नमो ड्रोन दीदी योजना 2025 -26 सरकार की ऐसी पहल है, जिससे गाँव की महिलाओं को तकनीक से जोड़ा जा रहा है और उन्हें कमाने का नया जरिया मिल रहा है। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हुई है। इस योजना का उद्देश्य यही है कि गाँव की महिलाएं ड्रोन जैसी तकनीक सीखें और खेती से जुड़ा काम खुद करके अपनी कमाई बढ़ा सकें। ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन मशीनें मुफ्त में दी जाती हैं, जिससे वे खेती-बाड़ी में किसानों की मदद कर सकें और अपनी आमदनी बढ़ा सकें। केंद्रीय बजट 2025 में भी इस योजना के विस्तार और मजबूती पर जोर दिया गया है, जो सरकार की ग्रामीण महिलाओं के उत्थान और कृषि आधुनिकीकरण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

Quick Highlights Table: नमो ड्रोन दीदी योजना 2025 -26 – एक नजर में
पैरामीटर |
विवरण |
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योजना का नाम |
नमो ड्रोन दीदी योजना (Namo Drone Didi Scheme) |
शुरुआत |
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा |
वर्तमान चरण |
2024-25 से 2025-26 |
मुख्य लाभार्थी |
महिला स्वयं सहायता समूह (Women Self Help Groups – SHGs) |
मुख्य लाभ |
मुफ्त ड्रोन, प्रशिक्षण और कृषि सेवा प्रदाता बनने का अवसर |
लक्ष्य (2025-26 तक) |
15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान करना |
संबंधित विभाग |
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उर्वरक विभाग |
आधिकारिक वेबसाइट |
https://agriculture.gov.in/ (कृषि मंत्रालय) और राज्य सरकारों के ग्रामीण विकास/कृषि पोर्टल |
नमो ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य (Objective)
नमो ड्रोन दीदी योजना 2025 -26 के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं, जो ग्रामीण भारत के विकास की नई तस्वीर पेश करते हैं:
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महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता: अब गाँव की महिलाएं सिर्फ घर या खेत के काम तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि खुद ड्रोन उड़ाकर किसानों को सेवाएं देंगी और कमाई करेंगी। इससे उनमें आत्मविश्वास पैदा होगा और समाज में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
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आय में वृद्धि: ड्रोन दीदी बनकर महिलाएं किसानों को ड्रोन सेवाएं (जैसे खाद और कीटनाशक छिड़काव) किराए पर दे सकती हैं। इससे उन्हें एक स्थिर और अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है।सरकार और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रोन दीदी बनकर महिलाएं महीने में करीब 15–20 हजार रुपये तक की कमाई कर पा रही हैं।
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कृषि आधुनिकीकरण: ड्रोन से दवा और खाद का छिड़काव जल्दी होता है, जिससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचते हैं। समय पर और सटीक छिड़काव से फसल का उत्पादन बेहतर होता है। यह योजना किसानों को भी आधुनिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
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रोजगार सृजन: ड्रोन के रखरखाव, चार्जिंग और सेवा केंद्र चलाने जैसे कार्यों से गाँवों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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स्वास्थ्य सुरक्षा: पारंपरिक तरीके से कीटनाशक छिड़काव करने वाले मजदूरों को स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ता है। ड्रोन से छिड़काव इस जोखिम को काफी हद तक खत्म कर देता है।
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योजना के मुख्य लाभ (Benefits of Namo Drone Didi Yojana)
इस योजना के तहत चयनित महिला समूहों को व्यापक लाभ दिए जा रहे हैं:
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मुफ्त ड्रोन: सबसे बड़ा लाभ है चयनित स्वयं सहायता समूह को बिल्कुल मुफ्त में कृषि कार्यों के लिए उपयोगी ड्रोन मशीन मिलना। यह ड्रोन 8-10 लीटर तक की क्षमता वाले होते हैं।
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निःशुल्क प्रशिक्षण (Free Drone Training): केवल ड्रोन देना ही काफी नहीं है। महिलाओं को 15 दिन का इंटेंसिव प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें ड्रोन उड़ाने का तरीका, सुरक्षा नियम, रिमोट कंट्रोल ऑपरेशन, ड्रोन का रखरखाव और मरम्मत जैसे सभी जरूरी पहलू सिखाए जाते हैं।
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आर्थिक आत्मनिर्भरता: ड्रोन मिलने के बाद महिलाएं अपने गाँव और आस-पास के क्षेत्रों में किसानों से सेवा शुल्क लेकर छिड़काव का काम कर सकती हैं। इससे उनकी अपनी आमदनी बढ़ेगी और स्वयं सहायता समूह आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा।
