नया साल 2026 यूपी के किसानों के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आया है। केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय और नाबार्ड ने मिलकर उत्तर प्रदेश में तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए 6,431 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर की है। यह फैसला दीर्घकालिक सिंचाई कोष योजना (ATIF) के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
तीन परियोजनाएं, तीन अलग-अलग क्षेत्रों में राहत
इस फंडिंग से जो तीन प्रमुख यूपी सिंचाई परियोजना आगे बढ़ेंगी, वे हैं – बुंदेलखंड क्षेत्र में अर्जुन सहायक परियोजना, पूर्वांचल में सरयू नहर परियोजना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मध्यगंगा परियोजना का दूसरा चरण। इन तीनों ही परियोजनाओं को नाबार्ड एटीआईएफ फंडिंग मिलने से उन्हें नया जीवन मिलेगा और काम की गति तेज होगी।
बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए अर्जुन सहायक परियोजना: 1,353 करोड़ का पैकेज
बुंदेलखंड भारत का वह क्षेत्र है जो पिछले कई दशकों से सूखे और पानी की किल्लत से जूझ रहा है। यहां की धसान नदी पर बनी अर्जुन सहायक परियोजना के लिए 1,353.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस बुंदेलखंड सूखा राहत परियोजना से महोबा, हमीरपुर और बांदा जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

राज्य सरकार के सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के अधिकांश हिस्से पहले ही पूरे हो चुके हैं। अब मिली राशि से हमीरपुर जिले में बचे हुए काम को पूरा किया जाएगा। इस परियोजना की खास बात यह है कि यह सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है। इससे क्षेत्र में पेयजल संकट भी कम होगा और मवेशियों के लिए भी पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। बुंदेलखंड में पानी की कमी के कारण हर सैकड़ों गांवों के लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं। इस परियोजना के पूरा होने से इस समस्या में कुछ कमी आने की उम्मीद है।
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पूर्वांचल की जीवनरेखा: सरयू नहर परियोजना
पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में फैली सरयू नहर परियोजना के लिए 1,899.35 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह पूर्वांचल सिंचाई योजना बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संत कबीर नगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिलों को कवर करेगी। इस क्षेत्र में सघन आबादी होने के बावजूद सिंचाई सुविधाओं का अभाव है और बाढ़ एक बड़ी समस्या है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी नदियों के अतिरिक्त पानी का चैनलाइजेशन करना है। इससे एक तरफ जहां बाढ़ पर नियंत्रण होगा, वहीं दूसरी तरफ इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकेगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस सरयू नहर परियोजना लाभ से 6,227 गांवों के 30 लाख से अधिक किसानों को फायदा होगा। करीब 15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, मत्स्य पालन के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पश्चिमी यूपी में मध्यगंगा परियोजना का दूसरा चरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल, मुरादाबाद और अमरोहा जिलों को कवर करने वाली मध्यगंगा परियोजना के दूसरे चरण के लिए 3,178.04 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर हुई है। यह मध्यगंगा परियोजना दूसरा चरण गंगा बेसिन के क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना से पश्चिमी यूपी के उन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा, जहां भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। नहरों के जरिए सिंचाई होने से किसानों की नलकूपों पर निर्भरता कम होगी और भूजल संरक्षण में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास
यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय की दीर्घकालिक सिंचाई कोष योजना (ATIF) के तहत चल रहा है। इस योजना का उद्देश्य देश भर में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना है जो लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। नाबार्ड इस योजना के लिए फंडिंग एजेंसी की भूमिका निभा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में नाबार्ड के अधिकारियों ने यह फंडिंग मंजूर की। इससे स्पष्ट है कि यूपी किसान लाभ योजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार गंभीर हैं और तालमेल से काम कर रही हैं।
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परियोजनाओं के व्यापक प्रभाव
इन तीनों परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को बहुत बल मिलेगा। आइए देखते हैं कि क्या-क्या बदलाव आएंगे:
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सिंचाई क्षेत्र में विस्तार: तीनों परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में लाखों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसान साल में दो या तीन फसलें ले पाएंगे।
