कृषि ऋण योजना 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के लघु और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी सौगात दी है। रविवार को लखनऊ में आयोजित युवा सहकार सम्मेलन और यूपी को-ऑपरेटिव एक्सपो 2025 के उद्घाटन समारोह में सीएम योगी ने घोषणा की कि अब प्रदेश के किसान उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (एलडीबी) से सिर्फ छह प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकेंगे। यह घोषणा किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली है, क्योंकि इससे पहले एलडीबी से मिलने वाले कर्ज पर ब्याज दर लगभग साढ़े ग्यारह प्रतिशत थी। इस योजना को ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का नाम दिया गया है और इसका सीधा लाभ राज्य के छोटे और मझोले किसानों को मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार इस कम ब्याज दर को संभव बनाने के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम किसानों की आर्थिक बोझ को कम करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। किसानों को अब कम ब्याज दर पर ऋण मिलने से वे आधुनिक कृषि उपकरण, बीज, खाद और अन्य जरूरी संसाधन आसानी से खरीद सकेंगे, जिससे उनकी उपज और आमदनी दोनों में वृद्धि होगी। यूपी सरकार की यह कृषि ऋण योजना निश्चित रूप से किसान कल्याण और कृषि विकास को नई गति देगी।

सहकारिता बैंकों की सेहत में सुधार और नई पहल
सीएम योगी ने अपने संबोधन में राज्य के सहकारी बैंकिंग सिस्टम में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य के सहकारी बैंकों ने 162 करोड़ 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है और अब सभी जिला सहकारी बैंक लाभकारी स्थिति में हैं, जबकि पहले यह संस्थाएं बीमार और घाटे में चल रही थीं। इस परिवर्तन के पीछे सरकार की पारदर्शी नीतियां और डिजिटलीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सीएम योगी ने यह भी घोषणा की कि बलरामपुर में एक नए जिला सहकारी बैंक के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राज्य सरकार का लक्ष्य अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन को-ऑपरेटिव बैंक’ की अवधारणा को साकार करना है, ताकि हर जिले में एक मजबूत सहकारी बैंकिंग व्यवस्था किसानों की सेवा कर सके।
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मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ का बोलबाला था, जिसने सहकारिता क्षेत्र को बर्बाद कर दिया था और किसानों की हजारों करोड़ रुपये की पूंजी फंस गई थी। योगी सरकार ने धीरे-धीरे करके उन फंडों को किसानों तक वापस पहुंचाने का काम किया है और आज न सिर्फ किसानों का पैसा सुरक्षित है, बल्कि बैंक भी मुनाफे में हैं। यह सहकारिता क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है।
कृषि ऋण योजना से कृषि आदानों के वितरण में सहकारिता की भूमिका बढ़ेगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र में सहकारिता की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तर प्रदेश में वितरित होने वाले रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और कृषि रसायनों का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा सहकारी समितियों के माध्यम से, विशेष रूप से मार्कफेड (म-पैक्स) के जरिए किसानों तक पहुंचे। इससे न सिर्फ किसानों को गुणवत्तापूर्ण और उचित दर पर उत्पाद मिलेंगे, बल्कि सहकारी समितियों की आय में भी वृद्धि होगी। इसी कड़ी में, सरकार एम-पैक्स को 10 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध करा रही है और आने वाले समय में इस सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपये किए जाने की योजना है। हालांकि, इससे पहले रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
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युवाओं को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प
कार्यक्रम का मुख्य फोकस युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना था। सीएम योगी ने कहा कि युवा सहकार आंदोलन के शिल्पी और भविष्य हैं। एक विकसित भारत के निर्माण के लिए सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना अनिवार्य है। सहकारिता ने देश में आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की नींव रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है, जिसकी कमान देश के गृह मंत्री अमित शाह के पास है। यह मंत्रालय देश के सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहकारिता विभाग की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया। साथ ही, सहकारिता के क्षेत्र में सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों, मेहनती अधिकारियों और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। यह कार्यक्रम न केवल नई घोषणाओं के लिए, बल्कि सहकारिता क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने के लिए भी याद किया जाएगा।
