विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2026: ग्रामीण रोजगार की नई गारंटी, मनरेगा को मिला आधुनिक रूप

VB-G RAM G BILL 2025: देश की ग्रामीण रोजगार योजना में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। लोकसभा में आज ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किया गया और उसे पारित कर दिया गया। यह विधेयक लगभग दो दशक से चले आ रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और इसे एक नए, आधुनिक तथा लक्ष्य-केंद्रित कानूनी ढांचे में ढाल देगा। इस नए कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जोड़ते हुए मजबूत आय सुरक्षा, टिकाऊ बुनियादी ढांचा और बेहतर जवाबदेही प्रदान करना है।

क्या है ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’?

विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 को औपचारिक तौर पर ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ के नाम से जाना जाएगा। यह सिर्फ नाम में बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार गारंटी की पूरी दर्शन और कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव लेकर आता है। पिछले 20 वर्षों में ग्रामीण भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदल गई है। निर्धनता में भारी गिरावट आई है, डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी है और आजीविका के स्रोत विविध हुए हैं। ऐसे में, मनरेगा सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह नया विधेयक उन्हीं जरूरतों को पूरा करने का प्रयास है।
MANREGA -विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025
MANREGA -विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025

मुख्य बदलाव: 100 से 125 दिन होगी रोजगार गारंटी

नए विधेयक का सबसे बड़ा और सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। पहले मनरेगा के तहत एक परिवार को साल में अधिकतम 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी। विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 इसे बढ़ाकर 125 दिन कर देता है। इसका मतलब है कि ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा और मजबूत होगी। हालांकि, इसमें एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि खेती के महत्वपूर्ण मौसम, जैसे बुवाई और कटाई के समय, 60 दिनों का ‘नो-वर्क पीरियड’ रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती में काम करने वाले मजदूर इस दौरान कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध रहें, जिससे किसानों और मजदूरों दोनों का हित साधा जा सके।
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चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र: रोजगार अब सिर्फ मजदूरी नहीं, विकास का साधन

पुराने मनरेगा में अक्सर आलोचना होती थी कि काम की प्रकृति ऐसी नहीं होती जिससे टिकाऊ सम्पत्ति बने। नया ग्रामीण रोजगार गारंटी विधेयक इस कमी को दूर करता है। अब रोजगार सृजन को चार खास प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में टिकाऊ बुनियादी ढांचा बनाने से जोड़ा जाएगा:
  1. जल सुरक्षा: तालाब खोदना, चेक डैम बनाना, जल संचयन संरचनाएं जैसे कामों पर फोकस।
  2. मुख्य ग्रामीण अवसंरचना: गांव की सड़कें, पुलिया, अन्य कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले काम।
  3. आजीविका बुनियादी ढांचा: कोल्ड स्टोरेज, मंडी भंडारण, हाट बाजार, छोटे उत्पादन केंद्र जैसी सुविधाएं बनाना।
  4. जलवायु अनुकूलन: बाढ़ नियंत्रण, मिट्टी के कटाव को रोकने, चरागाह विकास जैसे काम जो गांवों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाएं।
इन सभी कार्यों से बनने वाली सम्पत्तियों को एक नए विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जोड़ा जाएगा। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा जो पूरे देश में ग्रामीण बुनियादी ढांचे की निगरानी और योजना बनाने में मदद करेगा।
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पूर्वानुमानित बजट और केंद्र-राज्य साझेदारी

नए विधेयक के तहत वित्त पोषण का ढांचा भी बदला गया है। मनरेगा एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना थी, लेकिन विकसित भारत जी राम जी योजना को केंद्र प्रायोजित योजना (सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम) का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब केंद्र और राज्य मिलकर खर्च वहन करेंगे। अनुमान है कि मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्च के लिए कुल सालाना लगभग 1,51,282 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसमें केंद्र का हिस्सा लगभग 95,692 करोड़ रुपये होगा।
लागत साझाकरण का अनुपात इस प्रकार रहेगा:
  • अधिकतर राज्यों के लिए: केंद्र 60% – राज्य 40%
  • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए: केंद्र 90% – राज्य 10%
  • बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए: केंद्र 100%
इस नए वित्तीय ढांचे से राज्यों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और उम्मीद है कि इससे कार्यान्वयन में दक्षता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

