गूगल का बड़ा दांव: अब JEE की तैयारी कराएगी जेमिनी AI, भारतीय छात्रों के लिए बदलाव की बयार?

Gemini Vs JEE Exam: रोहन सुबह 5 बजे उठता है। उसकी मेज पर NCERT की किताबों के ढेर के बीच एक लैपटॉप खुला है। अगले साल होने वाली JEE (जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम) की तैयारी उसकी दिनचर्या का केंद्र बिंदु है। लाखों भारतीय छात्रों की तरह, उसका सपना आईआईटी या एनआईटी जैसे शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान में दाखिला पाना है। लेकिन अब, उसकी तैयारी में एक नया साथी जुड़ने वाला है – और वह साथी है गूगल की एआई, जेमिनी।
28 जनवरी, 2026 को गूगल ने एक बड़ी घोषणा की। कंपनी अब अपने एआई चैटबॉट जेमिनी के जरिए JEE मेन की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए फुल-लेंथ मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस टूल्स लेकर आ रही है। यह कदम भारत की शिक्षा प्रणाली और एडटेक लैंडस्केप में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देता है।

क्या है गूगल की नई पहल?

गूगल का कहना है कि छात्र अब जेमिनी के अंदर ही JEE के पूर्ण लंबाई वाले मॉक टेस्ट दे सकेंगे। इन टेस्ट्स के सवाल भारतीय एजुकेशन फर्म्स Physics Wallah और Careers360 द्वारा वेरिफाइड कंटेंट पर आधारित होंगे। इससे पहले, गूगल ने SAT जैसे अंतरराष्ट्रीय टेस्ट्स के लिए भी ऐसे ही टूल्स लॉन्च किए थे।
अब JEE की तैयारी कराएगी जेमिनी AI
अब JEE की तैयारी कराएगी जेमिनी AI
एक मॉक टेस्ट पूरा करने के बाद, जेमिनी छात्रों को तुरंत फीडबैक देगा। यह उनकी ताकत के क्षेत्रों को हाइलाइट करेगा और साथ ही यह भी बताएगा कि किन टॉपिक्स पर और मेहनत की जरूरत है। जेमिनी सही जवाबों की व्याख्या भी करेगी और छात्र के प्रदर्शन के आधार पर उसके लिए एक पर्सनलाइज्ड स्टडी प्लान भी तैयार करेगी।

सिर्फ जवाब देने वाला बॉट नहीं, एक स्ट्रक्चर्ड गाइड

गूगल इस पहल के जरिए जेमिनी को जवाब देने का शॉर्टकट बनने से हटाकर, एक स्ट्रक्चर्ड एग्जाम प्रिपरेशन टूल के तौर पर स्थापित करना चाहता है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अक्सर छात्र एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल सीधे होमवर्क के जवाब पाने के लिए करते हैं, जो उनकी सीखने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन गूगल का फोकस अब प्रैक्टिस, फीडबैक और समझ पर है।
जेमिनी के अलावा, JEE मेन की तैयारी के टूल्स गूगल सर्च के ‘AI मोड’ में भी उपलब्ध होंगे। इसमें ‘कैनवास टूल’ भी शामिल है, जो छात्रों को उनके क्लास नोट्स अटैच करके स्टडी गाइड और इंटरैक्टिव क्विज बनाने की सुविगा देता है।
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भारत में एआई का बढ़ता शैक्षिक दायरा

गूगल के मुताबिक, भारतीय छात्र पहले से ही एडवांस्ड फिजिक्स से लेकर व्यापक STEM विषयों की पढ़ाई के लिए जेमिनी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे नोटबुक LM जैसे टूल्स का इस्तेमाल अपनी स्टडी मटेरियल को क्विज, फ्लैश कार्ड और ऑडियो या वीडियो सारांश में बदलने के लिए भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि गूगल के ये एआई टूल्स कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं, जो देश के दूरदराज के इलाकों में भी पहुंच को बढ़ाता है।

शिक्षकों के लिए भी है सहयोग

गूगल सिर्फ छात्रों तक ही सीमित नहीं है। कंपनी ने भारतीय शिक्षकों पर भी अपना फोकस बढ़ाया है। गूगल सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर एक राष्ट्रव्यापी प्रोग्राम पर काम करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों और सपोर्ट स्टाफ को प्रशासनिक कार्य और पाठ्यक्रम डिजाइन के लिए एआई का इस्तेमाल करने में मदद करना है।
इसी कड़ी में, कंपनी ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक “एआई-सक्षम राज्य विश्वविद्यालय” बनाने के पायलट प्रोजेक्ट की भी घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य व्यावसायिक और उच्च शिक्षा में एआई को लागू करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है, जिसमें शिक्षण, छात्र सहयोग और प्रशासनिक कार्य शामिल होंगे।

