दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण धमाके ने एक बार फिर एक खतरनाक विस्फोटक “मदर ऑफ शैतान” यानी TATP (ट्राईएसीटोन ट्राईपेरऑक्साइड) को चर्चा में ला दिया है। इस हमले में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, और अब जांच एजेंसियों को शक है कि इसी घातक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था।

यह लेख लाल किले पर हुए हमले, TATP विस्फोटक, और उससे जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
धमाके में TATP के इस्तेमाल का शक
जांच एजेंसियों का मानना है कि लाल किले के पास हुए धमाके में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक अत्यंत खतरनाक और अस्थिर था। शुरुआती फॉरेंसिक जांच से पता चलता है कि i20 कार में हुए इस ब्लास्ट में ट्राईएसीटोन ट्राईपेरऑक्साइड (TATP) नामक विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ होगा, जिसे दुनिया भर में “मदर ऑफ शैतान” (Mother of Satan) के नाम से जाना जाता है।
फॉरेंसिक टीमें मौके से बरामद सैंपल्स की जांच कर रही हैं ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि क्या 13 लोगों की मौत के पीछे TATP ही था।
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“मदर ऑफ शैतान” (TATP) क्या है?
TATP एक ऐसा घातक विस्फोटक है जो अपनी अत्यधिक संवेदनशीलता के लिए कुख्यात है। इसे “मदर ऑफ शैतान” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बेहद अप्रत्याशित और निर्माता के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
- अत्यधिक संवेदनशील: यह हल्की सी रगड़, थोड़ा सा दबाव या तापमान में मामूली बदलाव से ही फट सकता है।
- डेटोनेटर की जरूरत नहीं: अमोनियम नाइट्रेट जैसे पारंपरिक विस्फोटकों के विपरीत, TATP को फटने के लिए किसी बाहरी डेटोनेटर की आवश्यकता नहीं होती। डेटोनेटर की सिर्फ गर्मी भी इसे विस्फोटित कर सकती है।
- आतंकवादियों का पसंदीदा: दुनिया भर में आतंकवादी संगठन अक्सर इसका इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसके बनाने के लिए आवश्यक रसायन (जैसे एसीटोन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड) आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। 2015 के पेरिस हमले, 2016 के ब्रसेल्स धमाके और 2017 के मैनचेस्टर ब्लास्ट में भी TATP के इस्तेमाल के सबूत मिले थे।
लाल किला हमले से TATP का क्या संबंध है?
जांचकर्ताओं को शुरू में शक था कि धमाके में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन मौके के हालात और विस्फोट की प्रकृति ने उन्हें TATP की ओर मोड़ दिया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह का विस्फोट हुआ, वह TATP की विशेषताओं से मेल खाता है।

जांच के दो प्रमुख पहलू हैं:
1. दुर्घटना या साजिश? यह पता लगाना कि क्या विस्फोट बम बनाते समय हुई गलती का नतीजा था या फिर इसे किसी बड़े आतंकी ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा था।
2. रसायनों की उपलब्धता: जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि संदिग्धों ने TATP बनाने के लिए जरूरी केमिकल्स कैसे और कहां से जुटाए। इसके लिए उनकी डिजिटल गतिविधियों, आवाजाही के रिकॉर्ड और संचार इतिहास की गहन जांच की जा रही है।
TATP (मदर ऑफ शैतान) के बारे में गहन जानकारी
1. कैसे बनता है TATP?
- TATP बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन रसायनों की आवश्यकता होती है: एसीटोन (नाखून पॉलिश रिमूवर में पाया जाने वाला), हाइड्रोजन पेरोक्साइड (बालों को ब्लीच करने वाला या कीटाणुनाशक) और एक अम्ल (जैसे सल्फ्यूरिक एसिड या हाइड्रोक्लोरिक एसिड) जो उत्प्रेरक का काम करता है।
- इन रसायनों की सामान्य उपलब्धता ही इसे आतंकवादियों के लिए आकर्षक बनाती है, क्योंकि इन्हें आसानी से बिना किसी शक के खरीदा जा सकता है।
2. इतना खतरनाक क्यों है?
