चुनाव नतीजों में बड़ा बदलाव: अब पोस्टल बैलेट गिनती के बाद ही खुलेगा ईवीएम का राज

ईवीएम: भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने हाल ही में मतगणना (Vote Counting) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में नतीजे तभी घोषित होंगे, जब पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) यानी डाक मतपत्रों की गिनती पूरी तरह से हो चुकी होगी। उसके बाद ही ईवीएम (Electronic Voting Machine / इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की अंतिम गिनती होगी।

EVM मशीन
EVM मशीन

 

यह फैसला क्यों लिया गया? असल में, पिछले कई चुनावों में देखा गया था कि EVM मशीन की गिनती जल्दी पूरी हो जाती थी और मीडिया नतीजे बताना शुरू कर देता था। लेकिन कई बार पोस्टल बैलेट की गिनती बाकी रह जाती थी। इससे भ्रम पैदा होता था कि अंतिम रिजल्ट (Election Results) क्या होगा। अब यह समस्या खत्म हो जाएगी।

 

अब मतगणना की नई प्रक्रिया कैसे होगी?

1. सुबह 8 बजे – सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होगी।

2. सुबह 8:30 बजे – इसके बाद ईवीएम गिनती शुरू की जाएगी।

3. अंतिम चरण – जब तक पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी नहीं हो जाती, तब तक ईवीएम की फाइनल काउंटिंग और रिजल्ट घोषित नहीं होगा।

यानी अब हर वोट की अहमियत बराबर होगी। चाहे वह डाक मतपत्र हो या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का।

 

ईवीएम और उससे जुड़ी तकनीक

ईवीएम को समझना ज़रूरी है, क्योंकि वोट काउंटिंग इसी पर निर्भर करती है।

  • कंट्रोल यूनिट (Control Unit) और बैलटिंग यूनिट (Balloting Unit) – ये दो मुख्य हिस्से हैं, जिनसे पूरी मतदान प्रक्रिया (Voting Process) चलती है।

 

  • VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) – हर वोट का कागज़ी रिकॉर्ड रखने वाली मशीन, ताकि मतदाता देख सके कि उसका वोट सही जगह गया है।

 

  • VVPAT स्लिप – वोट डालने के बाद निकलने वाली पर्ची, जो सबूत के तौर पर बॉक्स में गिर जाती है।
EVM मशीन
EVM मशीन

 

  • EVM चिप (EVM Chip) और प्रोग्रामिंग – यह मशीन का दिमाग है, जिसमें पहले से तय कोडिंग रहती है। चुनाव आयोग दावा करता है कि यह एक बार प्रोग्राम होने के बाद बदली नहीं जा सकती।

 

  • चुनाव आयोग (ECI) हर चुनाव से पहले फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) कराता है। इसमें मशीनों को जांचा जाता है और मतदान अधिकारियों (Presiding Officers) की मौजूदगी में ईवीएम सीलिंग (EVM Sealing) यानी मशीनों पर मोहर लगाई जाती है।

 

पोस्टल बैलेट क्यों हुआ इतना महत्वपूर्ण?

पहले डाक मतपत्र केवल सैनिकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए होते थे। लेकिन अब 85 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता भी पोस्टल बैलेट से वोट डाल सकते हैं। इसी वजह से इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

उदाहरण के तौर पर – 2019 के लोकसभा चुनाव में लगभग 28 लाख पोस्टल बैलेट पड़े थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या और भी ज्यादा रही। ऐसे में यह वोट निर्णायक हो सकते हैं, खासकर उन सीटों पर जहाँ हार-जीत का अंतर बहुत कम होता है।

 

इसको भी देखें –  ईवीएम (EVM) क्या है? इसके इतिहास, उपयोग और वर्तमान 2025 की स्थिति, पूरी जानकारी

क्या होगी गिनती में देरी?

कई लोग सोच रहे हैं कि नए नियम से रिजल्ट देर से आएगा। लेकिन चुनाव आयोग ने कहा है कि ऐसा नहीं होगा। जहाँ पोस्टल बैलेट ज्यादा होंगे, वहाँ रिटर्निंग ऑफिसर्स (Returning Officers) को अतिरिक्त टेबल और कर्मचारी दिए जाएंगे ताकि गिनती तेजी से हो सके।

 

EVM पर उठते सवाल और सुरक्षा

चुनाव आते ही EVM विवाद (EVM Controversy) और EVM हैकिंग की बातें सामने आती रहती हैं। कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है। हालाँकि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) बार-बार साफ कर चुका है कि EVM सुरक्षा (EVM Security) पुख्ता है और अब तक किसी भी अदालत या तकनीकी समिति ने हैकिंग का दावा साबित नहीं किया है।

फिर भी, चुनाव आयोग लगातार सुधार  करता रहता है ताकि जनता का भरोसा बना रहे। यही वजह है कि अब हर ईवीएम मशीन के साथ VVPAT मशीन लगाई जाती है।

 

निष्कर्ष

चुनाव आयोग का यह नया कदम मतगणना प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाएगा। अब किसी भी सीट का अंतिम नतीजा तब ही सामने आएगा, जब पोस्टल बैलेट और ईवीएम मशीन – दोनों की गिनती पूरी हो चुकी होगी।

यह बदलाव न सिर्फ़ जनता का भरोसा मजबूत करेगा बल्कि उन सभी अफवाहों और विवादों पर भी लगाम लगाएगा, जो अक्सर ईवीएम की विश्वसनीयता (EVM Reliability) पर सवाल खड़े करते हैं। आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव अब इसी नए नियम के तहत होंगे, और कहा जा सकता है कि यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र को और मज़बूत करेगा।

 


 

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