यूपी सरकार का किसानों के लिए बड़ा फैसला: डीएपी, यूरिया और पोटाश पर फिक्स रेट का सख्त फरमान, NSA की चेतावनी के साथ कालाबाजारी पर अंकुश

डीएपी, यूरिया और पोटाश पर उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के करोड़ों किसानों के हित में एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। किसानों को उर्वरक (खाद) की उपलब्धता सुनिश्चित करने और डीएपी, यूरिया व पोटाश जैसे जरूरी इनपुट्स में होने वाली कालाबाजारी और मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सीएम योगी ने एक ‘सुपर फरमान’ जारी किया है। इस फरमान के तहत अब इन खादों को सरकार द्वारा तय फिक्स रेट पर ही बेचा जाएगा और ओवर रेटिंग या कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) जैसे सख्त कानून लागू किए जाएंगे। यह फैसला रबी सीजन में गेहूं की फसल के लिए ‘टॉप ड्रेसिंग’ के समय आया है, जब यूरिया की मांग चरम पर होती है।
डीएपी, यूरिया और पोटाश पर फिक्स रेट का सख्त फरमान, NSA की चेतावनी के साथ कालाबाजारी पर अंकुश
डीएपी, यूरिया और पोटाश पर फिक्स रेट का सख्त फरमान, NSA की चेतावनी के साथ कालाबाजारी पर अंकुश

क्या है पूरा मामला? सीएम योगी का सख्त ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि एवं सहकारिता मंत्री की मौजूदगी में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यूपी में खाद की कालाबाजारी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मिलावटी या नकली खाद बेचने वाले, तय फिक्स रेट से अधिक दाम वसूलने वाले या कृत्रिम कमी दिखाकर किसानों को परेशान करने वाले किसी भी व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) जैसे प्रावधान भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सीएम योगी ने यह भी साफ किया कि यूपी में डीएपी, यूरिया और पोटाश का वितरण पूरी तरह पारदर्शी और नियमित होगा। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए कि वे खुद मैदान में उतरकर हालात की जांच करें। इसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी।
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क्यों जरूरी था यह फैसला? किसानों की सदियों पुरानी समस्या

भारत में, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में, खाद की कालाबाजारी एक पुरानी और विकट समस्या रही है। हर सीजन में, विशेषकर रबी सीजन में गेहूं की टॉप ड्रेसिंग और खरीफ सीजन में धान की रोपाई के समय, यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के मामले बढ़ जाते हैं। कुछ बेईमान तत्व सरकारी सब्सिडी वाली खाद को ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचते हैं, नकली या मिलावटी खाद बेचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, और तय दर से ज्यादा पैसे वसूलते हैं।
इससे न सिर्फ किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि फसल की पैदावार पर भी बुरा असर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में, यूपी के विभिन्न जिलों से ऐसी शिकायतें लगातार आती रही हैं। सीएम योगी के इस सख्त ऐलान का मकसद इन्हीं बेईमान तत्वों की कमर तोड़ना और किसानों को उनका हक दिलाना है।

क्या हैं नए दिशा-निर्देश? पूरी वितरण प्रणाली पर सीधी नजर

1. फिक्स रेट पर ही बिक्री: डीएपी, यूरिया और पोटाश समेत सभी सब्सिडी वाली खादों की बिक्री सरकार द्वारा निर्धारित फिक्स रेट पर ही होगी। कोई भी दुकानदार या खाद समिति किसान से अतिरिक्त पैसा वसूलने की हिमाकत नहीं कर पाएगी।
2. NSA की धमकी: कालाबाजारी, मिलावट या ओवर रेटिंग करने वालों के खिलाफ NSA सहित सभी कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे। यह चेतावनी डीलरों और अधिकारियों दोनों के लिए है।
3. सीधी निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय से: अब हर जिले में खाद वितरण की निगरानी सीधे सीएम ऑफिस से की जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी गड़बड़ी छुपी न रहे।
4. अधिकारियों का औचक निरीक्षण: जिलाधिकारी (DM), अपर जिलाधिकारी (ADM) और उप जिलाधिकारी (SDM) को स्वयं खाद की दुकानों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) का औचक निरीक्षण करना अनिवार्य होगा।
5. विजिलेंस जांच का डर: किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर तुरंत विजिलेंस जांच शुरू की जाएगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
6. समितियों के समय का पालन: सभी खाद वितरण केंद्र निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से खुले रहेंगे, ताकि किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
7. रोजाना समीक्षा: कृषि मंत्री और सहकारिता मंत्री को हर रोज खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
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प्रदेश में खाद की उपलब्धता: क्या है स्टॉक की स्थिति?

