कॉफी में कॉकरोच – एक कप कॉफी आपको पहुंचा सकती है हॉस्पिटल, FDA ने खुद माना, जानें कैसे?

कॉफी में कॉकरोच: सुबह-सुबह आँखें खोलते ही या ऑफिस में काम के दौरान थकान भगाने के लिए अक्सर हमारा हाथ एक कप ताज़गी भरी कॉफी की तरफ बढ़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी कॉफी में आपके सबसे नापसंदीदा कीड़े यानी कॉकरोच के अंश भी मौजूद हो सकते हैं? यह सुनने में भले ही डरावना और अविश्वसनीय लगे, लेकिन यह एक सच्चाई है जिसे दुनिया भर की खाद्य नियामक संस्थाएं भी मानती हैं।

कॉफी में कॉकरोच
कॉफी में कॉकरोच

 

कहाँ से आया यह खुलासा?

यह मामला कोई नया नहीं है। इसकी शुरुआत 1980 के दशक में तब हुई जब एक प्रोफेसर ने गौर किया कि उन्हें बाजार में मिलने वाली पिसी हुई कॉफी पीने से ठीक वैसी ही एलर्जी हो रही थी, जैसी कॉकरोच के संपर्क में आने पर होती थी। इस घटना ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया और इसके बाद इस दिशा में रिसर्च शुरू हुई।

 

अमेरिकी FDA क्या कहता है?

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यूनाइटेड स्टेट्स फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) जैसी मानी हुई संस्था मानती है कि पिसी हुई कॉफी में 10% तक कीट पदार्थ (Insect Parts) मौजूद हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि कंपनियाँ जानबूझकर कॉफी में कॉकरोच मिला रही हैं। दरअसल, यह समस्या प्रोसेसिंग के दौरान स्वाभाविक रूप से होती है।

 

आख़िर कॉफी में पहुँच कैसे जाते हैं कॉकरोच?

 

इसके पीछे कई कारण हैं:

1. तेज़ खुशबू का आकर्षण: कॉकरोच कॉफी बीन्स की तीव्र और सुगंधित गंध की ओर आकर्षित होते हैं। जिन विशाल गोदामों में कॉफी बीन्स को रखा जाता है, वहाँ इन कीटों का पहुँच जाना एक आम बात है।

2. दिखने में समानता: हरी कॉफी बीन्स और कॉकरोच का रंग और आकार कई बार एक जैसा होता है। इतनी बड़ी मात्रा में बीन्स प्रोसेस करते समय हर एक कॉकरोच या दूसरे सूक्ष्म कीटों को अलग कर पाना लगभग नामुमकिन होता है।

3. प्रोसेसिंग का तरीका: कॉफी बीन्स को उगाने, काटने, सुखाने और पीसने का काम बड़े पैमाने पर होता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, बीन्स के साथ मौजूद छोटे-छोटे कीट भी पिस जाते हैं और कॉफी पाउडर का हिस्सा बन जाते हैं।

कॉफी में कॉकरोच
कॉफी में कॉकरोच

 

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क्या इससे सेहत को कोई नुकसान होता है?

अगर आप एक स्वस्थ व्यक्ति हैं, तो ज्यादातर मामलों में यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक नहीं माना जाता। FDA द्वारा स्वीकार्य यह मात्रा इतनी कम होती है कि इससे आम लोगों को कोई खतरा नहीं होता।

हालाँकि, एक बड़ी चेतावनी है: जिन लोगों को कॉकरोच या झींगा-क्रेब जैसे समुद्री जीवों से एलर्जी है, उन्हें सतर्क हो जाने की जरूरत है। दरअसल, कॉकरोच और कुछ समुद्री जीवों में एक जैसा प्रोटीन, ‘ट्रोपोमायोसिन’, पाया जाता है। ऐसे में, अगर किसी व्यक्ति को इस प्रोटीन से एलर्जी है, तो उसे पिसी हुई कॉफी पीने से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है, जो कभी-कभी गंभीर भी हो सकता है।

 

तो क्या अब कॉफी पीना छोड़ दें?

घबराने की जरूरत नहीं है! इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप कॉफी पीना छोड़ दें। अगर आपको किसी तरह की एलर्जी नहीं है, तो आप निश्चिंत होकर अपनी कॉफी का आनंद ले सकते हैं। हाँ, अगर आपको क्रस्टेशियंस (झींगा, केकड़ा) से एलर्जी है या कॉफी पीने के बाद शरीर पर रैशेज, सूजन या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।

कॉफी में कॉकरोच
कॉफी में कॉकरोच

 

एक विकल्प यह भी है कि आप पूरी बीन्स वाली कॉफी खरीदें और उसे घर पर पीसकर इस्तेमाल करें। इससे कीटों के मिलने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

 

निष्कर्ष:

कॉफीमें कॉकरोच के अंश का मामला भोजन उत्पादन की एक जटिल वास्तविकता को दर्शाता है, न कि कोई साजिश। यह जानकारी आपको सजग बनाए, डराए नहीं। तो अगली बार जब आप अपना पसंदीदा कप भरें, तो बिना किसी फिक्र के उसकी खुशबू और स्वाद का पूरा आनंद लें!

 


 

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