अखबार के नीचे छपे रंग-बिरंगे गोले: जानिए क्या है इनका राज, यहां पढ़िए पूरी जानकारी

क्या आपने कभी गौर किया है कि अखबार के पन्ने के सबसे नीचे, मार्जिन पर, अलग-अलग रंगों के छोटे-छोटे गोले या सर्कल क्यों छपे होते हैं? अक्सर रोज़ अखबार पढ़ने वाले लाखों लोग भी इन पर ध्यान नहीं देते, या फिर देखकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन इन छोटे गोलों का बहुत बड़ा महत्व है। ये कोई सजावट नहीं, बल्कि प्रिंटिंग की दुनिया का एक जरूरी टेक्निकल पहलू हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर अखबार के नीचे रंगीन गोले क्यों होते हैं और ये CMYK प्रिंटिंग की दुनिया का कैसे एक अहम हिस्सा हैं।
अखबार के नीचे छपे रंग-बिरंगे गोले
अखबार के नीचे छपे रंग-बिरंगे गोले

ये गोले असल में हैं ‘प्रिंटर के मार्क्स’

जी हां, इन रंगीन गोलों को टेक्निकल भाषा में ‘प्रिंटर कलर रजिस्ट्रेशन मार्क्स’ या ‘CMYK सर्कल’ कहा जाता है। इनका सीधा संबंध अखबार या किसी भी रंगीन प्रिंटेड मटीरियल की प्रिंटिंग क्वालिटी से है। जब कोई अखबार प्रेस से निकल रहा होता है, तो प्रिंटिंग मशीन के ऑपरेटर के लिए यह जानना जरूरी होता है कि चारों बेसिक रंग सही तरीके से, सही जगह पर लग रहे हैं या नहीं। यहीं काम आते हैं ये अलग-अलग रंग के गोले।
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CMYK प्रिंटिंग: चार रंगों का खेल

अखबार समेत दुनिया की ज्यादातर रंगीन छपाई एक विशेष तकनीक से होती है, जिसे CMYK प्रिंटिंग मॉडल कहते हैं। CMYK चार अंग्रेजी अक्षरों का संक्षिप्त रूप है, जो चार मुख्य रंगों को दर्शाता है:
  1. C – Cyan (सियान): एक प्रकार का हल्का नीला या फिरोजी रंग।
  2. M – Magenta (मैजेंटा): गहरा गुलाबी या बैंगनीपन लिए लाल रंग।
  3. Y – Yellow (येलो): पीला रंग।
  4. K – Key (की): यहाँ ‘Key’ का मतलब Black यानी काला रंग होता है। K का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि B (Blue) से कन्फ्यूजन न हो।
इन चारों रंगों को अलग-अलग अनुपात में मिलाकर प्रिंटिंग प्रेस में लाखों रंग पैदा किए जाते हैं। आप अखबार में जो भी रंगीन फोटो, एडवर्टाइजमेंट या ग्राफिक्स देखते हैं, वे सभी इन्हीं चार रंगों के संयोजन से बने होते हैं।

फिर क्या काम करते हैं ये CMYK सर्कल?

अखबार की प्रिंटिंग प्रेस में, हर एक रंग (Cyan, Magenta, Yellow, Black) के लिए अलग प्रिंटिंग प्लेट होती है। ये प्लेटें सिलिंडर पर लगी होती हैं और हर प्लेट अपना रंग पेपर पर ट्रांसफर करती है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये चारों प्लेटें पेपर पर एकदम सही जगह (रजिस्टर) पर प्रिंट हो। अगर थोड़ी सी भी गड़बड़ी हुई, तो प्रिंट धुंधला दिखेगा, रंग साफ नहीं आएंगे, या फोटो के किनारे दो-तीन रंगों में बंटे हुए दिखाई देंगे। इसे ‘मिसरजिस्ट्रेशन’ कहते हैं।
यहीं आते हैं हमारे रंगीन गोले। अखबार के पन्ने के मार्जिन पर, ये चारों रंगों के अलग-अलग गोले और कभी-कभी उनके ओवरलैप से बने दूसरे रंगों के गोले भी छपे होते हैं। प्रिंटिंग ऑपरेटर इन गोलों को देखकर तुरंत पहचान लेता है:
  • क्या चारों रंगों के सर्कल एक-दूसरे के ऊपर पर्फेक्टली अलाइन हैं? अगर हां, तो प्रिंट सही है।
  • अगर कोई सर्कल थोड़ा सा भी खिसका हुआ है, तो इसका मतलब है कि उस रंग की प्लेट का रजिस्ट्रेशन ऑफ है और उसे ठीक करने की जरूरत है।
सरल शब्दों में, ये रंगीन डॉट्स या सर्कल प्रिंटिंग क्वालिटी के ‘हैल्थ इंडिकेटर’ की तरह काम करते हैं।

केवल अखबार ही क्यों? और कहाँ देख सकते हैं?