गूगल.ऑर्ग का बड़ा निवेश

गूगल के चैरिटेबल विंग, गूगल.ऑर्ग ने वधवानी एआई को लगभग 85 करोड़ रुपये (10 मिलियन डॉलर) का ग्रांट देने की घोषणा की है। इस फंडिंग का उद्देश्य सरकारी शिक्षा प्लेटफॉर्म्स में एआई को इंटीग्रेट करना है। यह पहल नेशनल ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल्स और राज्य शिक्षा प्लेटफॉर्म्स जैसी प्रणालियों को लक्षित करती है, ताकि उन्हें अधिक अनुकूल बनाया जा सके और शिक्षकों के प्रशासनिक बोझ को कम किया जा सके।
यह प्रोग्राम प्री-स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक फैला हुआ है और इसमें कई भारतीय भाषाओं में वॉयस-आधारित रीडिंग सपोर्ट और एआई-पावर्ड इंग्लिश लर्निंग कोच जैसे टूल्स शामिल हैं। गूगल का दावा है कि इसने पहले ही लगभग 10 मिलियन शिक्षार्थियों और शिक्षकों तक पहुंच बना ली है और 2027 के अंत तक 75 मिलियन छात्रों, 1.8 मिलियन शिक्षकों और एक मिलियन करियर की शुरुआत करने वाले पेशेवरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

JEE और भारतीय छात्र: क्यों है यह मायने रखता है?

JEE भारत की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल, लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सीटें सीमित होती हैं। आंकड़े बताते हैं कि JEE मेन में हर साल लगभग 11-12 लाख छात्र रजिस्टर करते हैं, जबकि आईआईटी में सीटें मात्र 17,000 के आसपास हैं। इसका मतलब है कि चयन दर 1% से भी कम है। ऐसे में, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और प्रैक्टिस की पहुंच ही सफलता की कुंजी बन जाती है।
गूगल की जेमिनी AI के साथ यह पहल उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है जो महंगे कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा सकते। छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के लिए यह एक लेवल-प्लेइंग फील्ड साबित हो सकती है।

एडटेक इंडस्ट्री पर क्या होगा प्रभाव?

भारत की एडटेक इंडस्ट्री पहले से ही बायजूस, अनअकैडमी, वेदांतु और फिजिक्स वल्लाह जैसे दिग्गजों के साथ तेजी से बढ़ रही है। गूगल के इस कदम से इस प्रतिस्पर्धा में और इजाफा होगा। हालांकि, गूगल ने फिलहाल फिजिक्स वल्लाह और करियर्स360 जैसे मौजूदा प्लेयर्स के साथ साझेदारी करके एक कोऑपिटिशन (सहयोगात्मक प्रतिस्पर्धा) का रास्ता चुना है। भविष्य में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या गूगल सीधे तौर पर कोर्सेज भी ऑफर करने लगता है या वह एक प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर के रूप में ही काम करता रहता है।

चुनौतियां और आगे की राह

हर नई तकनीक की तरह, एआई के इस इस्तेमाल के सामने भी चुनौतियां हैं:
1. डिजिटल डिवाइड: भारत में अभी भी ऐसे कई इलाके हैं जहां हाई-स्पीड इंटरनेट या स्मार्ट डिवाइस तक पहुंच एक चुनौती है।
2. एआई की सटीकता: JEE जैसी हाई-स्टेक्स परीक्षा के लिए, प्रश्नों और फीडबैक की 100% सटीकता बेहद जरूरी है। एआई मॉडल में बायस या गलती की गुंजाइश नहीं हो सकती।
3. मानवीय स्पर्श की कमी: एक अच्छा मेंटर सिर्फ अकादमिक मार्गदर्शन ही नहीं, बल्कि मोटिवेशनल सपोर्ट भी देता है। एआई इस मानवीय पहलू की पूरी तरह से जगह नहीं ले सकती।
4. डेटा प्राइवेसी: छात्रों के अकादमिक डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।

निष्कर्ष: शिक्षा के भविष्य की झलक

गूगल की जेमिनी AI के माध्यम से JEE प्रिपरेशन की यह पहल सिर्फ एक नया प्रोडक्ट फीचर नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा प्रणाली में एआई के एकीकरण की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है। यह AI-Powered Learning का एक ठोस उदाहरण है जो पर्सनलाइज्ड, एक्सेसिबल और डेटा-ड्रिवेन शिक्षा को बढ़ावा देता है।
अगर सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह तकनीक लाखों भारतीय छात्रों के सपनों को पंख लगा सकती है। यह शिक्षकों को रूटीन कामों से मुक्ति दिलाकर उन्हें और रचनात्मक बना सकती है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि टेक्नोलॉजी एक टूल है, जादू की छड़ी नहीं। असली सफलता तब मिलेगी जब एआई का उपयोग मानवीय मार्गदर्शन और छात्र की स्वयं की लगन के साथ सही सामंजस्य बिठाएगा।
भविष्य की कक्षा में, शायद रोहन जैसे छात्र सुबह 5 बजे उठकर सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि अपने Google Gemini AI असिस्टेंट के साथ भी बैठेंगे, जो उनकी तैयारी को अधिक स्मार्ट, फोकस्ड और प्रभावी बनाएगा। यह सफर अभी शुरुआत है, और राह दिलचस्प होने वाली है।

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