2025 में दोगुना हुआ Credit Card का कर्ज – सुविधा या बोझ?

Credit Card: भारत में पिछले कुछ सालों में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पहले इसे केवल बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक लोग इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। यह एक तरफ आसान पेमेंट का साधन है, वहीं दूसरी तरफ कर्ज का बोझ भी बढ़ा रहा है।

Credit Card
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कितनी तेजी से बढ़ा कर्ज?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार जुलाई 2021 में देश में Credit Card का बकाया कर्ज लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये था। जुलाई 2025 तक यह बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानी महज़ चार साल में इसमें 140% की वृद्धि हुई।

यदि हम कुल क्रेडिट कार्ड खर्च (Spending) देखें तो RBI के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीयों ने क्रेडिट कार्ड से लगभग 19 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन किया, जबकि 2020-21 में यह खर्च सिर्फ करीब 8 लाख करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि कुछ ही वर्षों में Credit Card से होने वाला खर्च दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया।

क्यों बढ़ रहा है Credit Card कर्ज?

1. कार्डों की संख्या में तेजी से इजाफा
2021 में देश में करीब 6.3 करोड़ क्रेडिट कार्ड प्रचलन में थे। 2025 तक यह संख्या 10 करोड़ से ऊपर पहुँच गई। जितने ज्यादा कार्ड, उतना ज्यादा खर्च और उतना ही ज्यादा कर्ज लेने की संभावना।

2. EMI और ऑफ़र्स का लालच
ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स और बड़े-बड़े रिटेल स्टोर्स अब हर प्रोडक्ट को EMI पर उपलब्ध कराते हैं। “जीरो-कॉस्ट EMI” और “नो इंटरेस्ट ऑफ़र” सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन इनमें प्रोसेसिंग फीस, GST और हिडन चार्ज होते हैं। इससे ग्राहकों को लगता है कि वे सस्ते में महंगे सामान खरीद रहे हैं, जबकि असल में उनकी जेब पर और बोझ बढ़ता है।

3. जीवनशैली में बदलाव
आज के दौर में लोग तुरंत सुविधाओं के आदी हो गए हैं। महंगा मोबाइल फोन, लैपटॉप, ट्रैवल पैकेज या गाड़ी – सब कुछ क्रेडिट कार्ड से लिया जा रहा है। नतीजा यह है कि महीने के अंत में बिल चुकाना मुश्किल हो जाता है और ब्याज का बोझ बढ़ता चला जाता है।

 

Credit Card
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RBI और सरकार की चिंता

क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे बिना जमानत के कर्ज (Unsecured Loans) बहुत तेजी से बढ़े हैं। इसी को देखते हुए RBI ने नवंबर 2023 में बैंकों और NBFCs के लिए नियम सख्त कर दिए। अब ऐसे कर्ज पर ज्यादा पूंजी (Risk Weight) अलग रखनी होगी।

सरकार ने संसद में बताया कि मार्च 2025 तक देश में कुल अनसिक्योर्ड रिटेल लोन 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए, जो एक साल में लगभग 25% की वृद्धि है। इनमें सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा Credit Card कर्ज का है।

ब्याज दर की असली मार

क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा खतरा इसकी ब्याज दर है। भारत में क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर आमतौर पर 30% से 45% सालाना होती है। यानी अगर आपने 1 लाख रुपये का कर्ज लिया और समय पर पूरा भुगतान नहीं किया, तो साल भर में यह रकम 1.3 से 1.5 लाख रुपये तक पहुँच सकती है। जबकि पर्सनल लोन की ब्याज दर सामान्यतः 12–15% और होम लोन की दर 8–10% रहती है। यही वजह है कि क्रेडिट कार्ड सबसे महंगा कर्ज माना जाता है।

आम लोगों पर असर

नौकरीपेशा युवा लोग अक्सर सैलरी से ज्यादा खर्च कर लेते हैं और फिर बिल चुकाने में मुश्किल का सामना करते हैं।

कई परिवार मेडिकल इमरजेंसी या बच्चों की पढ़ाई के लिए कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ब्याज के कारण यह बोझ कई गुना बढ़ जाता है।

ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पेमेंट बढ़ने से वहाँ भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन वित्तीय जानकारी की कमी के कारण लोग आसानी से फँस जाते हैं।

कैसे बचें कर्ज के जाल से?

1. पूरा बिल चुकाएँ – हर महीने सिर्फ “Minimum Payment” करने से बचें। इससे कर्ज खत्म नहीं होता बल्कि और बढ़ता है।

2. सीमित कार्ड इस्तेमाल करें – कई कार्ड रखने से ट्रैक करना मुश्किल होता है और खर्च बढ़ जाता है।

3. अपनी आय के अनुसार खर्च करें – नियम बनाएं कि सैलरी का केवल 30% ही कार्ड से खर्च करेंगे।

4. ऑफ़र्स की सच्चाई समझें – EMI और डिस्काउंट ऑफर पढ़कर ही खरीदारी करें।

5. आपात स्थिति में इस्तेमाल करें – रोजमर्रा के खर्चों के लिए कैश या डेबिट कार्ड बेहतर विकल्प हैं।

 

निष्कर्ष

क्रेडिट कार्ड एक महत्वपूर्ण सुविधा है, लेकिन यह तभी फायदेमंद है जब हम इसका इस्तेमाल समझदारी से करें। यह हमें तुरंत भुगतान करने की शक्ति देता है, लेकिन समय पर पूरा बिल न चुकाने पर यह सबसे महंगा कर्ज बन जाता है। आज जरूरत है कि हम अपने खर्च पर नियंत्रण रखें, वित्तीय अनुशासन बनाएँ और Credit Card को सुविधा के रूप में इस्तेमाल करें, न कि कर्ज का जरिया बनाने के लिए।

 

 


 

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