करवा चौथ 2025: 200 वर्षों में बन रहा है अद्भुत संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2025: हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। यह त्योहार सुहाग की रक्षा और पति की लंबी आयु की कामना को समर्पित है। करवा चौथ 2025 का त्योहार अपने साथ एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रहा है, जिसके बारे में मान्यता है कि ऐसा योग लगभग 200 वर्षों के बाद बन रहा है।

करवा चौथ 2025
करवा चौथ 2025

 

करवा चौथ का चंद्रमा से गहरा संबंध है, क्योंकि चंद्रमा को सौभाग्य और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र और अखंड सुहाग के लिए रखा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश ने एक बार चंद्रदेव को श्राप दिया था कि सीधे चंद्रमा को देखने पर व्यक्ति पर मिथ्या दोष का आरोप लगेगा। इसी कारण से, करवा चौथ के दिन महिलाएं छलनी के माध्यम से चंद्रदर्शन करती हैं और उन्हें अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं। यह परंपरा श्राप के प्रभाव से बचते हुए चंद्रमा के शुभ प्रभाव को प्राप्त करने का तरीका मानी जाती है।

करवा चौथ 2025: तिथि और दुर्लभ संयोग

सन 2025 में करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, करवा चौथ का व्रत शुक्रवार के दिन पड़ना एक शुभ संयोग माना जाता है। शुक्रवार को शुक्र ग्रह का दिन माना जाता है, जो प्रेम, सुख और सौंदर्य का कारक है। इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह विशेष संयोग लगभग दो शताब्दियों बाद बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

करवा चौथ 2025: तिथि का समय 

हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। 2025 में इस तिथि का विवरण इस प्रकार है:

करवा चौथ 2025
करवा चौथ 2025
  • तिथि आरंभ: 9 अक्टूबर 2025, रात 10 बजकर 54 मिनट से

  • तिथि समापन: 10 अक्टूबर 2025, शाम 7 बजकर 37 मिनट पर

  • व्रत की तिथि: उदयातिथि के नियम के कारण, चूंकि चतुर्थी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित है, इसलिए करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।

  • चंद्रोदय का समय (दिल्ली-एनसीआर): रात 08 बजकर 14 मिनट पर

  • चंद्रोदय का समय (मुंबई): रात 08 बजकर 36 मिनट पर

  • चंद्रोदय का समय (कोलकाता): रात 07 बजकर 52 मिनट पर

  • चंद्रोदय का समय (चेन्नई): रात 08 बजकर 02 मिनट पर

करवा चौथ 2025 व्रत की पूजन विधि

करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है, जिसमें महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए रहती हैं। व्रत की पूजन विधि इस प्रकार है:

  1. सुबह का समय: व्रत का दिन सुबह सूर्योदय से पहले ‘सरगी’ खाकर शुरू होता है। सरगी में फल, मिठाई और पानी शामिल होता है, जिसे माँ या सास अपने हाथों से बहू को खिलाती हैं।

  2. दिनभर का व्रत: सरगी के बाद से ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। दिन भर व्रत की कथाएं सुनी और सुनाई जाती हैं।

  3. शाम का पूजन: शाम के समय महिलाएं स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। पूजा की थाली सजाई जाती है, जिसमें करवा (मिट्टी का घड़ा), जल, दीया, चावल, रोली, मिठाई, फल और एक छलनी रखी जाती है।

  4. कथा श्रवण: सभी महिलाएं एकत्रित होकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। यह कथा सुहाग की मर्यादा और व्रत के महत्व को दर्शाती है।

  5. चंद्र दर्शन और अर्घ्य: रात में चंद्रमा के उदय होने का इंतजार किया जाता है। चंद्रमा को छलनी से देखकर जल अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद, महिलाएं अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं और फिर भोजन ग्रहण करती हैं।

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करवा चौथ का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

करवा चौथ की परंपरा का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इसका संबंध माता पार्वती (सती) और भगवान शिव से जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस कठोर व्रत को रखा था। एक अन्य कथा में, राजा सवंत की पत्नी वीरवती का उल्लेख है, जिसके व्रत की महिमा से उसके मृत पति को जीवनदान मिला था।

इसके अलावा, इस तिथि का संबंध भगवान गणेश से भी है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है, जिससे यह दिन और भी पवित्र हो जाता है।

निष्कर्ष

करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और स्नेह का प्रतीक है। यह त्योहार सामाजिक सद्भाव और स्त्री सशक्तिकरण का भी एक उदाहरण है, जहाँ महिलाएं एक-दूसरे के सहयोग और आशीर्वाद से यह व्रत पूरा करती हैं। करवा चौथ 2025 में 200 साल बाद बन रहे इस दुर्लभ संयोग के कारण यह करवा चौथ और भी विशेष बन गई है। सभी सुहागिनों के लिए यह दिन उनके अटूट प्रेम और अपने जीवनसाथी के प्रति समर्पण को व्यक्त करने का एक पावन अवसर है।

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