उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब सभी बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे और उन्हें भी अन्य उपभोक्ताओं की तरह पूरा बिजली बिल भरना होगा। दशकों से चली आ रही छूट व्यवस्था अब समाप्त हो रही है, जिससे हजारों कर्मचारी प्रभावित होंगे।

बिजली बिल में छूट की समाप्ति: एक ऐतिहासिक फैसला
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन की केस्को मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है। डॉ. आशीष गोयल ने निर्देश दिए कि किसी भी विभागीय कर्मचारी या इंजीनियर को मीटर न लगाने की रियायत नहीं दी जाएगी। एलएमवी 10 श्रेणी के तहत घरेलू बिजली की दर पर बिजली देने के लिए उनके घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएं।
यह फैसला उस घटना के बाद आया है जब पिछले सप्ताह कानपुर की केसा कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों ने मीटर लगाने पहुंची टीम को खाली हाथ लौटा दिया था। अब यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन ने तेजी से मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे स्पष्ट है कि इस बार यह प्रक्रिया पूरी की ही जाएगी।
क्या थी पुरानी व्यवस्था?
दशकों से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बिजली विभाग के कर्मचारियों को उनके पद के आधार पर बिजली बिल में छूट मिलती रही है। कुछ को तो मीटर ही नहीं लगाए जाते थे, जबकि कुछ को नाममात्र का बिजली बिल भरना पड़ता था। यह व्यवस्था उनकी सेवा शर्तों का हिस्सा मानी जाती थी।
हालांकि, समय के साथ यह व्यवस्था अनेक विवादों और आलोचनाओं का कारण बन गई। आम जनता का आरोप था कि जो विभाग उनसे पूरा बिजली बिल वसूलता है, उसके अपने कर्मचारी बिना बिल या कम बिल भरकर बिजली का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल राजस्व का नुकसान होता था, बल्कि नैतिक रूप से भी यह सही नहीं माना जाता था।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर: पारदर्शिता की ओर कदम
नई व्यवस्था के तहत अब सभी बिजली कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। ये मीटर आधुनिक तकनीक से लैस होंगे और इनके माध्यम से बिजली बिल का भुगतान पहले करना होगा, फिर बिजली मिलेगी। इससे किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना नहीं रहेगी।
स्मार्ट मीटर के लाभ:
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पारदर्शी बिलिंग प्रक्रिया
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बिजली उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी
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मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त
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समय पर बिजली बिल का भुगतान सुनिश्चित
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बिजली चोरी रोकने में सहायक
ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर नाराजगी
समीक्षा बैठक में डॉ. गोयल ने नौ महीनों के दौरान 148 ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर गंभीर नाराजगी जताई। क्षेत्रवार इलाकों में खराब ट्रांसफॉर्मर की स्थिति देखी तो एक्सईएन बागीश कुमार को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए गए। हालांकि बैठक समाप्त होने पर सुधार लाने की हिदायत के साथ तत्काल कार्रवाई करने से मना किया गया।

चेयरमैन ने स्पष्ट हिदायत दी कि ट्रांसफॉर्मर नहीं खराब होना चाहिए, अन्यथा जिम्मेदार एक्सईएन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्मार्ट मीटर लगाने की धीमी गति पर भी असंतोष व्यक्त किया।
बिजली बिल राहत योजना का विस्तार
बैठक के दौरान डॉ. आशीष गोयल ने बिजली बिल राहत योजना की समीक्षा की और इसके पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना के दायरे में आने वाले बकायेदार उपभोक्ताओं और चोरी में फंसे उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर उन्हें लाभान्वित कराने की जरूरत है।
बिजली बिल राहत योजना के मुख्य बिंदु:
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बकाया बिजली बिल के लिए राहत
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आसान किस्तों में भुगतान की सुविधा
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चोरी के मामलों में समझौता विकल्प
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वंचित वर्गों तक योजना का लाभ पहुंचाना









