भारत सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत देश की सेवा कर चुके युवाओं के भविष्य को लेकर एक बहुत ही अहम और सराहनीय फैसला लिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कांस्टेबल स्तर की डायरेक्ट भर्ती की आधी यानी 50 प्रतिशत सीटें पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। इस फैसले से पूर्व अग्निवीरों को आगे नौकरी का बेहतर मौका मिलेगा और सुरक्षा बलों को पहले से प्रशिक्षित जवान मिलेंगे। इस नए बदलाव के साथ ही पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल टेस्ट से भी पूरी तरह छूट दी गई है, जिससे उनकी भर्ती प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो जाएगी।

इस BSF भर्ती 2025 में किए गए संशोधनों को अग्निपथ योजना को और मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब तक BSF और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में पूर्व अग्निवीरों के लिए सिर्फ 10% आरक्षण का प्रावधान था, लेकिन इसे बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब हर साल BSF में कांस्टेबल पदों पर होने वाली भर्ती में से आधी नौकरियां उन्हीं युवाओं को मिलेंगी, जिन्होंने अग्निवीर के रूप में चार साल तक सेना में अपनी सेवाएं दी हैं। इस आरक्षण से हजारों पूर्व अग्निवीरों को नौकरी का सीधा फायदा मिलेगा और उनके भविष्य को लेकर जो चिंता थी, वह काफी हद तक कम हो जाएगी।
यह भी पढ़ें – PM-YASASVI Scholarship 2026: हर साल ₹1.25 लाख तक की स्कॉलरशिप, ओबीसी/ईबीसी/डीएनटी छात्रों के लिए सरकारी योजना
आरक्षण का नया स्वरूप: 10% से 50% तक का सफर
पहले के नियमों के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (BSF) सहित विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव था। हालांकि, नए नोटिफिकेशन ने इस कोटे में पांच गुना की बढ़ोतरी कर दी है। अब BSF कांस्टेबल भर्ती की कुल सीटों का 50% हिस्सा सीधे तौर पर एक्स-अग्निवीर के लिए तय किया गया है। यह आरक्षण केवल BSF तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलस बल (CAPFs) और असम राइफल्स में भी ऐसे ही प्रावधान किए जा रहे हैं, हालांकि प्रत्येक बल में आरक्षण का प्रतिशत भिन्न हो सकता है।
इस 50% आरक्षण के अलावा, भर्ती में अन्य वर्गों के लिए भी कोटा निर्धारित किया गया है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, BSF कांस्टेबल भर्ती में 10% सीटें पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) के लिए और 3% तक की सीटें BSF के अपने कॉम्बैटाइज्ड कांस्टेबल (ट्रेड्समैन) के समायोजन के लिए आरक्षित रहेंगी। इस तरह, कुल मिलाकर 63% सीटें विभिन्न अनुभवी वर्गों के लिए रिजर्व हो जाएंगी, जबकि शेष 37% सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी। यह व्यवस्था इस बात को सुनिश्चित करती है कि सेवा दे चुके अनुभवी युवाओं को उनके योगदान का सम्मान मिले, साथ ही नए उम्मीदवारों के लिए भी अवसर बने रहें।
पूर्व अग्निवीरों को मिलने वाली विशेष छूट और सुविधाएं
इस नई डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें पूर्व अग्निवीरों के लिए कई प्रकार की छूट और सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो उनकी भर्ती को और आसान बना देती हैं।
-
आयु सीमा में छूट: सामान्य उम्मीदवारों के लिए BSF कांस्टेबल भर्ती की आयु सीमा 18 से 23 वर्ष तक रखी गई है। वहीं, पूर्व अग्निवीरों को इस सीमा में विशेष रियायत दी गई है। नियम के अनुसार, अग्निपथ योजना के पहले बैच के पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम 5 वर्ष तक की आयु में छूट मिलेगी। यानी अगर कोई युवा अग्निवीर के रूप में 4 साल की सेवा पूरी करता है, तो उसकी आयु में यह 4 साल जोड़ दिए जाएंगे और उसे अतिरिक्त 1 साल की छूट भी मिल सकती है। बाद के बैच के अग्निवीरों के लिए यह छूट 3 वर्ष तक की होगी। इससे सेवानिवृत्त हो चुके अग्निवीरों के लिए भर्ती में आयु संबंधी बाधा खत्म हो जाएगी।
-
फिजिकल टेस्ट से पूर्ण छूट: यह सबसे महत्वपूर्ण छूट है। पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) दोनों से ही मुक्त रखा गया है। चूंकि ये युवा पहले ही भारतीय सेना में कठोर प्रशिक्षण से गुजर चुके होते हैं और उनकी शारीरिक क्षमता व फिटनेस स्तर पहले ही सिद्ध हो चुका होता है, इसलिए उन्हें दोबारा इस प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे न सिर्फ उनका समय बचेगा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की गति भी तेज होगी।
