Aadhar Card update:अब आपको आधार कार्ड बनवाने के लिए शहर के बैंक या डाकघर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी पहल की है। अब यूपी के गांवों में रहने वाले लोगों को आधार कार्ड बनवाने या उसमें जरूरी सुधार कराने के लिए मीलों का सफर करके शहर नहीं जाना पड़ेगा। यह सुविधा अब उनके अपने गांव और ग्राम पंचायत तक पहुंच गई है। यह कदम न केवल समय और पैसे की बचत करेगा, बल्कि डिजिटल भारत की मुहिम को ग्रामीण जनता के दरवाजे तक ले जाएगा।
ग्रामीणों की वह समस्या, जो अब होगी दूर
पहले की स्थिति पर नजर डालें तो ग्रामीणों के लिए आधार कार्ड बनवाना एक बड़ी मुश्किल हुआ करता था। चाहे नया आधार कार्ड बनवाना हो, नाम में सुधार कराना हो, जन्मतिथि ठीक करवानी हो या फोटो अपडेट करानी हो – हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें पास के कस्बे या शहर का रुख करना पड़ता था।

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लंबी दूरी का सफर: बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए बस या अन्य वाहन से शहर जाना अपने आप में एक चुनौती थी।
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टोकन की मार: अक्सर बैंक या डाकघर पहुंचने पर पता चलता था कि दिन के टोकन खत्म हो चुके हैं। इसका मतलब था खाली हाथ लौट आना और अगले दिन फिर से वही संघर्ष दोहराना।
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घंटों की प्रतीक्षा: यदि टोकन मिल भी गया, तो नंबर आने तक घंटों लंबी कतार में इंतजार करना पड़ता था। गर्मी, सर्दी या बरसात का मौसम हो, यह प्रक्रिया और दुष्कर हो जाती थी।
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पैसे और समय की बर्बादी: एक छोटा सा सुधार कराने के लिए भी पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। सफर का खर्च, कई बार खाने-पीने का खर्च, और मजदूरी का नुकसान – यह सब मिलाकर एक भारी समस्या थी।
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दस्तावेजों की उलझन: कई बार साथ ले जाए गए दस्तावेज ठीक नहीं होते थे, जिसके चलते प्रक्रिया अधूरी रह जाती थी और फिर से चक्कर लगाना पड़ता था।
इन्हीं सब कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार और पंचायती राज विभाग ने एक जमीनी स्तर का फैसला लिया है। अब ग्राम पंचायत ही आपका आधार केंद्र बनेगी।
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कैसे हुई शुरुआत? लखनऊ से मिली गति
इस नई योजना की शुरुआत राजधानी लखनऊ से की गई है, ताकि इसे पहले एक मॉडल के तौर पर परखा जा सके और फिर पूरे प्रदेश में लागू किया जाए। लखनऊ के दो गांवों – सरोजनीनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत ‘भटगवां पांडेय’ और चिनहट ब्लॉक की ग्राम पंचायत ‘सैरपुर’ – को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया है। यहां पर ग्राम पंचायत परिसर में ही आधार नामांकन और सुधार केंद्र शुरू किए गए हैं।
इन केंद्रों पर गांव के लोग अब न सिर्फ नया आधार कार्ड बनवा सकते हैं, बल्कि पुराने आधार में नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर जैसी जानकारी में सुधार भी करा सकते हैं। इसकी सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे प्रदेश में फैलाने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
पूरे यूपी में कैसे फैलेगी यह सुविधा? जानिए योजना
यूपी सरकार की यह योजना कोई छोटा-मोटा प्रयोग नहीं है, बल्कि एक व्यापक और सुविचारित रणनीति का हिस्सा है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया है:
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पहला चरण (शुरुआती विस्तार): पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, पहले चरण में प्रदेश की 1,000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवाएं शुरू की जाएंगी। इन पंचायतों का चयन विभिन्न जिलों से किया जाएगा ताकि एक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
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दूसरा चरण (राज्यव्यापी कवरेज): पहले चरण के अनुभवों से सीखते हुए, इस योजना को धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यह एक बहुत बड़ा और चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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अवसंरचना और प्रशिक्षण: सिर्फ केंद्र खोल देने भर से काम नहीं चलेगा। इसके लिए जरूरी है बायोमेट्रिक डिवाइस, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित कर्मचारी। इन सभी पहलुओं पर काम चल रहा है।
पंचायत सहायक बनेंगे आधार सेवा के हीरो
इस पूरी योजना की सफलता की कुंजी हैं पंचायत सहायक। इन सहायकों को ही गांव में आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में शामिल है:
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आधार नामांकन प्रक्रिया की बारीकियां समझाना।
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बायोमेट्रिक डिवाइस (फिंगरप्रिंट स्कैनर, आइरिस स्कैनर) को संचालित करने का तरीका।
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दस्तावेजों की जांच कैसे करें।