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कृषि कार्य में आसानी: ड्रोन से छिड़काव करने में समय और मेहनत दोनों की बचत होती है। एक एकड़ की जमीन पर छिड़काव का काम महज 10-15 मिनट में पूरा किया जा सकता है, जो पारंपरिक तरीके से कई घंटे लेता था।
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सरकारी सहायता और मान्यता: इस योजना के तहत चयनित ड्रोन दीदीयों को सरकारी स्तर पर मान्यता मिलती है, जिससे उन्हें भविष्य में अन्य योजनाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है।
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria for Drone Didi Yojana)
नमो ड्रोन दीदी योजना 2025 के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं और समूहों को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। हालांकि पात्रता में थोड़ा बहुत अंतर राज्यों के अनुसार हो सकता है, लेकिन मुख्य मानदंड इस प्रकार हैं:
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समूह का पंजीकरण: आवेदन करने वाला समूह एक मान्यता प्राप्त महिला स्वयं सहायता समूह (Women Self Help Group) होना चाहिए। समूह का पंजीकरण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) या संबंधित विभाग के तहत होना चाहिए।
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आयु सीमा: समूह की वह महिला सदस्य जिसे प्राथमिकता के आधार पर ड्रोन दीदी बनने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। (कुछ स्रोत 18-37 वर्ष भी बताते हैं, लेकिन अधिकतर जगह 40 वर्ष तक की सीमा है)।
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शैक्षणिक योग्यता: कम से कम 10वीं पास होना आम तौर पर अनिवार्य है। ड्रोन के तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए बुनियादी शिक्षा जरूरी है।
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स्थायी निवास: आवेदक महिला को उसी गाँव/ब्लॉक की स्थायी निवासी होना चाहिए जहाँ से समूह संचालित होता है।
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इच्छा और प्रतिबद्धता: महिला में नई तकनीक सीखने की इच्छा और ड्रोन सेवा को एक व्यवसाय के रूप में चलाने की प्रतिबद्धता होनी चाहिए।
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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: ड्रोन ऑपरेशन के लिए अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है।
जरूरी दस्तावेज (Required Documents for Online Application)
ड्रोन दीदी योजना ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी या फोटो की आवश्यकता पड़ सकती है:
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आधार कार्ड: आवेदक महिला और समूह के प्रमुख सदस्यों का आधार कार्ड।
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निवास प्रमाण पत्र: राशन कार्ड, बिजली बिल या घर के कागजात में से कोई एक।
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आयु प्रमाण पत्र: जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट या आधार कार्ड।
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शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र: 10वीं की मार्कशीट या प्रमाण पत्र।
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बैंक खाता विवरण: स्वयं सहायता समूह का संयुक्त बैंक खाता पासबुक की पहली पेज की कॉपी और IFSC कोड।
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SHG आईडी कार्ड/पंजीकरण प्रमाण: स्वयं सहायता समूह का पंजीकरण प्रमाण पत्र या आईडी कार्ड।
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पासपोर्ट साइज फोटो: हालिया फोटोग्राफ।
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मोबाइल नंबर: आवेदक का सक्रिय मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)।
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ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step Online Application Process)
हालांकि नमो ड्रोन दीदी योजना 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया मुख्य रूप से राज्य सरकारों के माध्यम से चलती है, और सीधे केंद्रीय पोर्टल पर आवेदन का विकल्प हमेशा स्पष्ट नहीं होता। आमतौर पर निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
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सूचना प्राप्त करें: सबसे पहले अपने गाँव के प्रधान, ग्राम सेवक या ब्लॉक स्तर के ग्रामीण विकास/कृषि अधिकारी से संपर्क करें। पता करें कि आपके राज्य या जिले में ड्रोन दीदी योजना के लिए आवेदन कब और कैसे खुलेगे।
