अगर आपके घर में स्कूली बच्चे हैं और उनका आधार अपडेट नहीं हुआ है, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है – ‘विद्यार्थी के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार’। इसके तहत अब तक 15 लाख से भी ज्यादा छात्रों का बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) सफलतापूर्वक कराया जा चुका है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका बच्चा इस अपडेट से वंचित रह जाता है, तो क्या नुकसान हो सकता है? आइए, विस्तार से समझते हैं।
आधार कार्ड में MBU यानी अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट क्या है?
आधार अपडेट के इस खास प्रोसेस को MBU यानी ‘मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट’ कहा जाता है। दरअसल, बचपन में बनवाया गया आधार कार्ड समय के साथ अपडेट नहीं होता। बच्चे बड़े होते हैं, उनकी उंगलियों के निशान, आंखों की पुतली (आइरिस) और चेहरे की बनावट बदल जाती है। ऐसे में पुराने बायोमेट्रिक डेटा से भविष्य में पहचान की पुष्टि करने में दिक्कत आ सकती है। इसीलिए UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने नियम बनाया है कि हर व्यक्ति को दो बार अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट कराना ही होगा। पहली बार जब बच्चा 5 साल का हो जाए और दूसरी बार जब वह 15 साल का हो जाए। 5 से 17 साल के बच्चों के लिए यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क है।

MP का ‘विद्यार्थी के लिए आधार’ अभियान: एक सराहनीय कदम
मध्य प्रदेश सरकार ने इस दिशा में बेहद प्रगतिशील पहल की है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा केंद्र और UIDAI के सहयोग से यह अभियान 15 अगस्त 2025 से चलाया जा रहा है। इसका मकसद है कि हर स्कूली छात्र का आधार अपडेट आसानी से और समय पर हो सके। अब तक के आंकड़े बताते हैं कि 31 दिसंबर 2025 तक, पूरे प्रदेश के 2000 से ज्यादा स्कूलों में विशेष MBU शिविर लगाए गए। इन शिविरों और आधार सेवा केंद्रों के जरिए 15 लाख से अधिक छात्रों ने अपना बायोमेट्रिक डेटा अपडेट करा लिया है। यह एक बड़ी सफलता है, लेकिन अभी भी कई बच्चे इससे बाहर हैं।
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आखिर क्यों जरूरी है अपडेटेड आधार? नहीं कराने पर क्या नुकसान?
यह सवाल हर अभिभावक के मन में उठता है। आइए, स्पष्ट शब्दों में समझें कि आधार अपडेट न कराने से विद्यार्थियों को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है:
1. स्कूल प्रवेश में दिक्कत: आजकल ज्यादातर प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में नर्सरी या पहली कक्षा में दाखिले के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। अगर बच्चे का आधार अपडेट नहीं है, तो उसका प्रवेश रोका जा सकता है या प्रक्रिया अटक सकती है।
2. प्रतियोगी परीक्षाओं में बाधा: JEE, NEET, UPSC जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए आवेदन और परीक्षा केंद्र पर पहचान पत्र के तौर पर आधार को मान्यता दी जाती है। NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा हॉल में एडमिट कार्ड के साथ वैलिड आधार कार्ड दिखाना जरूरी है। बायोमेट्रिक अपडेट न होने पर पहचान सत्यापन फेल हो सकता है और परीक्षा देने से रोका जा सकता है।
3. छात्रवृत्ति और DBT लाभ का नुकसान: सरकार की तरफ से मिलने वाली सभी छात्रवृत्तियां और सब्सिडी अब प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए सीधे बैंक खाते में आती हैं। इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक होना और आधार का अपडेटेड होना अनिवार्य शर्त है। अगर आधार अपडेट नहीं है, तो बच्चे को हज़ारों रुपये की छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
4. भविष्य के डिजिटल कामकाज में रुकावट: आगे चलकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना, पासपोर्ट के लिए आवेदन करना, यहां तक कि नया बैंक खाता खोलने जैसे कामों में भी बायोमेट्रिक अपडेटेड आधार की जरूरत पड़ती है। अगर बचपन में ही यह अपडेट नहीं कराया गया, तो युवावस्था में जाकर यह बड़ी समस्या बन सकती है।
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कैसे कराएं आधार अपडेट? प्रक्रिया है आसान
आधार अपडेट की प्रक्रिया बेहद सरल है। मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए तो यह और भी आसान हो गया है क्योंकि उनके स्कूलों में ही शिविर लग रहे हैं। सामान्य तौर पर यह अपडेट दो तरह से कराया जा सकता है:
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डिजिटल अपडेट (बिना बायोमेट्रिक): अगर सिर्फ पता बदलना है, तो UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट myaadhaar.uidai.gov.in या ‘माईआधार’ ऐप के जरिए ऑनलाइन कर सकते हैं। इसमें नाम, पता और मोबाइल नंबर में बदलाव किया जा सकता है।
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बायोमेट्रिक अपडेट (MBU): यही वह जरूरी प्रक्रिया है जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं। इसे कराने के लिए आपको किसी भी आधार सेवा केंद्र (Aadhaar Seva Kendra) या नजदीकी नामित पोस्ट ऑफिस में जाना होगा। बच्चे के माता-पिता में से किसी एक को अपना आधार कार्ड लेकर साथ जाना होगा। वहां बच्चे की नई फोटो, उंगलियों के निशान और आइरिस स्कैन किए जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है।