किसानों के लिए 6% ब्याज दर का ऋण: एक विश्लेषण
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई किसान ऋण योजना राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला एक बड़ा कदम है। भारत में किसानों के लिए कृषि ऋण की उपलब्धता और उसकी लागत हमेशा से एक चुनौती रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, देश में सहकारी बैंक कृषि ऋण वितरण का एक महत्वपूर्ण जरिया हैं। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (एलडीबी) जैसे संस्थान लघु सीमांत किसानों तक सीधे पहुंच बनाने में सक्षम हैं।
ब्याज दर में लगभग 5.5% की यह कमी किसान के लिए एक बड़ी राहत है। उदाहरण के लिए, यदि एक किसान 1 लाख रुपये का एक साल का ऋण लेता है, तो पहले साढ़े ग्यारह प्रतिशत (11.5%) ब्याज दर पर उसे 11,500 रुपये ब्याज के रूप में चुकाने होते। नई 6% की दर से उसकी ब्याज लागत घटकर सिर्फ 6,000 रुपये रह जाएगी। यानी उसे 5,500 रुपये की सीधी बचत होगी। यह बचत वह अपने परिवार की अन्य जरूरतों या फसल में और निवेश कर सकता है। इस तरह की योजनाएं किसान कर्ज मुक्ति की दिशा में एक ठोस प्रयास हैं।
उत्तर प्रदेश में सहकारिता: पुनरुत्थान की कहानी
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश का सहकारिता तंत्र काफी कमजोर था। राज्य के 16 सहकारी बैंक रिजर्व बैंक की डिफॉल्टर सूची में शामिल थे और किसानों का विश्वास इस प्रणाली से उठ चुका था। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन संस्थाओं में पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और कुशल प्रबंधन लाकर उन्हें पुनर्जीवित किया है। आज सभी जिला सहकारी बैंक लाभ कमा रहे हैं, जो सरकार की सुशासन नीति को दर्शाता है। सहकारिता क्षेत्र में यह सुधार न केवल यूपी किसानों के लिए बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है।
निष्कर्ष: किसान समृद्धि की नई राह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित 6% ब्याज दर पर कृषि ऋण योजना निस्संदेह उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी निर्णय है। यह निर्णय किसान हित में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। इस योजना से न केवल किसानों की ऋण लागत में कमी आएगी, बल्कि सहकारी बैंकिंग प्रणाली भी और मजबूत होगी। राज्य सरकार का यह प्रयास है कि हर किसान समृद्ध हो, आत्मनिर्भर बने और राज्य की अर्थव्यवस्था में उसका योगदान बढ़े। यूपी के किसानों के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जहां वे कम ब्याज दर पर ऋण पाकर अपनी उपज बढ़ा सकते हैं और अपने जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकते हैं।
प्रश्न: यूपी सरकार ने किसानों के लिए क्या नई घोषणा की है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ी घोषणा करते हुए राज्य के लघु और सीमांत किसानों के लिए ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की शुरुआत की है। इसके तहत अब किसान उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (LDB) से सिर्फ 6% की ब्याज दर पर कृषि ऋण प्राप्त कर सकेंगे। यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले यह ऋण लगभग 11.5% ब्याज दर पर मिल रहा था।
FAQ Section:
प्रश्न: इस योजना का किसानों पर क्या सीधा प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: इस योजना का किसानों पर बहुत सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा:
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ऋण की लागत में भारी कमी: पहले 1 लाख रुपये के ऋण पर सालाना लगभग 11,500 रुपये ब्याज देना पड़ता था। अब यह लागत घटकर मात्र 6,000 रुपये रह जाएगी। इससे किसान की सालाना 5,500 रुपये की सीधी बचत होगी।
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आत्मनिर्भरता में वृद्धि: बचत हुई राशि को किसान बेहतर बीज, आधुनिक उपकरण, जैविक खाद या सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में लगा सकता है, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी।
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कर्ज के चक्र से मुक्ति: कम ब्याज दर से किसान आसानी से ऋण चुका सकेंगे और वे लगातार बढ़ते कर्ज के चक्र से बाहर निकल सकेंगे, जो भारतीय कृषि की एक बड़ी समस्या रही है।
प्रश्न: यह योजना किसानों तक कैसे पहुंचेगी और कौन पात्र होगा?
