पीएम राहत योजना 2026: सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

PM RAHAT Scheme 2026: आपने अक्सर सुना होगा कि सड़क हादसे में कोई घायल हो जाता है और अस्पताल ले जाने पर सबसे पहला सवाल पूछा जाता है कि पैसे लाए हो या कोई अपना है। कई बार पैसे के अभाव में इलाज में देरी हो जाती है और मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। ऐसे में अब सरकार ने एक ऐसी योजना शुरू की है जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम राहत योजना को मंजूरी दी है, जिसका पूरा नाम प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड अश्योर्ड ट्रीटमेंट स्कीम है। इस योजना के तहत अगर किसी व्यक्ति का सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो जाता है, तो वह बिना एक पैसा खर्च किए डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज करा सकेगा और यह इलाज हादसे के बाद सात दिनों तक चलेगा।
पीएम राहत योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि यह किसी एक तरह की सड़क के लिए नहीं है, बल्कि किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुए हादसे के शिकार व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा। चाहे वह राजमार्ग हो या फिर गांव की छोटी सड़क या शहर की व्यस्त सड़क, हर जगह यह योजना लागू होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण बताया है, यानी सरकार की कोशिश है कि प्रशासन समय पर कार्रवाई करे और किसी की जान पैसे के अभाव में न जाए। इस योजना को दिल्ली के सेवा तीर्थ से लॉन्च किया गया, जो यह संदेश देता है कि सरकार सेवा के भाव से काम कर रही है।
पीएम राहत योजना 2026
पीएम राहत योजना 2026

कैसे काम करेगी पीएम राहत योजना?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर पीएम राहत योजना कैसे काम करेगी। तो इसके लिए सरकार ने पूरी डिजिटल व्यवस्था तैयार की है। अगर कहीं दुर्घटना होती है, तो किसी भी व्यक्ति को 112 नंबर पर फोन करना होगा। यह नंबर आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा है और इस पर कॉल करते ही पुलिस, एंबुलेंस और पास के अस्पताल को सूचना मिल जाएगी। इससे मरीज को जल्दी अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज का इलाज शुरू हो जाएगा और उसे किसी भी तरह का भुगतान नहीं करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया इस तरह डिजाइन की गई है कि पीड़ित को किसी भी तरह की परेशानी न हो और उसका इलाज बिना किसी देरी के शुरू हो जाए।
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कितना मिलेगा इलाज का खर्च और कितने दिनों तक?

पीएम राहत योजना के तहत हादसे के शिकार हर व्यक्ति को अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कराने की सुविधा दी जाएगी और यह सुविधा हादसे की तारीख से अगले सात दिनों तक के लिए वैध होगी। इन सात दिनों में मरीज को गहन चिकित्सा, दवाइयां और जरूरी सर्जरी जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट की भी व्यवस्था की गई है। अगर मरीज की हालत गंभीर नहीं है, तो उसे 24 घंटे का स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट दिया जाएगा और अगर जानलेवा स्थिति है, तो 48 घंटे तक का इलाज पुलिस सत्यापन से पहले ही शुरू कर दिया जाएगा। पुलिस को भी इसकी पुष्टि जल्दी करनी होगी, ताकि इलाज में किसी तरह की रुकावट न आए।

गोल्डन आवर: क्यों जरूरी है तुरंत इलाज?

अध्ययन बताते हैं कि अगर किसी हादसे के बाद पीड़ित को पहले घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, जिसे गोल्डन आवर कहते हैं, तो लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। पीएम राहत योजना इसी गोल्डन आवर को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि पीड़ित को समय पर इलाज मिल सके। 112 हेल्पलाइन और एंबुलेंस की समन्वित व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि मरीज जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचे और उसका इलाज शुरू हो सके। यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर मौतें इलाज में देरी के कारण होती हैं, न कि हादसे की गंभीरता के कारण।

अस्पतालों को भुगतान कैसे होगा?

अस्पतालों को यह पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा। अगर हादसा करने वाला वाहन बीमित है, तो यह पैसा बीमा कंपनियां देगी और अगर वाहन बीमित नहीं है या फिर हिट एंड रन का मामला है, तो यह पैसा सरकार अपने बजट से देगी। इस फंड से अस्पतालों को भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। क्लेम मंजूर होने के बाद अगले दस दिनों के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा, जिससे अस्पताल भी बिना किसी झिझक के मरीजों का इलाज कर सकेंगे। इससे एक तरफ जहां मरीजों को राहत मिलेगी, वहीं अस्पतालों को भी वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

पूरी प्रक्रिया डिजिटल, नहीं होगी कोई देरी

पीएम राहत योजना के तहत पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है, जिसमें ई-डार और टीएमएस 2.0 जैसे प्लेटफॉर्म एक साथ काम करेंगे। ई-डार पर पुलिस दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज करेगी और टीएमएस 2.0 से अस्पताल जुड़े होंगे। इन दोनों के एकीकरण से दुर्घटना रिपोर्टिंग से लेकर अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, इलाज, क्लेम और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और पारदर्शी होगी। इससे कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी खत्म हो जाएगी और पीड़ित को जल्दी इलाज मिल पाएगा।

सड़क हादसों के आंकड़े: कितनी कमी आई?

भारत में सड़क हादसों की बात करें तो हर साल लाखों लोग इनमें जान गंवा देते हैं। हालांकि सरकार के प्रयासों से पिछले साल नेशनल हाइवे पर हादसों में कमी आई है। सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों और मौतों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 11% से अधिक की कमी आई है। 2025 में नेशनल हाइवे पर हादसों की संख्या 1,34,307 रही, जो 2024 के 1,50,958 से कम है। मौतों की संख्या भी 64,772 से घटकर 57,482 रह गई। लेकिन फिर भी यह संख्या बहुत बड़ी है और इसे और कम करने की जरूरत है। पीएम राहत योजना इस दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगी कि हादसे के बाद घायल को जल्द से जल्द इलाज मिले और पैसे की कमी के कारण उसकी जान न जाए।

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