सरकार का दावा है कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसी भी तरह की कमी नहीं है। 16 दिसंबर 2025 तक के लिए उपलब्ध आंकड़े इस प्रकार हैं:
  • कुल यूरिया: 9.57 लाख मीट्रिक टन
  • सहकारी क्षेत्र: 3.79 लाख मीट्रिक टन
  • निजी क्षेत्र: 5.78 लाख मीट्रिक टन
  • कुल डीएपी: 3.77 लाख मीट्रिक टन
  • सहकारी क्षेत्र: 1.47 लाख मीट्रिक टन
  • निजी क्षेत्र: 2.30 लाख मीट्रिक टन
  • कुल एनपीके (पोटाश सहित): 3.67 लाख मीट्रिक टन
  • सहकारी क्षेत्र: 0.88 लाख मीट्रिक टन
  • निजी क्षेत्र: 2.79 लाख मीट्रिक टन
इस समय रबी सीजन में गेहूं की फसल की टॉप ड्रेसिंग चल रही है, जिसके लिए यूरिया की आवश्यकता होती है। सरकार के मुताबिक, हर दिन औसतन 54,249 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है। सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि पर्याप्त स्टॉक के बावजूद किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

इस सख्त फरमान के सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकते हैं:
1. किसानों की बचत: फिक्स रेट पर खाद मिलने से किसानों की लागत कम होगी। उन्हें ब्लैक मार्केट के ऊंचे दाम नहीं चुकाने पड़ेंगे।
2. पैदावार में सुधार: शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद मिलने से फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होगा।
3. कालाबाजारी पर रोक: NSA जैसे सख्त प्रावधानों के डर से खाद की कालाबाजारी करने वाले तत्व सक्रिय नहीं होंगे। इससे पूरे बाजार में अनुशासन आएगा।
4. पारदर्शिता बढ़ेगी: सीधी निगरानी और अधिकारियों के निरीक्षण से वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। भ्रष्टाचार के अवसर कम होंगे।
5. किसानों का विश्वास: सरकार की इस सख्त और स्पष्ट नीति से किसानों का विश्वास सरकार और प्रशासन में बढ़ेगा।

पिछले रुझान और भविष्य की चुनौतियां

भारत में उर्वरक सब्सिडी एक बड़ा बजटीय बोझ है, लेकिन किसान हित में यह जारी है। हालांकि, इस सब्सिडी का लाभ अक्सर कालाबाजारों द्वारा हड़प लिया जाता था। यूपी सरकार का यह कदम सही दिशा में है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार भी नीम कोटेड यूरिया को बढ़ावा दे रही है, ताकि उसका गैर-कृषि उपयोग रोका जा सके और सब्सिडी का सही लाभ मिले।
भविष्य की चुनौती यह होगी कि इस सख्त निगरानी को लंबे समय तक कैसे जारी रखा जाए। साथ ही, किसानों को जागरूक करना भी जरूरी है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही बिल लेकर खाद खरीदें और किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना तुरंत दें। तकनीक का उपयोग करते हुए, यूपी में डीएपी, यूरिया के वितरण को पूरी तरह ऑनलाइन और ट्रैक किया जा सकता है, जैसा कि कई राज्यों में हो रहा है।

निष्कर्ष: किसान हित में ऐतिहासिक फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यूपी में खाद को लेकर सख्त ऐलान निश्चित रूप से राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। डीएपी, यूरिया और पोटाश जैसी आवश्यक खादों पर फिक्स रेट का यह सुपर फरमान अगर सही ढंग से लागू होता है, तो यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होगा, बल्कि राज्य की कृषि उत्पादकता और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) की चेतावनी एक स्पष्ट संदेश है कि अब किसानों के शोषण की कोई गुंजाइश नहीं बची है। यह फैसला दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में किसानों की समस्याओं का निराकरण सर्वोच्च स्थान पर है। अब यह जिम्मेदारी प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों की भी है कि वे इस फरमान को जमीन पर उतारें और यह सुनिश्चित करें कि राज्य का हर किसान बिना किसी रुकावट के, सही दाम पर, गुणवत्तापूर्ण खाद प्राप्त कर सके।

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