उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। एक नवंबर से बिजली विभाग के काम करने का तरीका पूरी तरह से बदलने जा रहा है। इस नए सिस्टम को ‘वर्टिकल सिस्टम’ यानी ‘ऊर्ध्वाधर प्रणाली’ का नाम दिया गया है। इसकी घोषणा मध्यांचल निगम की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने शनिवार को एक आदेश जारी करके की है। इस नई व्यवस्था का सीधा और सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। अब से विभाग का पूरा कामकाज एकीकृत तरीके से चलेगा, जिससे लोगों को बिजली विभाग में अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें हर काम में तेजी महसूस होगी।

क्या है बिजली विभाग में वर्टिकल सिस्टम और कैसे काम करेगा?
बिजली विभाग में वर्टिकल सिस्टम का मतलब है काम को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका प्रबंधन करना। पुराने सिस्टम में एक ही अधिकारी पर तकनीकि और वाणिज्यिक दोनों तरह का दबाव होता था, जिससे काम में देरी होती थी। अब इस नए सिस्टम के तहत बिजली विभाग में पूरे काम को दो स्पष्ट हिस्सों में बांट दिया गया है:
1. तकनीकि विभाग (Technical Wing)
2. वाणिज्यिक विभाग (Commercial Wing)
इस बंटवारे का मकसद यह है कि हर टीम अपने एक विशेष काम पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर सके। आइए अब इन दोनों विभागों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
तकनीकि विभाग: बिजली आपूर्ति का रखेगा ख्याल
इस विभाग की जिम्मेदारी बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस टीम का मुखिया एक अधीक्षण अभियन्ता (तकनीकि) होगा, जो मुख्य अभियंता के नीचे काम करेगा। इस अधिकारी की मुख्य जिम्मेदारियाँ होंगी:
- बिजली सप्लाई और नेटवर्क की मरम्मत: 33 केवी और 11 केवी जैसी बिजली लाइनों की नियमित देखभाल और मरम्मत करना।
- फॉल्ट का तुरंत निवारण: बिजली गुल होने या कोई तकनीकि खराबी होने पर उसे तुरंत ठीक कराने की व्यवस्था करना।
- बिजली आपूर्ति स्थिर रखना: यह सुनिश्चित करना कि बिजली बिना रुकावट के मिलती रहे और वोल्टेज सही बना रहे।
इस अधीक्षण अभियन्ता के नीचे तीन अधिशासी अभियंता काम करेंगे। फिर इनके नीचे सहायक अभियंता और तीन जूनियर इंजीनियर की एक बड़ी टीम होगी, जो जमीनी स्तर पर काम करके शहर की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने का काम करेगी। मतलब साफ है, अब बिजली गुल होने की स्थिति में उसे ठीक करने की जिम्मेदारी सिर्फ इसी टीम की होगी, जिससे काम में तेजी आएगी।
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वाणिज्यिक विभाग: ग्राहक सेवा और बिलिंग का रखेगा ख्याल
यह विभाग सीधे उपभोक्ताओं से जुड़े सारे काम देखेगा। इस टीम का नेतृत्व एक अधीक्षण अभियन्ता (वाणिज्य) करेंगे। इनकी मुख्य जिम्मेदारियाँ होंगी:
- ग्राहक सेवा: उपभोक्ताओं की हर तरह की शिकायतों का निपटारा करना।
- बिलिंग और संशोधन: सही और समय पर बिल बनाना और बिल में गड़बड़ी होने पर उसे सुधारना।
- राजस्व प्रबंधन: बिजली बिल के पैसों का संग्रहण करना।
- नए कनेक्शन: नए बिजली कनेक्शन देना और मीटर लगाना।
इन अधीक्षण अभियन्ता के नीचे तीन कार्यपालक अभियन्ता (एक्सईएन) रहेंगे, जिनकी अलग-अलग जिम्मेदारियाँ होंगी:
- एक एक्सईएन मीटर से जुड़े काम देखेंगे।
- दूसरे एक्सईएन बिल संशोधन का काम संभालेंगे।
- तीसरे एक्सईएन कलेक्शन यानी बिल की राशि जमा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
इनके नीचे सहायक अभियंता, अवर अभियंता, और अकाउंटेंट की एक बड़ी टीम होगी, जो ग्राहकों के काम तेजी से निपटाएगी।

उपभोक्ताओं को क्या-क्या मिलेगी राहत?
इस पूरे नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधाएं देना है। इससे उपभोक्ताओं को निम्नलिखित फायदे होंगे:
1. ऑफिस के चक्कर खत्म: अब उपभोक्ताओं को बिल सुधारने, नया कनेक्शन लेने या कोई शिकायत दर्ज कराने के लिए बिजली विभाग में अलग-अलग ऑफिसों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ज्यादातर काम एक ही जगह या ऑनलाइन हो जाएंगे।
2. घर बैठे ऑनलाइन सुविधा:
- बिल सुधारना: अगर किसी के बिल में कोई गलती है, तो उसे ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है। वह ऑनलाइन आवेदन कर सकता है या फोन से शिकायत दर्ज करा सकता है। जरूरी कागजात व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर भेजे जा सकेंगे।
- नया कनेक्शन: नया बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन होगी। जैसे ही उपभोक्ता ऑनलाइन आवेदन करके पैसा जमा करेगा, मीटर लगाने का काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
- शिकायत दर्ज करना: बिजली गुल होने या किसी अन्य समस्या की शिकायत 1912 नंबर पर दर्ज कराई जा सकेगी। शिकायत मिलते ही उसे सीधे संबंधित तकनीकि टीम को भेज दिया जाएगा, जिससे समस्या का तुरंत समाधान हो सकेगा।
3. तेज और कारगर कार्यवाही: चूंकि अब काम के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ टीमें बना दी गई हैं, इसलिए हर काम अपने निर्धारित समय पर ही होगा। चाहे बिजली ठीक करनी हो या बिल की शिकायत, हर काम तेज गति से होगा।
4. नए हेल्प डेस्क: उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए शहर में छह नए हेल्प डेस्क बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा पूरे जिले में कुल 21 नए हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। इन डेस्क पर जाकर लोग सीधे अपनी समस्या बता सकते हैं और तुरंत समाधान पा सकते हैं।
निष्कर्ष:
एक नवंबर से लागू हो रहा यह वर्टिकल सिस्टम उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है। यह व्यवस्था न सिर्फ काम की गति और पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि आम जनता के लिए बिजली विभाग के साथ काम करना भी आसान बना देगी। तकनीकि और वाणिज्यिक टीमों के अलग होने से जहां एक ओर बिजली की आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी, वहीं दूसरी ओर ग्राहक सेवा में सुधार आएगा। अब देखना यह है कि यह नया सिस्टम जमीन पर कितना सफल होता है, लेकिन शुरुआती तौर पर यह उपभोक्ताओं के लिए एक सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है।