मजबूत होगी निगरानी और पारदर्शिता

मनरेगा में धन के दुरुपयोग की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। नए विधेयक में इस चुनौती से निपटने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। केंद्र सरकार के पास अब सीधे हस्तक्षेत करने की शक्ति होगी। गंभीर अनियमितताएं मिलने पर केंद्र किसी राज्य या क्षेत्र के लिए धन जारी करना रोक सकता है और सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दे सकता है।
कार्यान्वयन के हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का रास्ता खोला गया है। हर काम की जीपीएस के जरिए रियल-टाइम निगरानी की जाएगी। ग्राम सभाओं की भूमिका को और मजबूत किया गया है, जिन्हें हर छह महीने में कम से कम एक बार सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) करना अनिवार्य होगा। सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे।

मनरेगा बनाम विकसित भारत विधेयक: तुलनात्मक दृष्टि

 

पहलू
मनरेगा (2005)
विकसित भारत-जी राम जी विधेयक (2025)
रोजगार गारंटी
प्रति परिवार 100 दिन
प्रति परिवार 125 दिन
कार्यों का फोकस
व्यापक, कई तरह के श्रम आधारित कार्य
चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र: जल, मुख्य ढांचा, आजीविका ढांचा, जलवायु अनुकूलन
योजना
विकेंद्रीकृत, लेकिन राष्ट्रीय एकीकरण कम
विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं, राष्ट्रीय इन्फ्रा स्टैक से जुड़ी
वित्त पोषण
केंद्रीय क्षेत्र की योजना
केंद्र प्रायोजित योजना, केंद्र-राज्य साझेदारी
प्रशासनिक खर्च
लागत का 6% तक
बढ़ाकर लागत का 9% तक, बेहतर कार्यान्वयन के लिए
तकनीकी उपयोग
डिजिटल भुगतान, जीओ-टैगिंग
एआई, बायोमेट्रिक, रियल-टाइम एमआईस डैशबोर्ड
जवाबदेही
राज्यों पर निर्भर
केंद्र के पास प्रवर्तन शक्ति, मजबूत सामाजिक अंकेक्षण

विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 के तहत आवेदन कैसे किया जाएगा?

फिलहाल, यह विधेयक अभी पारित हुआ है और इसके कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश व प्रक्रियाएं (मानक संचालन प्रक्रिया/एसओपी) जारी होनी बाकी हैं। हालांकि, विधेयक में दिए गए ढांचे और मौजूदा मनरेगा प्रणाली के आधार पर, आवेदन प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होने की संभावना है:

संभावित आवेदन प्रक्रिया (अनुमानित):

1. पंजीकरण (नया या नवीनीकरण):

  • सबसे पहले, लाभार्थी को अपने ग्राम पंचायत कार्यालय में संपर्क करना होगा।
  • पहले से मनरेगा जॉब कार्ड धारकों का डेटा नई प्रणाली में स्थानांतरित/अपडेट किया जा सकता है।
  • नए आवेदकों को आवेदन फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

2. आवश्यक दस्तावेज (संभावित):

  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड / परिवार रजिस्टर
  • मतदाता पहचान पत्र
  • बैंक खाता विवरण (आधार से लिंक)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर (रजिस्टर्ड)

3. जॉब कार्ड का डिजिटलीकरण:

  • पुराने भौतिक जॉब कार्ड की जगह डिजिटल जॉब कार्ड (मोबाइल ऐप या कार्ड में क्यूआर कोड के साथ) जारी किए जा सकते हैं। यह नए राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ा होगा।

4. रोजगार की मांग (डिमांड फॉर वर्क):

  • काम की मांग करने के लिए, लाभार्थी को अब शायद मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल, या ग्राम पंचायत में आवेदन करना होगा।
  • “नो-वर्क पीरियड” (बुवाई/कटाई के 60 दिन) को छोड़कर, किसी भी समय काम मांगा जा सकता है।
  • मांग दर्ज करने पर एक पावती (रसीद) मिलेगी, जिसमें काम आवंटित होने की समयसीमा का उल्लेख होगा।

5. बायोमेट्रिक उपस्थिति और कार्य आवंटन:

