नया साल शुरू होते ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेशवासियों, खासकर शहरी क्षेत्रों के लोगों को एक बड़ी सौगात दी है। अब आपको अपने छोटे आवासीय या व्यावसायिक भवन का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के दफ्तरों के चक्कर लगाने या बाबुओं के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक नई डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली के तहत, अब आप खुद ही कुछ ही मिनटों में अपना मानचित्र स्वीकृति (Map Approval) प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा राज्य के सभी विकास प्राधिकरणों में शुरू की जा रही है और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इसे पहले ही लागू कर दिया है।
यह नई व्यवस्था, जिसे फास्टपास प्रणाली (FastPass System) का नाम दिया गया है, निर्माण क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। इसका मुख्य उद्देश्य आम आदमी को सरकारी प्रक्रियाओं के तिलिस्म से मुक्ति दिलाना और घर का नक्शा पास (Ghar ka Naksha Pass) करने की प्रक्रिया को सरल, तेज और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है।

क्या है फास्टपास प्रणाली? (What is FastPass System?)
फास्टपास प्रणाली उत्तर प्रदेश सरकार की एक डिजिटल पहल है, जो नए बिल्डिंग बायलॉज (Building Bylaws) के तहत लागू की गई है। इसके तहत, एक निश्चित सीमा तक के भवनों के नक्शे की स्वीकृति पूरी तरह से ऑटोमेटिक और ऑनलाइन होगी। यानी, किसी कर्मचारी या अधिकारी की मैन्युअल जांच के बिना ही सिस्टम नियमों के आधार पर नक्शे को पास या रिजेक्ट कर देगा।
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इसके दायरे में कौन से भवन आएंगे?
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आवासीय भवन (Residential Buildings): 100 वर्ग मीटर (लगभग 1076 वर्ग फुट) तक के क्षेत्रफल वाले प्लॉट पर बनने वाले मकान।
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व्यावसायिक भवन (Commercial Buildings): 30 वर्ग मीटर (लगभग 323 वर्ग फुट) तक के क्षेत्रफल वाले प्लॉट पर बनने वाली दुकानें या छोटे कार्यालय।
यानी, अगर आप एक मध्यमवर्गीय फैमिली के लिए घर बना रहे हैं या एक छोटी सी रिटेल दुकान का निर्माण कर रहे हैं, तो आप इस स्व-मानचित्र स्वीकरण (Self Map Approval) सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
पुरानी प्रक्रिया vs नई फास्टपास प्रक्रिया: एक तुलना
पहले की व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया एक लंबा और थका देने वाला सफर हुआ करती थी:
1. समय साध्य: नक्शा पास होने में हफ्तों, कई बार महीनों लग जाते थे।
2. जटिल दौड़: विभिन्न विभागों में चक्कर लगाना, फाइलों का इंतजार करना और कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ती थी।
3. पारदर्शिता की कमी: आवेदक को पता ही नहीं चलता था कि उसकी फाइल कहां अटकी है।
4. भ्रष्टाचार का डर: तमाम तरह के अनौपचारिक ‘चार्ज’ या ‘स्पीड मनी’ का डर बना रहता था।
वहीं, नई फास्टपास ऑनलाइन मैप अप्रूवल प्रणाली इन सभी समस्याओं का समाधान है:
1. सुपरफास्ट मंजूरी: अगर सारा डेटा सही और नियमों के अनुरूप है, तो नक्शा कुछ ही मिनटों में स्वीकृत हो जाता है।
2. घर बैठे सेवा: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। दफ्तर का एक चक्कर लगाने की जरूरत नहीं।
3. पूर्ण पारदर्शिता: हर स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है।
4. भ्रष्टाचार-मुक्त: चूंकि प्रक्रिया स्वचालित है और किसी अधिकारी का हस्तक्षेप नहीं है, इसलिए रिश्वत की संभावना लगभग शून्य है।
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कैसे करें आवेदन? फास्टपास मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया की स्टेप-बाई-स्टेप गाइड
यह प्रक्रिया अविश्वसनीय रूप से सरल बनाई गई है। आइए जानते हैं कि आप ऑनलाइन नक्शा पास (Online Naksha Pass) कैसे कर सकते हैं:
स्टेप 1: पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल map.up.gov.in पर जाएं। यहां आपको अपना नाम और मोबाइल नंबर रजिस्टर करना होगा। इस मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, जिसके वेरिफिकेशन के बाद आपकी लॉगिन आईडी और पासवर्ड जनरेट हो जाएगा।
