उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लेकर प्रदेश में कारोबार करना और आसान बना दिया है। अब यूपी में पेट्रोल पंप या डीजल पंप खोलने की प्रक्रिया में काफी ढील दी गई है। पहले जहां 10 अलग-अलग विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC लेना जरूरी था, वहीं अब इसकी संख्या कम कर दी गई है। इस पेट्रोल पंप खोलने की नई प्रक्रिया का मकसद निवेशकों और कारोबारियों के लिए राहत पैदा करना और उत्तर प्रदेश में व्यवसाय सुगमता को नए स्तर पर ले जाना है।
पुरानी व्यवस्था: एक लंबी और पेचीदा प्रक्रिया
इस बदलाव की अहमियत समझने के लिए पहले पुरानी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में अब तक अगर कोई व्यक्ति या कंपनी पेट्रोल पंप का लाइसेंस लेना चाहती थी, तो उसे एक लंबे और थकाऊ सफर से गुजरना पड़ता था। आवेदक को जिलाधिकारी के कार्यालय में आवेदन करने के बाद, कुल 10 विभिन्न विभागों से NOC जमा कराने होते थे। इनमें राजस्व विभाग, नेशनल स्ट्रेटजिक ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NSAI), लोक निर्माण विभाग (PWD), विकास प्राधिकरण या नगर निकाय, जिला पंचायत, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस विभाग, वन विभाग, विद्युत सुरक्षा और बिजली विभाग शामिल थे।

हर विभाग से NOC प्राप्त करने की प्रक्रिया में हफ्तों, कभी-कभी महीनों का समय लग जाता था। हर विभाग का अपना अलग तरीका और देरी का अपना कारण होता था। इस कारण यूपी में पेट्रोल पंप का लाइसेंस पाने में होने वाली अनावश्यक देरी से न केवल कारोबारियों का समय बर्बाद होता था, बल्कि उनकी योजनाओं और वित्तीय गणनाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ता था। यही नहीं, कई बार तो इस जटिल प्रक्रिया के चलते संभावित निवेशक ही पीछे हट जाते थे, जिससे प्रदेश के विकास और रोजगार सृजन पर असर पड़ता था।
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नई व्यवस्था: सिर्फ चार विभागों से NOC, बाकी के लिए स्वघोषणा
योगी सरकार के नए फैसले ने इस पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बना दिया है। खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए केवल चार मुख्य विभागों से ही NOC अनिवार्य रहेगा। ये विभाग हैं:
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राजस्व विभाग
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बिजली विभाग
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लोक निर्माण विभाग (PWD)
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संबंधित विकास प्राधिकरण (जैसे आवास विकास परिषद, औद्योगिक विकास प्राधिकरण आदि)
इसका सीधा मतलब है कि पहले जिन विभागों से NOC लेना अनिवार्य था, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, पुलिस विभाग, जिला पंचायत और विद्युत सुरक्षा से अब सीधे NOC लेने की जरूरत नहीं है। इन विभागों के लिए अब आवेदक का स्वघोषणा पत्र ही पर्याप्त माना जाएगा। आवेदक को एक शपथ पत्र देना होगा जिसमें वह यह घोषणा करेगा कि उसका प्रस्तावित पेट्रोल पंस इन विभागों के नियमों और कानूनों का पालन करेगा।
नई प्रक्रिया के प्रमुख लाभ: क्यों यह कदम अहम है?
इस निर्णय से उत्तर प्रदेश सरकार ने कारोबार करने में आसानी के मामले में एक बड़ी बाधा को दूर किया है। आइए देखते हैं कि यह बदलाव किस तरह से फायदेमंद साबित होगा:
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समय की बचत: सबसे बड़ा फायदा तो समय बचने का है। 10 की जगह सिर्फ 4 विभागों से NOC लेने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। पहले जहां यह प्रक्रिया 6 महीने से एक साल तक भी खिंच सकती थी, वहीं अब इसे कुछ ही हफ्तों या महीनों में पूरा किया जा सकेगा। यह पेट्रोल पंप लाइसेंस प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव है।
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प्रक्रिया में पारदर्शिता: नई व्यवस्था के साथ ही सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है। अब जिलाधिकारी द्वारा जारी किया गया डिजिटल हस्ताक्षरित NOC सीधे आवेदक के यूजर लॉग-इन पोर्टल पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकता है, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना कम हो जाएगी।
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निवेश को बढ़ावा: जब कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान और तेज होती है, तो निवेशक आकर्षित होते हैं। यह कदम यूपी में निवेश के माहौल को और बेहतर बनाएगा। छोटे-बड़े सभी कारोबारियों को यह सुनिश्चित होगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी मुश्किलों को कम करना चाहती है।
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रोजगार सृजन: हर नया पेट्रोल पंप सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा करता है। पंप चलाने के लिए स्टाफ, सुरक्षा गार्ड, ऑफिस कर्मचारी से लेकर रख-रखाव का काम करने वाले लोगों तक को रोजगार मिलता है। प्रक्रिया आसान होने से अधिक पंप खुलेंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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कारोबारी मनोबल में वृद्धि: लालफीताशाही और लंबी प्रक्रियाओं से कारोबारियों का मनोबल गिर जाता है। इस तरह के सुधारात्मक कदम उनके विश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें बेहतर तरीके से कारोबार चलाने के लिए प्रेरित करते हैं।
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नई प्रक्रिया के तहत आवेदन का तरीका
अब अगर आप उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पंप खोलना चाहते हैं, तो आपको किन चरणों से गुजरना होगा? आइए समझते हैं:
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सबसे पहले, आपको संबंधित जिले के जिलाधिकारी कार्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पेट्रोल पंप लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होने की वजह से आपको बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां और दस्तावेज सही तरीके से भरकर जमा करने होंगे। इसमें जमीन के कागजात, पहचान प्रमाण, व्यवसाय का पता आदि शामिल होंगे।
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इसके बाद, आपको उन चार अनिवार्य विभागों (राजस्व, बिजली, PWD, विकास प्राधिकरण) से डिजिटल तरीके से NOC प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। चूंकि यह प्रक्रिया भी ऑनलाइन एकीकृत होगी, इसलिए यह तेजी से आगे बढ़ेगी।
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बाकी बचे विभागों (जैसे प्रदूषण बोर्ड, वन विभाग आदि) के लिए आपको एक स्वघोषणा पत्र ऑनलाइन अपलोड करना होगा। इस पत्र में आप यह वादा करेंगे कि आप इन विभागों के सभी नियमों का पालन करेंगे।
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सभी जरूरी NOC और दस्तावेज जमा होने के बाद, जिलाधिकारी कार्यालय आपके आवेदन का संपूर्ण मूल्यांकन करेगा। सब कुछ ठीक पाए जाने पर, डिजिटल हस्ताक्षरित लाइसेंस सीधे आपके पोर्टल पर जारी कर दिया जाएगा, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।









