Diwali 2025: दिवाली का नाम सुनते ही मन में उत्साह, रोशनी और खुशियों की लहर दौड़ जाती है। यह त्योहार पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन अक्सर एक सवाल लोगों को परेशान करता है: आखिरकार, दिवाली कब मनाई जाएगी? साल 2025 में भी यही सवाल लोगों के जेहन में है – क्या दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी या 21 अक्टूबर को? इस भ्रम को दूर करने के लिए आइए जानते हैं देश के प्रसिद्ध ज्योतिष विद्वानों और पंडितों की क्या है राय।
सबसे पहले, समझें दिवाली मनाने का मूल आधार
हिंदू पंचांग के मुताबिक, दिवाली हमेशा कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। मुख्य रूप से, लक्ष्मी पूजन इसी दिन की अमावस्या तिथि पर किया जाता है। इसलिए अमावस्या तिथि का सही समय ही दिवाली की तारीख तय करता है।
2025 में अमावस्या तिथि का क्या है समय?
साल 2025 में, कार्तिक अमावस्या की तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। चूंकि अमावस्या दोनों दिनों पर है, इसीलिए तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
पंडितों ने क्या कहा? जानें चार प्रमुख राय
अलग-अलग मान्यताओं और गणनाओं के आधार पर विद्वानों के अलग-अलग मत सामने आए हैं:
1. पंडित राजकुमार शास्त्री: 20 अक्टूबर है शुभ
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री के अनुसार, 20 अक्टूबर को प्रदोष व्यापिनी अमावस्या का संयोग बन रहा है। इसका मतलब है कि अमावस्या तिथि प्रदोष काल (शाम का समय) में व्याप्त होगी। चूंकि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन शाम के समय ही किया जाता है, और उस समय अमावस्या तिथि प्रभावी है, इसलिए 20 अक्टूबर 2025 को दिवाली मनाना शुभ रहेगा।
2. स्वामी जिंतेंद्रानंद सरस्वती: प्रदोष काल है निर्णायक
स्वामी जिंतेंद्रानंद सरस्वती भी इस बात पर जोर देते हैं कि दिवाली का निर्धारण करते समय प्रदोष काल को अहमियत देनी चाहिए। उनके मुताबिक, जिस दिन अमावस्या तिथि प्रदोष काल में हो, उसी दिन दीपावली का पर्व मनाया जाना चाहिए। 2025 में यह स्थिति 20 अक्टूबर को बनती है।
3. कुछ अन्य विद्वान: 21 अक्टूबर को मनाएं दिवाली
वहीं, कुछ अन्य ज्योतिषी इस मत के हैं कि जब अमावस्या तिथि सूर्योदय के समय प्रभावी होती है, तो उसी दिन त्योहार मनाना चाहिए। उनकी गणना के अनुसार, 21 अक्टूबर की सुबह अमावस्या तिथि होने के कारण दिवाली 21 अक्टूबर को मनाई जानी चाहिए।
4. स्थानीय परंपराओं का भी रहता है असर
कई बार अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परंपराएं और पंचांग भी तिथि निर्धारण में भूमिका निभाते हैं। कोई इलाका एक दिन पहले ही दिवाली मना लेता है, तो कोई अगले दिन। इसलिए लोगों को अपने स्थानीय धार्मिक गुरुओं से सलाह लेनी चाहिए।
दिवाली क्यों मनाई जाती है? जानें 5 मुख्य कारण
दिवाली, जिसे “दीपावली” भी कहते हैं, यानी “दीयों की पंक्ति”। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इसके मनाने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:
1. भगवान राम की वापसी की खुशी (सबसे प्रसिद्ध कारण)
- मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम 14 साल का वनवास काटकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।
- उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए थे और खुशियाँ मनाई थीं।
- तब से ही यह दिन “बुराई (रावण) पर अच्छाई (राम) की जीत” के रूप में मनाया जाने लगा।
2. माँ लक्ष्मी की पूजा (समृद्धि का प्रतीक)
- दिवाली की रात को धन की देवी, माँ लक्ष्मी का जन्मदिन भी माना जाता है।
- ऐसी मान्यता है कि इस रात वह धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
- इसीलिए लोग अपने घरों को साफ-सुथरा कर रोशनी से सजाते हैं और लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर धन-समृद्धि की कामना करते हैं।
3. महाकाली का पूजन (बुराई का विनाश)
- कई क्षेत्रों में, विशेषकर बंगाल में, दिवाली पर माँ काली की पूजा की जाती है।
- मान्यता है कि माँ काली ने इसी दिन एक शक्तिशाली राक्षस का वध किया था।
- इस तरह, दिवाली बुरी शक्तियों के विनाश का भी प्रतीक है।
4. भगवान विष्णु ने बचाई थी लक्ष्मी (एक पौराणिक कथा)
- एक पुरानी कथा के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों ने समुद्र मंथन किया, तो उसमें से माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं।
- दिवाली का दिन उनके समुद्र से प्रकट होने का दिन माना जाता है।
- एक अन्य कथा के अनुसार, राजा बलि से लक्ष्मी को छुड़ाकर भगवान विष्णु इसी दिन वापस लाए थे।
5. व्यापारिक और सामाजिक महत्व (नया साल)
- जैन धर्म के अनुयायियों के लिए, दिवाली इसलिए पवित्र है क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर ने मोक्ष (मोक्ष) प्राप्त किया था।
- सिख धर्म में, इसी दिन गुरु हरगोबिंद साहिब जी को कैद से रिहा किया गया था।
- कई समुदायों के लिए, दिवाली व्यापारिक नए साल की शुरुआत भी है। लोग नए बही-खाते शुरू करते हैं और दुकानों पर नए साल की शुभकामनाएँ देते हैं।
निष्कर्ष: आप कब मनाएं Diwali 2025?
अधिकांश पंडितों और ज्योतिषियों की राय 20 अक्टूबर 2025 को दिवाली मनाने के पक्ष में है, क्योंकि उस दिन शाम को पूजन का महत्वपूर्ण समय (प्रदोष काल) अमावस्या तिथि के अंतर्गत आ रहा है। हालाँकि, तिथि को लेकर यह मतभेद बहुत आम बात है।
अंत में, सबसे अच्छा यही है कि आप अपने पारिवारिक रीति-रिवाजों और अपने विश्वास के अनुसार ही इस पावन पर्व को मनाएं। दिवाली का सार है अंधकार पर प्रकाश की जीत और आपसी प्रेम, एकता का संदेश फैलाना। चाहे आप 20 अक्टूबर को मनाएं या 21 अक्टूबर को, इस बात का ध्यान रखें कि आपकी श्रद्धा और भक्ति सच्ची हो।
शुभ दीपावली!









