सुरक्षा कवरेज में लाना है।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के अनुसार, ये सुधार देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की राह पर आगे बढ़ाएंगे। एक तरफ जहाँ कर्मचारियों को बेहतर वेतन, सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, वहीं उद्योगों को कम जटिलता और बेहतर पूंजी निवेश का अवसर मिलेगा। निस्संदेह, ये New Labour Codes भारत के श्रमिक वर्ग और अर्थव्यवस्था के भविष्य को नई दिशा देने वाले साबित होंगे।