यह तकनीक सिर्फ अखबारों तक सीमित नहीं है। CMYK प्रिंटिंग मॉडल का इस्तेमाल पत्रिकाओं, किताबों, ब्रोशर, पैकेजिंग और लगभग हर तरह की कमर्शियल प्रिंटिंग में होता है। अगली बार जब आप कोई रंगीन मैगज़ीन या पैम्फलेट उठाएं, तो उसके किनारों पर ध्यान से देखिए। आपको ये प्रिंटर के मार्क्स अवश्य मिल जाएंगे। हालांकि, फाइनल प्रोडक्ट में इन मार्क्स को काटकर अलग कर दिया जाता है, लेकिन तेज रफ्तार से छपने वाले अखबारों में इन्हें काटने का चलन नहीं है, इसलिए वे हमें दिखाई देते हैं।

एक और दिलचस्प बात: कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?

प्रिंटिंग प्रेस में, अखबार का पेज डिजिटल फॉर्मेट में होता है। इस फाइल को अलग-अलग रंगों के लिए अलग कर दिया जाता है, जिसे ‘कलर सेपरेशन’ कहते हैं। चार अलग-अलग प्लेट्स बनती हैं। हर प्लेट पर सिर्फ उसी रंग का डाटा होता है। प्रिंटिंग के दौरान, पेपर इन चारों प्लेट्स/सिलिंडर्स से गुजरता है और हर सिलिंडर उस पर अपना रंग लगा देता है। पूरी प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि आंख झपकते ही हजारों अखबार छप जाते हैं। इन अखबार के नीचे के रंगीन गोले इस बात की गारंटी देते हैं कि यह सुपरफास्ट प्रक्रिया बिना किसी गलती के चल रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आज का दौर

पहले जब डिजिटल टेक्नोलॉजी नहीं थी, तो प्रिंटर के लिए रजिस्ट्रेशन को मैन्युअली सेट करना और मॉनिटर करना बहुत मुश्किल काम था। CMYK सर्कल उस जमाने में भी मौजूद थे और प्रिंट क्वालिटी का सबसे विश्वसनीय पैमाना थे। आजकल ऑटोमेटेड मशीनों में सेंसर लगे होते हैं जो रजिस्ट्रेशन में होने वाली गड़बड़ी को खुद ही ठीक कर देते हैं। लेकिन फिर भी, इन मार्क्स को रखना एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस बनी हुई है, ताकि मैन्युअल चेक हमेशा संभव हो।

क्या आपने कभी धुंधले गोले देखे हैं?

अगर कभी आपको किसी अखबार में ये रंगीन सर्कल साफ न दिखाई दें, या वे धुंधले और खिसके हुए लगें, तो समझ जाइए कि उस अखबार की प्रिंटिंग में कोई तकनीकी समस्या रही है। हो सकता है प्लेटें घिस गई हों, रंगों का बैलेंस ठीक न हो, या मशीन का केलिब्रेशन ऑफ हो। इससे अखबार की फोटोएं और टेक्स्ट भी साफ नहीं आएंगे। इस तरह, ये छोटे गोले आम पाठक के लिए भी प्रिंट क्वालिटी का एक सूक्ष्म संकेतक बन जाते हैं।

निष्कर्ष

तो अब आप जान गए होंगे कि अखबार के नीचे अलग-अलग रंग के गोले कोई रहस्य नहीं, बल्कि प्रिंटिंग इंडस्ट्री की एक सदियों पुरानी और विश्वसनीय टेक्नोलॉजी का हिस्सा हैं। ये CMYK प्रिंटिंग मॉडल के चार सैनिक हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको सुबह-सुबह एक साफ-सुथरा, रंगीन और पढ़ने लायक अखबार मिले। अगली बार जब आप अखबार पढ़ें, तो इन रंगीन गोलों पर एक नजर जरूर डालिए। ये आपको उस पूरी जटिल प्रक्रिया की याद दिलाएंगे, जो प्रेस के अंदर चलकर आपकी नज़रों के सामने यह खबरों का संसार लाती है। उम्मीद है, यह जानकारी आपके लिए दिलचस्प रही होगी। ऐसी ही और रोचक तकनीकी जानकारियों के लिए बने रहिए हमारे साथ।

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