- अस्थिरता: TATP का क्रिस्टल ढांचा बेहद नाजुक होता है। इसे हल्का सा झटका, रगड़ या यहाँ तक कि जोर से गिराया जाना भी इसे विस्फोटित कर सकता है।
- स्व-विघटन: समय के साथ, TATP स्वतः ही टूटने लगता है और गर्मी पैदा करता है, जो स्वतः विस्फोट का कारण बन सकता है। इसीलिए इसे स्टोर करना असंभव के बराबर है।
- कोई धुआँ नहीं: TATP के विस्फोट में आमतौर पर बहुत कम धुआँ होता है, जिससे पारंपरिक विस्फोटकों की तरह इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
3. पहचान और पता लगाने में चुनौती:
- TATP में नाइट्रोजन नहीं होता, इसलिए पारंपरिक बम-सूँघने वाले उपकरण (जो नाइट्रेट्स को डिटेक्ट करते हैं) इसकी पहचान नहीं कर पाते।
- इसकी पहचान के लिए विशेष तकनीकों (जैसे रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी) की जरूरत होती है, जो आमतौर पर हर जगह मौजूद नहीं होतीं।
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लाल किला धमाके से जुड़े अन्य पहलू
1. जांच के अन्य कोण:
- आतंकी संपर्क: जांच एजेंसियाँ यह पता लगा रही हैं कि क्या आरोपियों का किसी ज्ञात आतंकी संगठन से कोई संपर्क था या क्या उन्होंने ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन के जरिए बम बनाना सीखा।
- लक्ष्य क्या था? यह स्पष्ट नहीं है कि लाल किला ही प्राथमिक लक्ष्य था या विस्फोट दुर्घटनावश या किसी और जगह के लिए जाते समय रास्ते में ही हो गया।
- नेटवर्क: पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहे थे या उनका कोई बड़ा नेटवर्क है जो अभी भी सक्रिय हो सकता है।
2. भारत में TATP का इतिहास:
- लाल किला धमाके से पहले भी भारत में TATP के इस्तेमाल के मामले सामने आ चुके हैं। 2008 के अहमदाबाद धमाकों में भी TATP के इस्तेमाल के सबूत मिले थे।
- इंडियन मुजाहिदीन (IM) जैसे आतंकी संगठनों पर TATP जैसे इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने और इस्तेमाल करने का आरोप लगा है।
3. सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबक:
- इस घटना ने घरेलू स्तर पर खतरनाक विस्फोटक बनाने की क्षमता के खतरे को रेखांकित किया है।
- इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने TATP जैसे गैर-पारंपरिक विस्फोटकों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की चुनौती और बढ़ गई है।
- संभावित रूप से खतरनाक रसायनों की बिक्री पर नजर रखने के महत्व पर भी ध्यान गया है।
लाल किलाधमाके में TATP के इस्तेमाल का संदेह एक गंभीर मामला है। यह न केवल आतंकवादियों की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा तंत्र के सामने आने वाली नई चुनौतियों को भी उजागर करता है। जब तक आधिकारिक रूप से फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, TATP की भूमिका एक “शक” बनी रहेगी, लेकिन इसकी संभावना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
निष्कर्ष
लाल किले के पास हुआ धमाका और उसमें “मदर ऑफ शैतान” (TATP) के इस्तेमाल का संदेह, सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। 13 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले इस हमले की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस घातक विस्फोटक को कैसे और क्यों तैयार किया गया। TATP जैसे खतरनाक और आसानी से बनाए जा सकने वाले विस्फोटकों का मुकाबला करना वैश्विक सुरक्षा की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।
फिलहाल, जांच जारी है और आधिकारिक तौर पर अभी TATP के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है। कोई भी नई जानकारी सामने आने पर इस लेख को अपडेट किया जाएगा।









