फरवरी 2026 में UPI ट्रांजैक्शन का हाल: फोनपे का दबदबा बरकरार, गूगल पे और पेटीएम पीछे

UPI ट्रांजैक्शन: भारत में डिजिटल पेमेंट का जादू लगातार सिर चढ़कर बोल रहा है और इस जादूगरी में सबसे आगे है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)। फरवरी 2026 के महीने के आंकड़े आ गए हैं, और एक बार फिर वॉलमार्ट समर्थित ऐप फोनपे (PhonePe) ने सबको पीछे छोड़ते हुए बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक, फोनपे ने न केवल वॉल्यूम (लेन-देन की संख्या) के मामले में बाजी मारी, बल्कि वैल्यू (लेन-देन का मूल्य) के मामले में भी उसकी बढ़त और भी ज्यादा देखने को मिली।
यह आर्टिकल आपको फरवरी महीने के UPI इकोसिस्टम के पूरे अपडेट से रूबरू कराएगा। जानेंगे कि किस ऐप ने कितना कारोबार किया, कौन सा प्लेटफॉर्म सबसे तेजी से आगे बढ़ा, और आखिर क्यों फरवरी में कुल ट्रांजैक्शन में जनवरी के मुकाबले थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।
2026 में UPI ट्रांजैक्शन का हाल
2026 में UPI ट्रांजैक्शन का हाल

फरवरी में UPI का Overall प्रदर्भाव

फरवरी का महीना छोटा होने के बावजूद भारतीयों ने खूब UPI से पेमेंट की। पूरे महीने में कुल 20,394.18 मिलियन (करीब 20.4 अरब) ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 26,84,229.29 करोड़ रुपए रही । हालांकि, यह आंकड़ा जनवरी के 21.7 अरब ट्रांजैक्शन से थोड़ा कम है, लेकिन इसकी वजह फरवरी में तीन दिन कम होना है। अगर रोजाना के औसत ट्रांजैक्शन पर नजर डालें तो यह जनवरी के 700 मिलियन से बढ़कर फरवरी में 728 मिलियन हो गया, जो बताता है कि डिजिटल पेमेंट की रफ्तार और तेज हुई है ।
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टॉप 3 Apps का प्रदर्शन: फोनपे, गूगल पे और पेटीएम

1.PhonePe: बादशाहत बरकरार

फोनपे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह UPI का सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा ऐप है। फरवरी में फोनपे ने 9.28 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल कीमत 13,10,392.95 करोड़ रुपए रही। वॉल्यूम के हिसाब से फोनपे का मार्केट शेयर 45.5% रहा, जबकि वैल्यू के मामले में यह और भी ज्यादा बढ़त के साथ 48.8% पर पहुंच गया । यह आंकड़ा बताता है कि लोग छोटे-मोटे लेन-देन के साथ-साथ बड़े पेमेंट के लिए भी फोनपे को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

2.Google Pay: मजबूत नंबर 2

गूगल पे ने भी अपनी दूसरी पोजीशन को मजबूती से बनाए रखा। फरवरी में गूगल पे ने 6.76 अरब ट्रांजैक्शन किए, जो 9,03,051.60 करोड़ रुपए के थे। इस दौरान वॉल्यूम के मामले में उसका हिस्सा 33.2% और वैल्यू के मामले में 33.6% रहा ।

3.Paytm: तीसरे नंबर पर काबिज

पेटीएम ने भी अपनी तीसरी रैंक बरकरार रखी, हालांकि उसका मार्केट शेयर फोनपे और गूगल पे के मुकाबले काफी कम है। पेटीएम ने फरवरी में 1.59 अरब ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए, जिनकी वैल्यू 1,74,128.86 करोड़ रुपए थी। इस तरह वॉल्यूम में उसकी हिस्सेदारी 7.8% और वैल्यू में 6.5% रही।
तीनों दिग्गज कंपनियों के ट्रांजैक्शन आंकड़े जनवरी के मुकाबले फरवरी में थोड़े कम रहे, जिसकी वजह फरवरी का छोटा महीना होना है। जनवरी में फोनपे ने 9.91 अरब, गूगल पे ने 7.23 अरब और पेटीएम ने 1.66 अरब ट्रांजैक्शन किए थे ।

4.उभरते हुए सितारे और अन्य Apps

जहां टॉप 3 प्लेयर की स्थिति लगभग तय है, वहीं नीचे के रैंक में काफी टक्कर देखने को मिल रही है। छोटे ऐप्स तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।