  • काम शुरू होने पर, बायोमेट्रिक उपस्थिति (अंगुलि/आईरिस स्कैन) या मोबाइल-आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा।
  • काम के स्थान और प्रकार की जानकारी ऐप/एसएमएस के जरिए दी जा सकती है।

6. भुगतान प्रक्रिया:

  • काम पूरा होने के बाद, 15 दिन के भीतर मजदूरी सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी।
  • भुगतान की रियल-टाइम स्थिति ऑनलाइन या मोबाइल ऐप पर ट्रैक की जा सकेगी।

ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:

  • शुरुआत कहाँ से करें? सबसे पहले अपने ग्राम सेवक, ग्राम पंचायत सचिव या जिला ग्रामीण विकास अधिकारी (DRDA) से संपर्क कर पूछताछ करें।
  • डिजिटल साक्षरता: चूंकि नई प्रणाली अधिक डिजिटल होगी, इसलिए परिवार के किसी युवा सदस्य या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से मदद लेने की तैयारी रखें।
  • ऑफलाइन विकल्प: यह उम्मीद की जाती है कि ऑफलाइन आवेदन का विकल्प (ग्राम पंचायत के माध्यम से) बना रहेगा ताकि डिजिटल पहुंच न होने पर भी लोग लाभ उठा सकें।
  • आधिकारिक घोषणा का इंतजार: अंतिम और सटीक प्रक्रिया की जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना और दिशानिर्देशों में दी जाएगी।
अभी के लिए सुझाव: यदि आप पहले से मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं, तो सुनिश्चित कर लें कि आपका आधार, बैंक खाता और मोबाइल नंबर जॉब कार्ड से सही तरीके से लिंक है। नए आवेदक अपने दस्तावेज तैयार रखें और स्थानीय पंचायत अधिकारियों से संपर्क में रहें। आधिकारिक घोषणाओं पर नज़र बनाए रखें।

विशेषज्ञों और हितधारकों की प्रतिक्रिया

इस विधेयक के पारित होने के बाद से विभिन्न हलकों से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। ग्रामीण विकास के कई विशेषज्ञों ने इसे एक सकारात्मक और जरूरी कदम बताया है। उनका मानना है कि ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिहाज से यह विधेयक एक दूरदर्शी कदम है। हालांकि, कुछ का यह भी मत है कि राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ने और कृषि मजदूरों के लिए 60 दिन के ‘नो-वर्क’ प्रावधान का व्यावहारिक असर क्या होगा, यह देखना बाकी है। पंचायती राज संस्थानों को मिली बढ़ी हुई जिम्मेदारी को वे एक स्वागतयोग्य बदलाव मान रहे हैं।

विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 क्या है?
यह एक नया कानूनी प्रस्ताव (बिल) है जिसे संसद ने पारित किया है। यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार गारंटी को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ते हुए आधुनिक, अधिक प्रभावी और टिकाऊ बुनियादी ढांचा-केंद्रित बनाना है।
2. मनरेगा और विकसित भारत जी राम जी विधेयक में क्या अंतर है?
मुख्य अंतर यह हैं:
  • रोजगार के दिन: मनरेगा में 100 दिन, नए विधेयक में 125 दिन गारंटी।
  • कार्यों का फोकस: नया विधेयक रोजगार को जल सुरक्षा, मुख्य ढांचा, आजीविका ढांचा और जलवायु अनुकूलन जैसे 4 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से जोड़ता है।
  • वित्त पोषण: मनरेगा केंद्र की योजना थी, जबकि नई योजना केंद्र प्रायोजित होगी, जिसमें केंद्र और राज्य लागत साझा करेंगे।
  • तकनीक व जवाबदेही: नए विधेयक में AI, बायोमेट्रिक्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर जोर दिया गया है।
3. 125 दिन रोजगार की गारंटी कैसे काम करेगी?
हर ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य बिना कौशल वाले शारीरिक काम करने को तैयार हों, उन्हें वित्तीय वर्ष में 125 दिन का रोजगार गारंटी के तौर पर मिलेगा। हालांकि, खेती के चरम मौसम (बुवाई/कटाई) में 60 दिन के “नो-वर्क पीरियड” का प्रावधान है ताकि किसानों को मजदूर मिल सकें।
4. इस विधेयक से ग्रामीण महिलाओं को क्या फायदा होगा?
मनरेगा में पहले से ही महिला भागीदारी 58% के आसपास है। नए विधेयक में प्रशासनिक खर्च बढ़ाकर 9% किया गया है, जिससे ग्राम स्तर पर और अधिक महिला पर्यवेक्षकों, मेटों आदि की नियुक्ति की गुंजाइश बनेगी। साथ ही, आजीविका बुनियादी ढांचा (जैसे कोल्ड स्टोरेज, हस्तशिल्प इकाइयाँ) के काम महिला स्वयं सहायता समूहों को नए अवसर दे सकते हैं।
5. क्या राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा?
हाँ, लेकिन यह बोझ चरणबद्ध और क्षमता के अनुरूप है। अधिकांश राज्यों के लिए लागत केंद्र-राज्य 60:40 के अनुपात में साझा होगी। पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 का रहेगा। राज्य पहले से ही सामग्री लागत वहन करते थे, नए ढांचे में यह स्पष्ट और पूर्वानुमानित होगा।
6. “विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक” क्या है?
यह एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा जिसमें देशभर में इस योजना के तहत बनने वाली हर परिसंपत्ति (जैसे तालाब, सड़क, कोल्ड स्टोरेज) का डेटा दर्ज होगा। इससे योजनाबंदी में दोहराव रुकेगा, रखरखाव आसान होगा और पीएम गति शक्ति जैसी अन्य राष्ट्रीय योजनाओं के साथ समन्वय बनेगा।
7. भुगतान में देरी की समस्या का समाधान क्या है?
विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि मजदूरी का भुगतान काम पूरा होने के 15 दिन के भीतर किया जाना चाहिए। बायोमेट्रिक उपस्थिति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी। आधार-सीडेड भुगतान प्रणाली को और मजबूती दी जाएगी।
8. क्या मनरेगा पूरी तरह बंद हो जाएगा?
हाँ, एक बार यह नया विधेयक पूरी तरह लागू हो जाने और संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद, मनरेगा अधिनियम, 2005 का स्थान विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025 ले लेगा। इसे मनरेगा का ही उन्नत और संशोधित संस्करण माना जा सकता है।
9. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे बल मिलेगा?
  • आय बढ़ोतरी: 125 दिन का रोजगार सीधे घरेलू आय बढ़ाएगा।
  • टिकाऊ संपत्ति: जल संरक्षण, सड़कें, भंडारण जैसी संरचनाएं उत्पादकता बढ़ाएंगी।
  • प्रवासन कमी: स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार मिलने से मजदूरों के शहरों की ओर पलायन में कमी आने की उम्मीद है।
  • जलवायु लचीलापन: जल संचयन और मृदा संरक्षण जैसे काम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करेंगे।
10. आम नागरिक कैसे ट्रैक कर सकता है कि योजना का कितना लाभ मिल रहा है?
विधेयक में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। ग्राम सभाओं को हर 6 महीने में सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) करना अनिवार्य होगा। सभी जानकारी, काम की प्रगति, मजदूर सूची और भुगतान विवरण ऑनलाइन पोर्टल/एमआईएस डैशबोर्ड पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होंगे। साप्ताहिक सार्वजनिक घोषणाएं भी की जाएंगी।

निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक नया कदम

विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 को सिर्फ एक योजना में बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए सोच में बदलाव कहा जा सकता है। यह विधेयक ग्रामीण रोजगार को आपातकालीन राहत के बजाय एक व्यवस्थित, योजनाबद्ध और विकासोन्मुखी साधन के रूप में स्थापित करता है। 125 दिन रोजगार की गारंटी से आय सुरक्षा मजबूत होगी, टिकाऊ बुनियादी ढांचा बनेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मजबूत तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता के प्रावधान अगर ठीक से लागू होते हैं, तो यह सार्वजनिक धन के सदुपयोग का एक नया मॉडल भी पेश कर सकता है।
यह विधेयक ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण इमारती ईंट साबित हो सकता है, जहां एक मजबूत, आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था देश की प्रगति की नींव होगी। अब नजर इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर टिकी है, जिसमें केंद्र, राज्य और ग्राम पंचायतों की सामूहिक साझेदारी अहम भूमिका निभाएगी।

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