-
शैक्षणिक योग्यता में लचीलापन: BSF कांस्टेबल भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक यानी 10वीं पास रखी गई है। पूर्व अग्निवीरों के लिए सेना में उनकी सेवा के दौरान प्राप्त समकक्ष शैक्षणिक योग्यता को भी मान्यता दी जाएगी। यानी अगर किसी अग्निवीर ने सेना में रहते हुए कोई तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है, तो उसे भी लाभ मिल सकता है।
यह भी पढ़ें – यूपी बंपर भर्ती 2026: 1.5 लाख सरकारी नौकरियों का बड़ा ऐलान, जानें किस विभाग में कितने पद मिलेंगे
भर्ती प्रक्रिया का दो-चरणीय मॉडल
नए नियमों के तहत BSF कांस्टेबल की भर्ती एक स्पष्ट दो-चरणीय प्रक्रिया के तहत की जाएगी। इससे भर्ती को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
-
पहला चरण (50% आरक्षित सीटें): इस चरण में सीधे 50% सीटों पर सिर्फ पूर्व अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी संबंधित नोडल फोर्स यानी BSF के पास होगी। वे सीधे तौर पर आवेदन आमंत्रित करेंगे, चयन प्रक्रिया पूरी करेंगे और नियुक्ति पत्र जारी करेंगे।
-
दूसरा चरण (शेष 47% सीटें): पहले चरण के बाद बची हुई 47% सीटों (जिसमें 10% पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं) पर भर्ती का काम स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) के माध्यम से किया जाएगा। इसमें सामान्य वर्ग और अन्य आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवार शामिल होंगे।
-
रोल-ओवर का प्रावधान: अगर पहले चरण में पूर्व अग्निवीरों की कुछ सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन सीटों को दूसरे चरण में सामान्य श्रेणी की सीटों में शामिल कर लिया जाएगा और वहां से भरी जाएगा। इससे सीटों के बर्बाद होने की संभावना नहीं रहेगी।
महिला पूर्व अग्निवीरों के लिए अवसर
नए नियमों में महिला उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित प्रतिशत तय नहीं किया गया है। इसकी जगह, हर वर्ष BSF के महानिदेशक (DG BSF) संगठन की कार्यात्मक जरूरतों और रिक्त पदों के आधार पर महिला भर्ती की संख्या तय करेंगे। चूंकि अग्निपथ योजना में भी महिलाएं शामिल हो रही हैं, इसलिए भविष्य में महिला पूर्व अग्निवीरों के लिए BSF और अन्य बलों में रोजगार के दरवाजे खुलते देखे जा सकते हैं।
अग्निपथ योजना: एक संक्षिप्त परिचय और यह नया कदम क्यों है अहम?
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में भारत सरकार द्वारा सेना में युवाओं की भर्ती के एक नए मॉडल के तौर पर की गई थी। इसके तहत 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को थल सेना, वायु सेना और नौसेना में ‘अग्निवीर’ के रूप में चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। इस अवधि के दौरान उन्हें सम्मानजनक वेतन और लाभ मिलते हैं। चार वर्ष बाद, लगभग 25% अग्निवीरों को स्थायी कमीशन या नियमित सेवा में रखा जाता है, जबकि 75% अग्निवीरों को एकमुश्त ‘सेवानिवृत्ति’ राशि (लगभग 11-12 लाख रुपये) के साथ सेवा से मुक्त कर दिया जाता है।
इस 75% युवाओं के भविष्य को लेकर हमेशा से चर्चा रही है। BSF सहित अन्य सुरक्षा बलों में 50% आरक्षण का यह फैसला उसी चिंता को दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे युवाओं में यह विश्वास पैदा होगा कि अग्निपथ में शामिल होना एक सुरक्षित करियर विकल्प है, क्योंकि सेना में प्रशिक्षण के बाद उनके पास केंद्रीय सुरक्षा बलों में स्थायी नौकरी पाने का एक स्पष्ट रास्ता मौजूद होगा।
इस निर्णय के व्यापक लाभ और प्रभाव
-
सुरक्षा बलों को मिलेगा अनुभवी कर्मी: इस फैसले से BSF को ऐसे जवान मिलेंगे जो पहले से ट्रेनिंग ले चुके हैं और ड्यूटी का अनुभव भी रखते हैं। इन युवाओं को बुनियादी प्रशिक्षण देने पर खर्च होने वाले समय और संसाधन बचेंगे।
-
रोजगार का सुनिश्चित अवसर: हर साल हजारों पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी पाने का एक पक्का मौका मिलेगा, जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
-
युवाओं का मनोबल बढ़ेगा: इससे अग्निवीर बनने वाले युवाओं का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें पता होगा कि चार साल बाद भी नौकरी के विकल्प खुले रहेंगे।
-
देश की सुरक्षा मजबूत होगी: अनुभवी और दो बार प्रशिक्षित जवान देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभा पाएंगे।









