यूपी शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती 2026: उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षक भर्ती प्रतियोगियों की निगाहें अब एक ही व्यक्ति पर टिकी हैं – यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ( UPESSC ) के नवनियुक्त अध्यक्ष, पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार। दो साल पहले गठित इस आयोग ने अभी तक एक भी बड़ी भर्ती प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी नहीं की है, जिससे उम्मीदवारों में निराशा और असंतोष का माहौल है। ऐसे में, नए अध्यक्ष के कंधों पर न सिर्फ पुरानी लंबित भर्तियों को शीघ्र निपटाने, बल्कि आने वाले समय में शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती 2026 की प्रक्रिया को पारदर्शी और समय से संचालित करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

यूपी शिक्षक भर्ती: आखिर क्यों अटकी हैं भर्तियां?
यूपीईएसएससी का गठन 2022 में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को विलय करके किया गया था। इसका उद्देश्य प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी शिक्षक भर्तियों को एक छतरी के नीचे लाकर प्रक्रिया को तेज और कारगर बनाना था। लेकिन हुआ इसका उलट। आयोग के पास दो पुराने संस्थानों से विरासत में मिली अधूरी भर्तियों का भारी बोझ आ गया।
सबसे पहले, असिस्टेंट प्रोफेसर की 1302 पदों की भर्ती है। हालांकि लिखित परीक्षा और परिणाम घोषित हो चुका है, लेकिन साक्षात्कार की प्रक्रिया पूर्व अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद से ठप पड़ी है। प्रतियोगियों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए दोबारा परीक्षा की मांग की है, जिस पर आयोग को नए सिरे से रिपोर्ट मांगनी पड़ी। यह मामला अभी निपटने में समय लगेगा।
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दूसरा बड़ा मुद्दा पीजीटी (624 पद) और टीजीटी (3539 पद) की भर्ती है। जून 2022 में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इनकी परीक्षाओं की तारीखें चार बार घोषित और स्थगित की जा चुकी हैं। लाखों उम्मीदवार, जिन्होंने इन पदों के लिए आवेदन किया था, आज तक परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह देरी न सिर्फ उनके करियर के सपनों पर पानी फेर रही है, बल्कि राज्य के शैक्षणिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा रही है।
तीसरा, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की घोषणा के बावजूद उसका विज्ञापन तक जारी नहीं हो पाया है। यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि आयोग अभी तक अपने आंतरिक प्रशासनिक ढांचे और प्रक्रियाओं को पूरी तरह स्थापित नहीं कर पाया है।
उम्मीदवारों का आक्रोश और आंदोलन
इस लंबित प्रक्रिया का सीधा असर उन लाखों युवाओं पर पड़ा है जो शिक्षक बनने का सपना लेकर वर्षों से तैयारी कर रहे हैं। पीजीटी और टीजीटी के लिए आवेदन करने वाले 13 लाख से अधिक उम्मीदवारों में से कई तो निराश होकर अन्य राज्यों की भर्तियों की ओर रुख कर चुके हैं। जो शेष हैं, वे लगातार धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं, ज्ञापन दे रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका मुख्य आरोप है कि आयोग उनके समय, पैसे और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन नाराज और हताश प्रतियोगियों का भरोसा वापस जीतने की होगी।
2026 में बंपर भर्ती की संभावना: एक नई उम्मीद
हालांकि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन आने वाले समय में शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती 2025 के संकेत मिल रहे हैं। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही आशा की एक नई किरण जगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न निदेशालयों से हज़ारों नए पदों के लिए अधियाचन (डिमांड) तैयार है:
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उच्च शिक्षा निदेशालय: असिस्टेंट प्रोफेसर के 1250 से अधिक नए पदों के लिए अधियाचन तैयार है, और रिक्त पदों का विवरण मांगा गया है, जिससे यह संख्या और बढ़ सकती है।
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माध्यमिक शिक्षा निदेशालय: पीजीटी, टीजीटी और प्रधानाचार्य पदों के लिए 23,000 से अधिक नए पदों की मांग तैयार की जा चुकी है।
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प्राथमिक शिक्षा: प्राथमिक विद्यालयों में भी लंबे समय से बड़े पैमाने पर भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में टीईटी के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए भी जल्द प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
इन सबको मिलाकर, अकेले नए पदों की संख्या 24,000 से 25,000 के आसपास पहुंच सकती है। यदि इसमें पहले से लंबित पद (असिस्टेंट प्रोफेसर, पीजीटी, टीजीटी) भी जोड़ दिए जाएं, तो शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती 2026 का यह आंकड़ा और भी विशाल हो जाता है।
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नए अध्यक्ष के सामने मुख्य कार्यसूची
प्रशांत कुमार, जो एक अनुशासित पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं, के लिए शिक्षा भर्ती का यह क्षेत्र एक नया मोर्चा है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह अपने प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार लाएंगे। उनकी प्राथमिकताएं कुछ इस प्रकार होनी चाहिए:
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पारदर्शिता और संचार: सबसे पहले, सभी लंबित भर्तियों के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक टाइमलाइन जारी करनी होगी। उम्मीदवारों को हर चरण की जानकारी नियमित रूप से दी जानी चाहिए।
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तकनीकी बुनियादी ढांचा मजबूत करना: आयोग का अधियाचन पोर्टल अंतिम चरण में है। इसे शीघ्र और दोषरहित तरीके से लॉन्च करना होगा, ताकि आने वाली भर्तियों की प्रक्रिया ऑनलाइन सुचारू रूप से चल सके।
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पुराने मामलों का निपटारा: असिस्टेंट प्रोफेसर के साक्षात्कार और पीजीटी/टीजीटी की परीक्षाओं को त्वरित गति से आयोजित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। विवादों का निपटारा पारदर्शी तरीके से करना होगा।
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नई भर्तियों का रोडमैप: 24,000 से अधिक नए पदों की भर्ती के लिए एक व्यापक कैलेंडर जारी करना होगा, ताकि उम्मीदवारों को पहले से तैयारी का मौका मिल सके। शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती 2026 की यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
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आंतरिक दक्षता बढ़ाना: आयोग की स्वयं की कार्यकारी टीम और संसाधनों को मजबूत करना होगा, ताकि परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने में अनावश्यक देरी न हो।
उम्मीदवारों के लिए सलाह और तैयारी के टिप्स
इस अनिश्चितता के दौर में, प्रतियोगियों के लिए सबसे अच्छी रणनीति है – धैर्य रखना और लगातार तैयारी जारी रखना।
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अपडेट रहें: यूपीईएसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से नियमित रूप से जानकारी लेते रहें।
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पाठ्यक्रम पर फोकस: भर्ती प्रक्रिया चाहे कभी भी शुरू हो, पाठ्यक्रम में बदलाव की संभावना कम है। अपने विषय की बुनियादी समझ और शिक्षाशास्त्र (पेडागॉजी) पर मजबूत पकड़ बनाए रखें।
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पुराने पेपर अभ्यास: पिछले वर्षों के यूपीपीएससी, यूजीसी-नेट और राज्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न पत्र हल करें।
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समय प्रबंधन: चूंकि एक साथ कई भर्तियां आ सकती हैं, इसलिए अपनी तैयारी को इस तरह व्यवस्थित करें कि आप एक से अधिक परीक्षाओं के लिए तैयार रहें।
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मानसिक दृढ़ता: निराशा और अफवाहों से दूर रहें। एक संगठित और सकारात्मक दृष्टिकोण ही इस प्रतिस्पर्धा में सफलता दिला सकता है।









