बिटकॉइन, बाइनेंस, पाई नेटवर्क जैसी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान से साफ हो गया है कि सरकार का इरादा क्रिप्टोकरेंसी पर सीधा प्रतिबंध लगाने का नहीं है, बल्कि उन्हें भारी टैक्स के जरिए हतोत्साहित करने और एक सरकारी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने का है। आइए समझते हैं पूरा मामला।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का वर्तमान हाल
वर्तमान में, भारत में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर चुके हैं। युवा वर्ग में तो इसकी लोकप्रियता और भी अधिक है। हालांकि, बैंक और वित्तीय संस्थान अभी भी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क हैं।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। बिटकॉइन, एथेरियम और बाइनेंस कॉइन जैसी करेंसी भारतीय निवेशकों में सबसे लोकप्रिय हैं। हालांकि, पाई नेटवर्क जैसी नई करेंसी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
क्या क्रिप्टोकरेंसी पर लगेगा बैन? जवाब है ‘नहीं’
अक्सर उठने वाले सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि जिन क्रिप्टोकरेंसी का भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या किसी देश की केंद्रीय बैंक से कोई समर्थन नहीं है, उन पर कोई सीधा प्रतिबंध (Ban) नहीं लगाया जाएगा। यह स्पष्टीकरण निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर है।
हालांकि, सरकार का यह मतलब कतई नहीं है कि वह इन निजी डिजिटल मुद्राओं को बढ़ावा दे रही है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि वह ऐसी किसी भी करेंसी को प्रोत्साहित नहीं करती, जिसका कोई सरकारी समर्थन या संपत्ति का आधार नहीं है। दूसरे शब्दों में, बिटकॉइन जैसी करेंसी में निवेश पूरी तरह से आपके अपने जोखिम पर है।

भारी टैक्स क्यों? सरकार ने बताई वजह
अगर बैन नहीं है, तो क्रिप्टोकरेंसी पर 30% का भारी टैक्स और 1% TDS क्यों लगाया गया है? इस सवाल का जवाब भी मंत्री के बयान में छिपा है। सरकार का मानना है कि चूंकि इन करेंसी में जोखिम बहुत अधिक है और इनकी कोई जवाबदेही तय नहीं है, इसलिए इनके इस्तेमाल को हतोत्साहित (Discourage) करना जरूरी है।
भारी टैक्स का मकसद लोगों को यह संदेश देना है कि इन अस्थिर और अनियमित संपत्तियों में निवेश करना महंगा पड़ सकता है। यह टैक्स व्यवस्था सरकार के लिए राजस्व का एक स्रोत भी है, साथ ही यह लेन-देन पर एक नजर रखने का जरिया भी बन गई है।
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भारत का भविष्य: डिजिटल रुपया (CBDC)
जहां सरकार निजी क्रिप्टोकरेंसी से दूरी बना रही है, वहीं वह खुद एक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) लॉन्च करने की तैयारी में है। पीयूष गोयल ने इस बात की पुष्टि की कि भारत जल्द ही अपनी आधिकारिक डिजिटल मुद्रा पेश करेगा।
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डिजिटल रुपया क्यों है खास?
1. सरकारी गारंटी: यह डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी और पूरी तरह समर्थित होगा। इसे सरकार की गारंटी प्राप्त होगी, जिसका अर्थ है कि यह बिल्कुल हमारे नोटों और सिक्कों जितना ही वैध और सुरक्षित होगा।
2. स्थिरता और सुरक्षा: बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम होता है। डिजिटल रुपया पारंपरिक रुपये के बराबर होगा, इसलिए यह ज्यादा स्थिर (Stable) रहेगा।
3. तेज और सस्ता लेन-देन: यह पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की तुलना में लेन-देन को तेज, सस्ता और अधिक कुशल बनाएगा। पैसे का ट्रांसफर कुछ ही सेकंड में हो सकेगा।
4. कागजी कार्रवाई में कमी: डिजिटल करेंसी से कैश के इस्तेमाल और कागजी कार्रवाई में कमी आएगी, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था के डिजिटलाइजेशन को बल मिलेगा।
5. पूरी तरह ट्रेसबल: सभी लेन-देन का रिकॉर्ड सरकार और RBI के पास रहेगा। इससे काले धन (Black Money) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
बिटकॉइन और डिजिटल रुपया में अंतर
हालांकि डिजिटल रुपया भी ब्लॉकचेन जैसी Advance टेक्नोलॉजी पर आधारित हो सकता है, लेकिन यह बिटकॉइन से बिल्कुल अलग होगा। बिटकॉइन एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) और निजी मुद्रा है, जबकि डिजिटल रुपया केंद्रीयकृत (Centralized) होगा और इस पर RBI का पूरा नियंत्रण होगा।
आम लोगों और व्यापारियों को क्या फायदा?
इस नई डिजिटल करेंसी से छोटे व्यवसायियों और आम नागरिकों को सीधा फायदा मिलेगा। वे बिना किसी बैंक या बिचौलिए के, सीधे एक-दूसरे को पैसे भेज सकेंगे, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। यह कदम भारत को एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा और दुनिया में डिजिटल मुद्रा के क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
निष्कर्ष:
संक्षेप में कहें तो, भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी के मामले में एक संतुलित रास्ता अपनाया है। उसने निवेशकों की आजादी को पूरी तरह से खत्म करने के बजाय, भारी टैक्स के जरिए उन्हें जोखिम के प्रति आगाह किया है। साथ ही, देश की जरूरतों के मुताबिक, एक सुरक्षित, विनियमित और सरकारी डिजिटल मुद्रा लॉन्च करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। भविष्य निजी क्रिप्टोकरेंसी का नहीं, बल्कि भारत के अपने डिजिटल रुपये का है।









