केंद्र सरकार की उधारी योजना: 6.77 लाख करोड़ रुपये उधार, आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर सीधे आम आदमी की जिंदगी पर असर डालती है। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2024 से मार्च 2025) के लिए अपनी केंद्र सरकार की उधारी योजना घोषित की है। इस दौरान सरकार बाजार से 6.77 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में आपकी जेब, आपके लोन और निवेश पर असर डालने वाला बड़ा फैसला है।

6.77 लाख करोड़ रुपये उधार
6.77 लाख करोड़ रुपये उधार

 

आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

 

सरकार का पूरा प्लान क्या है?

पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने कुल 14.82 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का लक्ष्य तय किया है। अप्रैल से सितंबर 2024 के बीच सरकार पहले ही करीब 8.05 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है। अब बाकी की रकम यानी 6.77 लाख करोड़ रुपये उधार अक्टूबर से मार्च के बीच जुटाई जाएगी।

इसके लिए सरकार 22 अलग-अलग नीलामियाँ (Auctions) करेगी। पहली नीलामी 29 सितंबर को होगी, जिसमें करीब 32,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। यह रकम सरकार सरकारी बॉन्ड जारी करके जुटाएगी, जिनकी अवधि 10 साल तक की होगी।

 

इतना पैसा उधार क्यों लेना पड़ रहा है?

जिस तरह एक परिवार की आमदनी और खर्च होते हैं, वैसे ही देश के भी बड़े खर्चे होते हैं। सरकार की आमदनी का मुख्य स्रोत टैक्स (जीएसटी, इनकम टैक्स, कस्टम ड्यूटी) है। लेकिन जब खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है, तो सरकार को बाजार से उधार लेना पड़ता है। यही राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कहलाता है।

 

इस बार सरकार का उधार इन कामों में खर्च होगा:

  • बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) पर – नई सड़कें, रेलवे प्रोजेक्ट, बुलेट ट्रेन, एयरपोर्ट और बंदरगाहों का विस्तार।
  • ऊर्जा क्षेत्र पर – सोलर, विंड और हाइड्रो जैसे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट।
  • जनकल्याण योजनाओं पर – प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और खाद्य सब्सिडी।
  • रक्षा और सुरक्षा पर – नई तकनीक और सैन्य उपकरणों की खरीद।
  • सरकारी कर्मचारियों का वेतन और पेंशन।

 

 

आपकी जिंदगी पर क्या असर होगा?

सरकार की इस उधारी का असर सीधे आम जनता पर भी दिखेगा।

1. लोन और ब्याज दरें

जब सरकार इतनी बड़ी रकम बाजार से उधार लेती है, तो बैंकों और बीमा कंपनियों का ध्यान सरकारी बॉन्ड की ओर चला जाता है। इससे बाजार में पैसों की मांग बढ़ जाती है और ब्याज दरें ऊपर जा सकती हैं। यानी होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं। यही कारण है कि लोग अक्सर सरकारी बॉन्ड और ब्याज दरें की खबरों पर नज़र रखते हैं।

2. निवेशकों के लिए अवसर

सरकारी बॉन्ड को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। यदि आप जोखिम लिए बिना फिक्स्ड इनकम चाहते हैं, तो आने वाले महीनों में होने वाली नीलामियों में आपके पास निवेश का अच्छा मौका होगा।

3. अर्थव्यवस्था की रफ्तार

अगर यह उधार इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों में सही तरीके से इस्तेमाल होता है, तो नए प्रोजेक्ट बनेंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उद्योगों को गति मिलेगी।

6.77 लाख करोड़ रुपये उधार
6.77 लाख करोड़ रुपये उधार

 

कुछ अहम आंकड़े जो तस्वीर साफ करते हैं

  • भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जीडीपी का लगभग 5.1% रहने का अनुमान है।
  • सरकार ने 2024-25 में पूंजीगत व्यय (Capex) के लिए 11.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा है।
  • सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही सरकार का खर्च GDP का करीब 2.7% है।
  • सामाजिक योजनाओं जैसे मनरेगा, खाद्य सब्सिडी और आवास योजना पर कुल खर्च लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार का फोकस सिर्फ खर्च चलाने पर नहीं, बल्कि विकास और जनकल्याण दोनों पर है।

 

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि यह प्लान बड़ा और महत्वाकांक्षी है, लेकिन सरकार के सामने चुनौतियाँ भी हैं:

  • ज्यादा उधारी से महंगाई बढ़ सकती है।
  • यदि ब्याज दरें ज्यादा बढ़ीं तो निवेश पर असर पड़ सकता है।
  • राजकोषीय घाटा अगर ज्यादा हो गया तो आने वाले वर्षों में सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा।

 

 

निष्कर्ष

केंद्र सरकार की यह उधारी योजना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में सरकार 6.77 लाख करोड़ रुपये उधार लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर जोर देगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

लेकिन इसके साथ ही आम जनता के लिए जरूरी है कि वह समझे कि इसका असर उसकी जेब पर कैसे पड़ेगा — खासकर लोन, ब्याज दरों और महंगाई के रूप में। आने वाले 6 महीने देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी दोनों के लिए बेहद अहम होंगे।

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