स्टेप 2: लॉगिन करके आवेदन शुरू करें
अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड से पोर्टल पर लॉगिन करें। आवेदन फॉर्म खुलने पर आपसे कुछ जरूरी जानकारियां मांगी जाएंगी।
स्टेप 3: भूमि और भवन का विवरण भरें
इस चरण में आपको निम्नलिखित जानकारी सटीकता से दर्ज करनी होगी, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से आपकी (भू-स्वामी) होगी:
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प्लॉट की सटीक लोकेशन: जमीन का खसरा/गाटा नंबर, विवरण आदि।
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मास्टर प्लान के अनुरूप लैंड यूज: सुनिश्चित करें कि आपकी जमीन का उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक) मास्टर प्लान में दिए गए इंजीनियरिंग नक्शे के अनुसार ही है।
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आसपास की सड़कों का विवरण: सामने, पीछे और बगल वाली सड़कों की लंबाई और चौड़ाई।
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प्रस्तावित भवन का विवरण: भवन की कुल ऊंचाई, कवर्ड एरिया (Covered Area), भूतल सहित कुल मंजिलें।
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सेटबैक विवरण: फ्रंट (सामने), साइड (बगल) और रियर (पीछे) का सेटबैक नियमों के अनुसार दर्ज करें।
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प्रवेश/निकास और पार्किंग: मुख्य द्वार और निकास द्वार का स्थान तथा पार्किंग की व्यवस्था का विवरण।
स्टेप 4: नक्शा अपलोड करें और शुल्क जमा करें
सभी विवरण भरने के बाद, प्रस्तावित भवन का डिजिटल मानचित्र (जैसे ऑटोकैड फाइल या पीडीएफ) अपलोड करें। सिस्टम स्वचालित रूप से आपके दिए गए डेटा और अपलोड किए गए नक्शे की जांच करेगा और देय शुल्क की गणना करेगा। पोर्टल पर ही नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या UPI के माध्यम से शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।
स्टेप 5: झटपट मंजूरी और प्रमाणपत्र
अगर सब कुछ नियमों के अनुकूल है, तो कुछ ही मिनटों में आपका मानचित्र स्वीकृत (Map Approved) हो जाएगा। सिस्टम स्वतः ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल पर एक डिजिटल स्वीकृति पत्र (सर्टिफिकेट) और प्रमाणित नक्शा भेज देगा, जिसे आप प्रिंट निकाल सकते हैं और निर्माण कार्य शुरू कर सकते हैं।
नई व्यवस्था के प्रमुख लाभ: क्यों है यह एक बड़ी राहत?
1. समय और पैसे की बचत: दफ्तरों के चक्कर लगाने में जो समय और यात्रा खर्च बचेगा, वह सीधा लाभ है।
2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: छोटे बिल्डर्स और आम लोगों के लिए निर्माण शुरू करना आसान होगा, जिससे आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी।
3. डिजिटल इंडिया की मजबूत कड़ी: यह सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
4. निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा: तेज मंजूरी से प्रोजेक्ट्स जल्दी शुरू होंगे, जिससे रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
5. पारदर्शिता और जवाबदेही: हर चीज ऑनलाइन रिकॉर्ड पर होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी पर नजर रखना आसान होगा।
कुछ सावधानियां और जिम्मेदारियां
हालांकि यह प्रणाली बहुत आसान है, लेकिन इसमें भू-स्वामी की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है:
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सही जानकारी की जिम्मेदारी: आपके द्वारा दर्ज की गई हर जानकारी सही और प्रमाणिक होनी चाहिए। गलत जानकारी देने पर भविष्य में कानूनी कार्रवाई हो सकती है और मंजूरी रद्द की जा सकती है।
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नियमों का पालन: नक्शा बनाते समय बिल्डिंग बायलॉज, फायर सेफ्टी नॉर्म्स, एनवायरनमेंटल नॉर्म्स आदि का पूरा ध्यान रखना होगा।
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मास्टर प्लान का पालन: भवन का उद्देश्य (लैंड यूज) शहर के मास्टर प्लान के अनुरूप ही होना चाहिए।