उत्तर: यह योजना प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए है। ऋण का वितरण उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (LDB) और अन्य जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ब्याज दर में कमी के लिए बैंकों को सीधा सहयोग (सब्सिडी) प्रदान करेगी, ताकि किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े और बैंकों की वित्तीय स्थिति भी प्रभावित न हो।
प्रश्न: सहकारी बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
उत्तर: सरकार ने सहकारी बैंकों के पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान दिया है:
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बीमार बैंकों को लाभकारी बनाया: सीएम योगी ने बताया कि 2017 से पहले 16 सहकारी बैंक डिफॉल्टर थे, लेकिन अब सभी जिला सहकारी बैंक लाभ कमा रहे हैं। 2024-25 में इन बैंकों ने 162 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
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नए बैंकों का गठन: बलरामपुर में एक नए जिला सहकारी बैंक के गठन की प्रक्रिया चल रही है।
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‘वन डिस्ट्रिक्ट वन को-ऑपरेटिव बैंक’ का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य हर जिले में एक मजबूत सहकारी बैंक स्थापित करना है, जो किसानों की वित्तीय जरूरतों का केंद्र बने।
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डिजिटलीकरण और पारदर्शिता: सहकारी बैंकों में डिजिटल सिस्टम लागू करके पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है।
प्रश्न: कृषि क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका और कैसे बढ़ेगी?
उत्तर: सरकार चाहती है कि सहकारी समितियां किसानों के लिए एकमात्र संपर्क न बनें, बल्कि उनकी आय का स्रोत भी बनें।
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कृषि आदानों का वितरण: लक्ष्य है कि राज्य में वितरित होने वाले उर्वरकों, कीटनाशकों और कृषि रसायनों का कम से कम 50% सहकारी समितियों के माध्यम से ही किसानों तक पहुंचे। इससे किसानों को शुद्ध उत्पाद उचित दर पर मिलेंगे और समितियों की आय भी बढ़ेगी।
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एम-पैक्स (मार्कफेड) को सशक्त बनाना: सरकार एम-पैक्स को 10 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दे रही है और जल्द ही इस सीमा को 15 लाख रुपये करने की योजना है।
प्रश्न: युवाओं को सहकारिता से कैसे जोड़ा जा रहा है?
उत्तर: सरकार का मानना है कि सहकारिता आंदोलन का भविष्य युवाओं के हाथों में है।
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युवा सहकार सम्मेलन जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जा रहा है।
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रोजगार के अवसर: सहकारी समितियों और बैंकों में रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और सिस्टम में नई ऊर्जा का संचार होगा।
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प्रधानमंत्री का ‘सहकार से समृद्धि’ विजन: केंद्र में अलग से सहकारिता मंत्रालय का गठन इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो युवाओं के लिए इस क्षेत्र में नए अवसर खोलता है।
प्रश्न: इस पहल से किसानों की आय वास्तव में कैसे बढ़ेगी?
उत्तर: यह योजना किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण है:
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इनपुट लागत में कमी: कम ब्याज दर से कर्ज की लागत घटेगी।
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उत्पादकता में वृद्धि: बचत को फिर से निवेश करके बेहतर उपज प्राप्त की जा सकेगी।
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बाजार संपर्क: मजबूत सहकारी समितियां किसानों की फसल का बेहतर मूल्य दिलाने में मध्यस्थ का काम कर सकती हैं।
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वैल्यू एडिशन: भविष्य में सहकारी समितियां फसल प्रसंस्करण और ब्रांडिंग में भी भूमिका निभा सकती हैं, ताकि किसान को उपज का अधिकतम मूल्य मिले।