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बाढ़ नियंत्रण: पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में बाढ़ एक बड़ी समस्या है। नदियों के चैनलाइजेशन से बाढ़ पर नियंत्रण होगा और जान-माल के नुकसान में कमी आएगी।
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पेयजल सुविधा: बुंदेलखंड समेत सभी क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी। गर्मियों में पानी के लिए त्राहिमाम मचाने की स्थिति में सुधार होगा।
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कृषि उत्पादन में वृद्धि: सिंचाई सुविधा बढ़ने से कृषि उत्पादन और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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रोजगार के अवसर: इन परियोजनाओं के निर्माण कार्य और रखरखाव में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। मत्स्य पालन जैसे नए अवसर भी पैदा होंगे।
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पर्यावरणीय लाभ: नदियों के चैनलाइजेशन से जल प्रबंधन बेहतर होगा और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। भूजल स्तर में सुधार भी एक बड़ा लाभ होगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और आवश्यकता
उत्तर प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत ब्रिटिश काल से ही हो गई थी, लेकिन आजादी के बाद इनमें तेजी आई। 1970 और 80 के दशक में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू हुईं, लेकिन धीरे-धीरे फंडिंग की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं।
बुंदेलखंड की अर्जुन सहायक परियोजना भी कई दशकों से अधूरी पड़ी थी। इसी तरह सरयू नहर परियोजना की परिकल्पना भी काफी पहले की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह पूरी नहीं हो पा रही थी। योगी सरकार किसान योजना के तहत इन अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सिंचाई का नेटवर्क बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है। राज्य की कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 50% हिस्सा ही सिंचाई सुविधा के दायरे में है। बाकी भूमि वर्षा पर निर्भर है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से यह स्थिति बदलेगी।
वित्तीय पहलू और नाबार्ड की भूमिका
नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की स्थापना 1982 में हुई थी और तब से यह कृषि और ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता दे रहा है। एटीआईएफ योजना के तहत नाबार्ड राज्य सरकारों को लंबी अवधि के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराता है।
इस बार की 6,431 करोड़ रुपये की फंडिंग भी इसी श्रेणी में आती है। यह राशि तीनों परियोजनाओं के लिए अलग-अलग आवंटित की गई है:
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अर्जुन सहायक परियोजना: 1,353.86 करोड़ रुपये
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सरयू नहर परियोजना: 1,899.35 करोड़ रुपये
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मध्यगंगा परियोजना दूसरा चरण: 3,178.04 करोड़ रुपये
यह फंडिंग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अक्सर बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण लटक जाती हैं, लेकिन इस फंडिंग से यह समस्या दूर होगी।
किसानों की प्रतिक्रिया और अपेक्षाएं
इस फैसले की किसानों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले के किसान रामकिशन यादव कहते हैं, “हम पीढ़ियों से सूखे से जूझ रहे हैं। अगर यह परियोजना पूरी हो जाती है तो हमारी जिंदगी बदल जाएगी। हम साल में दो फसलें ले पाएंगे और पानी के लिए महीनों भटकना नहीं पड़ेगा।”
पूर्वांचल के गोंडा जिले की किसान सुषमा देवी का कहना है, “हमारे यहां बाढ़ और सूखा दोनों की समस्या है। बरसात में सब कुछ बह जाता है और गर्मियों में पानी के लिए तरस जाते हैं। सरयू नहर परियोजना से हमें दोनों समस्याओं से निजात मिलेगी।”
चुनौतियां और समाधान
हालांकि यह फंडिंग एक बड़ा कदम है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं जिनका सामना करना होगा:
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समय पर काम पूरा करना: भारत में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अक्सर समय से पूरी नहीं हो पातीं। इसके लिए नियमित निगरानी और समीक्षा की आवश्यकता होगी।
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पर्यावरणीय मंजूरी: कुछ परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें समय लग सकता है।
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भूमि अधिग्रहण: नहरों और अन्य संरचनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें स्थानीय लोगों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
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पारदर्शिता और जवाबदेही: फंड के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना भी एक चुनौती होगी।