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ऑफिसियल वेबसाइट (Official Website) चेक करें: अपने राज्य के ग्रामीण विकास विभाग या कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित विजिट करते रहें। अधिसूचना वहीं जारी की जाती है। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों के अपने पोर्टल हैं।
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आवेदन फॉर्म प्राप्त करें: जब आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, तो संबंधित अधिकारी से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें। कई जगह यह फॉर्म ऑनलाइन डाउनलोड के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है।
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फॉर्म भरें और दस्तावेज संलग्न करें: फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी जैसे समूह का नाम, सदस्यों का विवरण, बैंक खाता विवरण आदि ध्यान से भरें। सभी जरूरी दस्तावेजों की अटैच्ड कॉपी साथ लगाएं।
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आवेदन जमा करें: भरा हुआ आवेदन फॉर्म संबंधित ब्लॉक या जिला स्तरीय कार्यालय में जमा कर दें। कुछ राज्यों में इसे ऑनलाइन ही सबमिट करने का विकल्प हो सकता है।
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चयन प्रक्रिया: आवेदन मिलने के बाद अधिकारी पात्रता की जाँच करेंगे। योग्य समूहों की एक सूची बनाई जाएगी और उन्हें प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
ध्यान दें: वर्तमान में, केंद्र सरकार ने प्रमुख उर्वरक कंपनियों (जैसे IFFCO, NFL) के साथ मिलकर यह कार्यक्रम चलाया है। अक्सर इन कंपनियों की तरफ से ही राज्य सरकारों के सहयोग से ड्रोन दीदीयों का चयन किया जा रहा है। इसलिए स्थानीय उर्वरक वितरक या कोऑपरेटिव सोसाइटी से भी संपर्क करना उपयोगी हो सकता है।
नमो ड्रोन दीदी ट्रेनिंग प्रोग्राम कैसा होता है?
इस योजना में ट्रेनिंग सबसे जरूरी हिस्सा है, क्योंकि बिना सही प्रशिक्षण के ड्रोन चलाना संभव नहीं है। चयनित महिलाओं को लगभग 15 दिनों का व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग के मुख्य मॉड्यूल इस प्रकार हैं:
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बेसिक्स ऑफ ड्रोन टेक्नोलॉजी: ड्रोन के विभिन्न भागों, उनके कार्य, बैटरी मैनेजमेंट और चार्जिंग सिस्टम के बारे में जानकारी।
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फ्लाइट ऑपरेशन एंड सेफ्टी: ड्रोन को कैसे उड़ाएं, लैंड कराएं, रिमोट कंट्रोल ऑपरेट करें। सभी सुरक्षा मानकों और मौसम संबंधी सावधानियों की जानकारी।
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एग्रीकल्चरल एप्लीकेशन: विभिन्न फसलों के लिए खाद व कीटनाशकों के छिड़काव का सही तरीका, दवा का घोल तैयार करना, सही मात्रा और ऊँचाई का ज्ञान।
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ड्रोन मैपिंग एंड डेटा एनालिसिस: बुनियादी स्तर पर खेत का मानचित्रण (मैपिंग) करना और डेटा को समझना।
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रखरखाव और मरम्मत: छोटे-मोटे तकनीकी गड़बड़ियों को स्वयं ठीक करना, ड्रोन की नियमित सफाई और देखभाल करना।
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व्यवसायिक प्रबंधन: किसानों से कैसे बात करें, सेवा का दाम कैसे तय करें, रिकॉर्ड कैसे रखें और अपने छोटे व्यवसाय को कैसे चलाएं।
यह ट्रेनिंग अक्सर कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), पॉलिटेक्निक संस्थान या ड्रोन निर्माता कंपनी के प्रशिक्षकों द्वारा दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा करने पर एक प्रमाण पत्र (Certificate) भी दिया जाता है।
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हकीकत से रूबरू: ड्रोन दीदीयों की सफलता की कहानियाँ
इस योजना का सबसे बड़ा प्रमाण देश भर में ड्रोन दीदी बन चुकी हज़ारों महिलाओं की सफलता है। उदाहरण के लिए:
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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की कई महिलाओं ने प्रशिक्षण पाकर न केवल अपने इलाके में ड्रोन सेवा शुरू की है, बल्कि वे अब दूसरे गाँवों में जाकर भी काम कर रही हैं। उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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हरियाणा में इस योजना के तहत सैकड़ों ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं। यहाँ की ड्रोन दीदीयाँ गेहूँ, धान और सब्जियों की फसलों में छिड़काव का काम कुशलतापूर्वक कर रही हैं।
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IFFCO जैसी कंपनियों ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया है कि उनके माध्यम से चुनी गई ड्रोन दीदीयों ने कृषि सेवाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है और वे दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।