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ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग कैसे करें।
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ग्रामीणों को सही मार्गदर्शन कैसे प्रदान करें।
ये पंचायत सहायक स्थानीय लोग होते हैं, इसलिए उन्हें गांव के लोगों की भाषा और समस्या समझने में आसानी होती है। वे न सिर्फ आधार कार्ड बनवाने में मदद करेंगे, बल्कि ग्रामीणों को इसके महत्व और सुरक्षा के बारे में भी जागरूक करेंगे।
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ग्रामीणों के लिए क्या हैं फायदे? एक नजर में
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समय और पैसे की बचत: अब गांव में ही सेवा मिलने से यात्रा का खर्च और पूरे दिन की बर्बादी बचेगी। लोग अपने रोजगार पर ध्यान दे पाएंगे।
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सुविधा और सुलभता: बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिव्यांग और छोटे बच्चों के लिए यह सबसे बड़ी राहत है। अब उन्हें परेशानी उठाकर शहर नहीं जाना पड़ेगा।
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लंबी कतारों से मुक्ति: ग्राम पंचायत में सेवा मिलने से भीड़ कम रहेगी और काम जल्दी निपटेगा।
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त्वरित सुधार: अगर कोई गलती रह जाती है या जानकारी बदलनी है, तो उसे ठीक करवाना अब आसान होगा। इससे अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी दिक्कत नहीं आएगी।
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डिजिटल समावेशन: यह पहल डिजिटल इंडिया को ग्रामीण भारत तक ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। गांव के लोग प्रौद्योगिकी के और करीब आएंगे।
आधार कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज (ग्रामीण क्षेत्र के लिए विशेष)
अगर आप ग्राम पंचायत में जाकर आधार कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित दस्तावेजों में से कोई एक पहचान प्रमाण और पता प्रमाण जरूर ले जाएं। यह सूची यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के दिशा-निर्देशों के आधार पर है:
पहचान प्रमाण (Identity Proof):
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वोटर आईडी कार्ड
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पैन कार्ड
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राशन कार्ड
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पासपोर्ट
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ड्राइविंग लाइसेंस
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एमएलए/एमपी द्वारा जारी पहचान पत्र
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केंद्र/राज्य सरकार द्वारा जारी फोटो युक्त पहचान पत्र
पता प्रमाण (Address Proof):
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बिजली/पानी का बिल (घर के नाम पर, 3 महीने से ज्यादा पुराना नहीं)
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बैंक/पोस्ट ऑफिस की पासबुक
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पासपोर्ट
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जारी किया हुआ राशन कार्ड
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मकान किराए का समझौता (रजिस्टर्ड)
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ग्राम प्रधान या तहसीलदार द्वारा जारी पता प्रमाण पत्र (यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख दस्तावेज है)
तिथि प्रमाण (Date of Birth Proof):
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जन्म प्रमाण पत्र
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स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट/मार्कशीट
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पासपोर्ट
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पैन कार्ड
नोट: अगर आपके पास पता प्रमाण नहीं है, तो आप ग्राम प्रधान या तहसीलदार द्वारा जारी पत्र का उपयोग कर सकते हैं, जो गांव में रहने वाले लोगों के लिए एक सामान्य और स्वीकार्य दस्तावेज है।
किन सुधारों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं ग्राम पंचायत आधार केंद्र?
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नाम में सुधार (Name Update)
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जन्मतिफि में सुधार (Date of Birth Update)
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पते में बदलाव (Address Change)
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मोबाइल नंबर लिंक/अपडेट करना (Mobile Number Update)
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ईमेल आईडी जोड़ना (Email ID Update)
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फोटो अपडेट करना (Photo Update)
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बायोमेट्रिक विवरण अपडेट करना (Biometrics Update)
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लिंग में सुधार (Gender Update)









