बिहार की सियासत 2025 पर IRCTC घोटाला गहरा साया, लालू परिवार के लिए बढ़ीं मुश्किलें

IRCTC घोटाला

IRCTC घोटाला: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से एक पुराना मामला सुर्खियों में है और सियासी हलचल तेज हो गई है। IRCTC घोटाला मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कुल 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है और लालू परिवार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

IRCTC घोटाला

क्या है पूरा मामला?

IRCTC घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच देश के रेल मंत्री थे। मामला IRCTC यानी भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम के अंतर्गत आने वाले दो होटलों – रांची स्थित BNR होटल और पुरी स्थित BNR होटल – के संचालन और रखरखाव के ठेके से जुड़ा है।

सीबीआई का आरोप है कि इन दोनों होटलों के ठेके एक निजी कंपनी, सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, को बेइमानी और अनुचित तरीके से दिए गए। इस कंपनी पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और लालू यादव के करीबी माने जाने वाले प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी का नियंत्रण बताया जाता है।

कैसे हुआ था IRCTC घोटाला?

सीबीआई की जांच के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक खास तरह का ‘मॉडल’ इस्तेमाल किया गया, जिसे ‘जमीन के बदले नौकरी’ या ‘लैंड फॉर जॉब’ का मॉडल कहा गया। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर गड़बड़ी की गई ताकि सुजाता होटल्स को ही ठेका मिल सके।

बदले में इस कंपनी ने लालू यादव के परिवार से जुड़ी एक बेनामी कंपनी को रांची में रेलवे की एक बहुमूल्य जमीन बेहद सस्ते दामों पर दी। माना जा रहा है कि उस जमीन की सर्कल रेट करीब 32 करोड़ रुपये और बाजार भाव 94 करोड़ रुपये के आसपास था, लेकिन उसे महज 65 लाख रुपये में ही ट्रांसफर कर दिया गया। यानी, ठेके के बदले में जमीन हासिल करना इस साजिश का मुख्य मकसद था।

अदालत ने क्या कहा?

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय करते हुए साफ कहा कि यह पूरी साजिश लालू प्रसाद यादव की जानकारी में रची गई थी। अदालत ने लालू यादव पर पूरी साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं, राबड़ी देवी पर जमीन की डील में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है। उनके बेटे और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के युवा नेता तेजस्वी यादव पर इस पूरे IRCTC घोटाला से परिवार को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

आरोप तय होने के बाद अदालत ने तीनों प्रमुख आरोपियों – लालू, राबड़ी और तेजस्वी – से पूछा कि क्या वे अपना दोष स्वीकार करते हैं? इस पर तीनों ने ही खुद को दोषी मानने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे और कोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे। अब यह मामला ट्रायल के चरण में पहुंच गया है, जहां सभी पक्ष सबूत पेश करेंगे और अंत में अदालत यह तय करेगी कि आरोपी दोषी हैं या नहीं।

बिहार चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे गहरा असर आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है। लालू यादव की पार्टी RJD इस वक्त बिहार में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है और चुनाव में उसकी मुख्य दावेदारी है। ऐसे में, विपक्षी दलों के लिए यह मामला एक बड़ा हथियार साबित होगा। वे चुनाव प्रचार के दौरान लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें घेरने की कोशिश करेंगे।

हालांकि, RJD की तरफ से इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताकर खारिज किया जा रहा है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह फैसला लालू परिवार की मुश्किलों को बढ़ा देगा और बिहार की जनता के सामने सवाल खड़ा करेगा। अब देखना यह होगा कि क्या यह मामला चुनावी नतीजों को प्रभावित कर पाता है या फिर RJD अपनी जनाधार की ताकत से इस झटके को झेल जाती है। एक बात तो तय है, बिहार का यह चुनावी सीजन और भी रोमांचक हो गया है।

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