5.नवी और सुपर.मनी की एंट्री

सचिन बंसल का फिनटेक प्लेटफॉर्म नवी (Navi) ने चौथा स्थान हासिल किया। नवी ने फरवरी में 650.28 मिलियन ट्रांजैक्शन किए, जिनकी वैल्यू 36,563 करोड़ रुपए थी । वहीं फ्लिपकार्ट ग्रुप का पेमेंट ऐप सुपर.मनी (Super.money) ने जबरदस्त उछाल लेते हुए पांचवां स्थान पकड़ लिया। सुपर.मनी ने 289.32 मिलियन ट्रांजैक्शन (करीब 12,314 करोड़ रुपए) के साथ क्रेड (CRED) को पीछे छोड़ दिया ।

CRED और BHIM की स्थिति

क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के लिए मशहूर क्रेड (CRED) आठवें नंबर पर खिसक गया, हालांकि उसके ट्रांजैक्शन की वैल्यू काफी ज्यादा रही। क्रेड ने 145.98 मिलियन ट्रांजैक्शन किए, लेकिन इनकी कुल वैल्यू 54,045.92 करोड़ रुपए थी, जो दिखाता है कि क्रेड पर होने वाले लेन-देन का औसत आकार (टिकट साइज) काफी बड़ा है ।
सरकारी ऐप भीम (BHIM) ने 175.93 मिलियन ट्रांजैक्शन (21,263.92 करोड़ रुपए) रिकॉर्ड किए। वहीं FamApp (149.06 मिलियन) और व्हाट्सएप पे (112.89 मिलियन) ने भी टॉप 10 में जगह बनाई ।

UPI इकोसिस्टम से जुड़े अहम मुद्दे

मार्केट शेयर का असंतुलन और एकाधिकार की चिंता:
फरवरी के आंकड़े एक बार फिर यह साफ करते हैं कि भारत का UPI मार्केट लगभग फोनपे और गूगल पे का दबदबा वाला बाजार बन चुका है। ये दोनों मिलकर कुल UPI वॉल्यूम का करीब 80% हिस्सा अकेले संभाल रहे हैं। फिनटेक कंपनियों का एक संगठन India Fintech Foundation (IFF) इस एकाधिकार (Duopoly) को लेकर सरकार और RBI को लगातार चेतावनी दे रहा है। उनका कहना है कि सिस्टम में यह “कंसंट्रेशन रिस्क” (Concentration Risk) भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है और इससे नवाचार (Innovation) पर भी रोक लगती है ।

NPCI का 30% कैप नियम

आपको बता दें कि NPCI ने पहले यह नियम बनाया था कि कोई भी थर्ड-पार्टी UPI ऐप 30% से ज्यादा मार्केट शेयर नहीं रख सकता। लेकिन फोनपे और गूगल पे जैसे दिग्गजों के भारी दबदबे की वजह से इस नियम को लागू करने की डेडलाइन को बार-बार बढ़ाना पड़ रहा है। फिलहाल यह नियम टाल दिया गया है, क्योंकि इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण है और इससे आम यूजर्स पर इसका विपरीत असर पड़ सकता था ।

फरवरी में गिरावट का कारण

जैसा कि पहले बताया गया, फरवरी में UPI ट्रांजैक्शन में जो मामूली गिरावट आई है, वह पूरी तरह से महीने में दिनों की कमी के कारण है। NPCI के डेटा के मुताबिक, औसत दैनिक ट्रांजैक्शन (Average Daily Transactions) में बढ़ोतरी हुई है, जो यह संकेत है कि UPI की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। फरवरी 2025 की तुलना में इस साल फरवरी में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 33% की उछाल आई है, जो इसकी जबरदस्त ग्रोथ को दर्शाता है ।

UPI का भविष्य और ग्लोबल विस्तार

भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति का नया अध्याय UPI लिख रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत को फास्ट पेमेंट का ग्लोबल लीडर बताया है । UPI को अब कई देशों में लॉन्च किया जा चुका है, जिससे विदेशों में भी भारतीय पर्यटक और प्रवासी आसानी से पेमेंट कर सकें। हाल ही में UPI को कतर, पेरू, सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में पहुंचाया गया है । यह ग्लोबल विस्तार UPI की ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को और ऊपर ले जाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

फरवरी 2026 के आंकड़े बताते हैं कि फोनपे (PhonePe) की अगुआई में भारत का UPI इकोसिस्टम पूरी तरह मैच्योर हो चुका है। छोटे महीने के बावजूद 20 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होना यह साबित करता है कि आम आदमी से लेकर बड़े कारोबारी तक UPI पर निर्भर हैं। हालांकि, बाजार में दो कंपनियों के दबदबे को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई हैं, लेकिन नवी, सुपर.मनी और क्रेड जैसे ऐप्स के बीच कड़ी टक्कर इस सेक्टर को जीवंत बनाए हुए है। आने वाले महीनों में UPI के और भी रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद है, खासकर तब जब इसका दायरा लगातार बढ़ रहा हो। डिजिटल इंडिया का यह सफर वाकई शानदार है और हम सब इसके गवाह हैं।
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